दो बार खांसिए और AI 'स्वासा' दे देगा आपकी बीमारी की रिपोर्ट, एम्स ने दी हरी झंडी, जानें SWAASA के बारे में

1 hour ago

Last Updated:February 18, 2026, 14:21 IST

AI Swaasa for Respiratory disease detection: हेल्‍थकेयर में एआई अब कमाल कर रहा है. एम्स नई दिल्ली ने SWAASA एआई एप को 460 मरीजों पर जांच के बाद अस्थमा और सीओपीडी की जांच के लिए हरी झंडी दे दी है. इस एप पर बस मरीज को अपनी खांसी रिकॉर्ड करनी होती है और यह 8 मिनट में रिपोर्ट देता है. इसे इंटरनेशनल एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भी शामिल क‍िया गया है.

दो बार खांसिए और AI 'स्वासा' दे देगा आपकी बीमारी की रिपोर्ट, एम्‍स ने दी....Zoom

आपकी खांसी र‍िकॉर्ड कर एआई स्‍वासा बता देगा आपको अस्‍थमा और सीओपीडी है या नहीं.

AI Swaasa APP for COPD-Asthma Diagnosis: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हर फील्ड में झंडे गाढ़ रहा है और इससे हेल्थ सेक्टर भी अछूता नहीं है. हेल्थ केयर में एआई के ऐसे ऐसे एप्लिकेशन आ रहे हैं जो पलभर में आपकी बीमारी की रिपोर्ट दे देते हैं. अब रेस्पिरेटरी हेल्थ केयर के लिए भी एक ऐसा ही एआई प्लेटफॉर्म तैयार हुआ है जो बस आपके खांसने की आवाज सुनेगा और मिनटों में आपके हाथ में बीमारी की रिपोर्ट थमा देगा. स्वासा नाम के इस एआई प्लेटफॉर्म को परखने के बाद एम्स नई दिल्ली ने भी हरी झंडी दे दी है, और अब इसे मरीजों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.

दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहे इंटरनेशनल एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के कलेक्शन में स्वासा को इनोवेशन केस स्टडी के रूप में शामिल किया गया है. इसे लेकर सेंटर फॉर कम्यूनिटी मेडिसिन एम्स नई दिल्ली में एडिशनल प्रोफेसर डॉ. हरीश रमेश साल्वे ने बताया कि यह एक एआई बेस्ड एप्लिकेशन है जो फोन पर चलाया जा सकता है. इसे एक प्राइवेट कंपनी ने ही बनाया है लेकिन इसकी एफिकेसी की जांच एम्स नई दिल्ली में की गई है.

डॉ. साल्वे ने कहा, ‘एआई स्वासा को एम्स में गोल्ड स्टेंडर्ड स्पाइरोमेट्री के अगेंस्ट चेक किया गया था और यह मॉडरेट स्तर तक कारगर साबित हुआ है. एम्स में आए 460 मरीजों पर हुए इस एप के टेस्ट में पाया गया कि यह प्राइमरी और सेकेंडरी लेवल पर बीमारी का पता लगाने के लिए बेहतर है. यह एप आपके द्वारा दी गई जानकारी और खांसने की आवाज को एनालाइज करके बता देता है कि मरीज को अस्थमा या सीओपीडी है या नहीं है.’

क्या है यह एप और कैसे काम करता है, आइए डॉ. साल्वे से विस्तार से जानते हैं..

स्वासा एप किन बीमारियों की जांच कर सकता है?
यह एआई एप फिलहाल मरीज में अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज का पता लगाने में कारगर है. पारंपरिक रूप से इन बीमारियों के लिए श्वसन जांच की जाती है लेकिन यह एप खांसी के तरीके से बीमारी की रिपोर्ट दे सकता है.

क्या यह एप एम्स में इस्तेमाल हो रहा है?
इस एप का इस्तेमाल बेसिकली उन जगहों के लिए बेस्ट है जहां स्पाइरोमेट्री यानि गोल्ड स्टेंडर्ड जैसी जांचों की सुविधा नहीं हैं, जैसे प्राइमरी लेवल के स्वास्थ्य केंद्र, पीएचसी, आरोग्य मंदिर और कुछ स्थानीय सरकारी अस्पताल. एम्स में पहले से जांच की सभी सुविधाएं मौजूद हैं. हालांकि इस एप को एम्स नई दिल्ली के आउटरीच सेंटर बल्लभगढ़ और कैंपों में इस्तेमाल किया जा रहा है.

460 मरीजों पर हुई जांच में यह कितना कारगर निकला?
एम्स में 460 मरीजों की जांच स्पाइरोमेट्री के अलावा इस एआई एप से भी की गई, दोनों की तुलना करने पर मॉडरेट को रिलेशन देखने को मिला. इसने बेहतर तरीके से सीओपीडी और अस्थमा का पता लगाया.

यह ऐप कैसे काम करता है?
स्वासा एप को स्क्रीनिंग के लिए बनाया गया है तो सबसे पहले इसमें मरीज की डिटेल्स डाली जाती हैं और अगर उन्हें कुछ लक्षण या परेशानी है तो वह भी दर्ज किया जाता है. इसके बाद एप मरीज की खांसी रिकॉर्ड करता है, इसके लिए मरीज को दो-तीन बार खांसना होता है. खांसी रिकॉर्ड होने के 8 मिनट बाद मरीज की रिपोर्ट आ जाती है.

क्या इस एप से टीबी की भी जांच होगी?
हां संभव है क्योंकि इस एप को टीबी की जांच के लिए भी तैयार और टेस्ट किया जा रहा है. अगर यह टीबी की भी जांच करने लगेगा तो एक और बड़ी उपलब्धि होगी.

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प्रिया गौतमSenior Correspondent

अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्...और पढ़ें

Location :

Delhi,Delhi,Delhi

First Published :

February 18, 2026, 14:21 IST

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