Last Updated:February 13, 2026, 14:06 IST
Rahul Gandhi Meet Farmer Union Leader: राहुल गांधी ने संसद परिसर में देशभर के किसान नेताओं के साथ अहम बैठक की. इस दौरान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर किसानों की आजीविका पर संभावित खतरे पर चर्चा हुई. किसान संगठनों ने विदेशी कृषि आयात का विरोध किया और राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की रणनीति पर भी विचार किया गया. (सभी फोटो X)
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में संसद परिसर में देशभर के किसान संगठनों के नेताओं के साथ अचानक अहम बैठक की. इस बैठक ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि इसे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और उसके कृषि क्षेत्र पर संभावित प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है. बैठक में किसान नेताओं ने आशंका जताई कि प्रस्तावित व्यापार समझौते से विदेशी कृषि उत्पादों का आयात बढ़ सकता है. इससे भारतीय किसानों की आय और बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता है. यह बैठक लोकसभा परिसर में हुई, जहां किसान संगठनों ने अपनी चिंताओं को विस्तार से रखा और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए.
बैठक के दौरान किसान नेताओं ने खास तौर पर मक्का, सोयाबीन, कपास, फल और मेवा उत्पादकों की आजीविका को लेकर चिंता जताई. उनका कहना था कि अगर आयात के दरवाजे खुलते हैं तो भारतीय किसानों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा. इसमें उन्हें कीमतों में गिरावट और बाजार हिस्सेदारी खोने का खतरा हो सकता है. राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि यह समझौता धीरे-धीरे अन्य कृषि फसलों के लिए भी आयात का रास्ता खोल सकता है. उन्होंने इसे किसानों और खेत मजदूरों की आजीविका के लिए गंभीर चुनौती बताया और किसान संगठनों को भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा.
बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए. इसमें ऑल इंडिया किसान कांग्रेस से सुखपाल सिंह खैरा और अखिलेश शुक्ला, राजस्थान से रणजीत एस. संधू, हरियाणा के भारतीय किसान मजदूर यूनियन से एडवोकेट अशोक बलहारा, केरल से पी.टी. जॉन, बीकेयू क्रांतिकारी से बलदेव सिंह जीरा, प्रोग्रेसिव फार्मर्स फ्रंट से आर. नंदकुमार और बीकेयू शहीद भगत सिंह से अमरजीत सिंह मोहड़ी शामिल रहे. इसके अलावा आम किसान यूनियन से केदार सिरोही, पंजाब किसान कांग्रेस से किरणजीत सिंह संधू, राज्यसभा सदस्य गुरप्रीत सिंह सांघा, किसान मजदूर मोर्चा इंडिया से गुरमनित सिंह मंगत और जम्मू-कश्मीर जमींदारा फोरम से हामिद मलिक भी इस चर्चा का हिस्सा बने.
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बैठक में हरियाणा किसान संघर्ष समिति के धर्मवीर गोयत, कृषक समाज के ईश्वर सिंह नैन, साउथ हरियाणा किसान यूनियन के सतबीर खटाना और किसान मजदूर मोर्चा से तेजवीर सिंह समेत कई अन्य संगठनों ने भी अपनी राय रखी. किसान नेताओं ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कृषि लागत लगातार बढ़ी है, जबकि फसलों के दाम स्थिर या कम रहे हैं. ऐसे में विदेशी उत्पादों का आयात किसानों की स्थिति को और कमजोर कर सकता है. उन्होंने मांग की कि किसी भी व्यापार समझौते से पहले किसानों से व्यापक परामर्श किया जाए और कृषि क्षेत्र के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
बैठक में राहुल गांधी और किसान नेताओं के बीच बड़े स्तर पर राष्ट्रीय आंदोलन की जरूरत पर भी चर्चा हुई. नेताओं का मानना था कि अगर यह समझौता किसानों के हितों के खिलाफ जाता है, तो देशभर में विरोध प्रदर्शन और जनजागरण अभियान चलाया जा सकता है. राहुल गांधी ने कहा कि किसानों के मुद्दे केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़े हैं. उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष इस मुद्दे को संसद और सड़कों दोनों जगह उठाने की रणनीति बना सकता है. इससे आने वाले समय में कृषि नीति और व्यापार समझौतों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक केवल व्यापार समझौते तक सीमित नहीं है बल्कि ग्रामीण और कृषि वोट बैंक को लेकर व्यापक रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है. किसान आंदोलन देश की राजनीति में पहले भी निर्णायक भूमिका निभा चुका है और आने वाले चुनावों से पहले किसान संगठनों के साथ संवाद बढ़ाना विपक्ष के लिए अहम कदम माना जा रहा है. यह बैठक संकेत देती है कि कृषि मुद्दे फिर से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ सकते हैं और आने वाले महीनों में इस विषय पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो सकता है.
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First Published :
February 13, 2026, 14:06 IST

1 hour ago
