Last Updated:February 18, 2026, 13:57 IST
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने एक पूर्व सेना जवान की दिव्यांग पेंशन की याचिका खारिज कर दी. अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जवान को हुआ ब्रेन स्ट्रोक उसकी बीड़ी पीने की आदत के कारण हुआ था, न कि सेना की नौकरी से. मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने साफ किया कि व्यक्तिगत आदतों से जुड़ी बीमारी पर पेंशन नहीं दी जा सकती.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में एक पूर्व जवान का एक ऐसा मामला आया जिसने पेंशन पर नई बहस छेड़ दी है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट में सेना का एक पूर्व जवान दिव्यांग पेंशन की मांग को लेकर पहुंचा था. सुप्रीम कोर्ट ने सेना के जवान की याचिका को खारिज कर दिया. आपको ये मामला भले ही पहली नजर में संवेदनशील लग रहा हो लेकिन जब आप पूरी बात समझेंगे तो इस मामले में अलग राय बनेगी. दरअसल पूर्व सैनिक ने दावा किया कि उसे ब्रेन स्ट्रोक हुआ और यह सैन्य सेवा की परिस्थितियों की वजह से हुआ. लेकिन मेडिकल रिपोर्ट और जांच में सामने आया कि वह रोजाना करीब 10 बीड़ी पीने की आदत रखता था. इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका रद्द कर दी.
बार बेंच की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को अहम आधार माना. कोर्ट ने कहा कि स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारी को सेवा से जोड़ना तभी संभव है जब उसका सीधा संबंध ड्यूटी की परिस्थितियों से साबित हो. कोर्ट ने साफ कहा कि अगर बीमारी व्यक्ति की खुद की आदतों से जुड़ी है, तो उसे सैन्य सेवा से जोड़कर मुआवजा नहीं दिया जा सकता. यह मामला केवल एक याचिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सेना में सेवा के दौरान स्वास्थ्य और व्यक्तिगत जिम्मेदारी के बीच संतुलन को लेकर बड़ी कानूनी बहस का विषय बन गया है.
कोर्ट ने पूर्व सैनिक की याचिका क्यों खारिज की?
कोर्ट ने पाया कि पूर्व सैनिक को हुआ ब्रेन स्ट्रोक उसकी व्यक्तिगत आदत यानी लगातार बीड़ी पीने की वजह से हुआ था. मेडिकल बोर्ड और मेडिकल रिव्यू बोर्ड दोनों ने अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया कि बीमारी का सैन्य सेवा से कोई सीधा संबंध नहीं था. अदालत ने सेना के पेंशन नियमों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी बीमारी, जो शराब, तंबाकू या अन्य व्यक्तिगत कारणों से होती है, उसके लिए दिव्यांग पेंशन नहीं दी जा सकती.
इस मामले में मेडिकल रिपोर्ट की क्या भूमिका रही?
मेडिकल रिपोर्ट इस फैसले का सबसे अहम आधार बनी. रिपोर्ट में बताया गया कि पूर्व सैनिक को ‘इस्केमिक स्ट्रोक’ हुआ था, जो आम तौर पर ब्लड क्लॉट या धमनियों में अवरोध के कारण होता है. मेडिकल विशेषज्ञों ने माना कि लगातार धूम्रपान इस बीमारी का बड़ा कारण बन सकता है. इसी आधार पर मेडिकल बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि बीमारी न तो सेवा के कारण हुई और न ही सेवा से बढ़ी.
इस फैसले का भविष्य में क्या असर हो सकता है?
यह फैसला सैन्य पेंशन से जुड़े मामलों में एक मिसाल के तौर पर देखा जा सकता है. इससे यह साफ संदेश गया है कि केवल बीमारी होने भर से पेंशन का दावा स्वीकार नहीं होगा. बीमारी और सैन्य सेवा के बीच स्पष्ट संबंध साबित करना जरूरी होगा. साथ ही यह फैसला सैनिकों को स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भी संकेत देता है.
कोर्ट ने पेंशन नियमों का दिया हवाला
कोर्ट ने अपने फैसले में सेना के पेंशन नियम 1961 और मेडिकल अधिकारियों की गाइड का उल्लेख किया. इसमें साफ लिखा है कि अगर बीमारी या मृत्यु शराब, तंबाकू या अन्य व्यक्तिगत आदतों से होती है तो उसे सेवा से जुड़ा नहीं माना जाएगा. अदालत ने कहा कि यह नियम स्पष्ट रूप से बताता है कि ऐसी स्थितियों में मुआवजा नहीं दिया जा सकता. पूर्व सैनिक ने पहले अपनी याचिका आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल में दायर की थी. लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली. इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. अदालत ने सभी मेडिकल दस्तावेजों और रिपोर्ट्स की जांच की और पाया कि ट्रिब्यूनल का फैसला सही था. कोर्ट ने कहा कि सेवा के दौरान होने वाली बीमारी और व्यक्तिगत जीवनशैली से जुड़ी बीमारी में फर्क करना जरूरी है. इस फैसले ने सेना से जुड़े पेंशन मामलों में कानूनी स्थिति को और स्पष्ट कर दिया है. कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि सेना में सेवा करने वाले जवानों को अपने स्वास्थ्य और जीवनशैली पर विशेष ध्यान देना चाहिए. यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों में कानूनी मार्गदर्शन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है और इससे पेंशन से जुड़े विवादों में स्पष्टता आएगी.About the Author
सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह...और पढ़ें
First Published :
February 18, 2026, 13:56 IST

1 hour ago
