Tamilnadu Chunav: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मार्च में दो बार तमिलनाडु का दौरा करने वाले हैं. यह इस साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एनडीए की आक्रामक रणनीति का हिस्सा है. राजनीति के जानकारों का कहना है कि पीएम मोदी एक मार्च को मदुरै में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे, जबकि मार्च मार्च को वह वेल्लोर में रैली करेंगे. ये दौरे राज्य के दक्षिणी और उत्तरी-पूर्वी क्षेत्रों में एनडीए के समर्थन को मजबूत करने के उद्देश्य से हैं.
चुनाव आयोग के इस महीने के अंत या मार्च के मध्य में पांच राज्यों- तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित करने की संभावना है. तमिलनाडु में मतदान अप्रैल में होने की उम्मीद है. यहां के विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को समाप्त होगा.
एनडीए की कमान पलानीस्वामी के हाथ
तमिलनाडु में एनडीए की कमान एआईएडीएमके प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) के हाथ में है. गठबंधन में बीजेपी, पीएमके (पट्टाली मक्कल कटची), एएमएमके (अम्मा मक्कल मुनेत्र कटची) जैसे प्रमुख क्षेत्रीय दल शामिल हैं. जनवरी में पीएमके के औपचारिक रूप से शामिल होने और एएमएमके के साथ गठजोड़ से एनडीए की स्थिति मजबूत हुई है. सीट-शेयरिंग की बातचीत अंतिम चरण में है, जिसमें एआईएडीएमके को 160-170, बीजेपी को 45-50, पीएमके को 15-18 और अन्य को 5-10 सीटें मिलने की संभावना है.
पीएम मोदी का यह दौरा एनडीए की पहली बड़ी रैली के बाद दूसरा प्रमुख कदम है. मदुरै में रैली दक्षिण तमिलनाडु के मंदिर शहरों और ग्रामीण इलाकों में समर्थन जुटाने के लिए है, जबकि वेल्लोर उत्तरी क्षेत्र में वन्नियार और अन्य जातीय समूहों को लक्षित करेगा. स्थानीय नेता ग्रासरूट स्तर पर कार्यकर्ताओं को जुटा रहे हैं, ताकि बड़ी भीड़ जुटाई जा सके. सूत्रों का कहना है कि सीट-शेयरिंग पीएम के दौरे से पहले अंतिम रूप ले लेगी, जिससे गठबंधन एकजुट मोर्चा पेश कर सके.
सुदूर दक्षिण में बीजेपी की संभावना?
तमिलनाडु में बीजेपी का प्रदर्शन पारंपरिक रूप से कमजोर रहा है. 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का 20 सीटों पर 2.62 फीसदी वोट शेयर रहा, जबकि 2024 लोकसभा में अकेले लड़कर 11.1 फीसदी वोट शेयर हासिल किया था. यह दक्षिण भारत में बीजेपी की बढ़ती पैठ का संकेत है, लेकिन सीट जीतने में अभी भी चुनौती बाकी है.
एनडीए की ताकत एआईएडीएमके की बूथ-स्तरीय मजबूती, पीएमके की उत्तरी वन्नियार बेल्ट और बीजेपी की शहरी-सेमी-अर्बन पहुंच में है. संयुक्त वोट शेयर 30-33 फीसदी तक पहुंच सकता है, जो सत्तारूढ़ डीएमके को कड़ी टक्कर दे सकता है. डीएमके के पास 2021 में 37.7 फीसदी वोट मिले थे.
हालांकि, एनडीए में आंतरिक तनाव भी हैं. पीएमके के एस. रामदास और वी.के. शशिकला जैसे नेताओं के स्वतंत्र चुनाव लड़ने की अटकलें गठबंधन के वोट बैंक को बांट सकती हैं. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एनडीए को खाली बर्तन कहकर निशाना साधा है और केंद्र पर तमिलनाडु को बजट में कुछ न देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि 2026 में एनडीए को जीरो सीटें मिलनी चाहिए. वहीं, विपक्षी खेमे में टीवीके (विजय की पार्टी) जैसे नए खिलाड़ी त्रिकोणीय मुकाबला बना सकते हैं. पीएम मोदी के दौरे एनडीए के लिए मनोबल बढ़ाने और परिवर्तन का संदेश देने का मौका है. यदि गठबंधन एकजुट रहता है और जातीय-सामाजिक समीकरण साध लेता है, तो तमिलनाडु में बीजेपी की पैठ बढ़ सकती है.

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