Last Updated:February 13, 2026, 13:55 IST
RERA News: RERA यानी रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद तीखी टिप्पणी की है. CJI जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यदि RERA को खत्म भी कर दिया जाएगा तो कोर्ट को कोई दिक्कत नहीं है. शीर्ष अदालत ने आगे कहा कि यह बस डिफॉल्टर यानी दागी बिल्डर्स की मदद कर रहा है.

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह संस्था डिफॉल्टर बिल्डरों को संरक्षण देने के अलावा कुछ नहीं कर रही है. अदालत ने यहां तक कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो इस संस्था को समाप्त करने में भी उसे कोई आपत्ति नहीं होगी. प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत (CJI Justice Surya Kant) और जस्टिस जॉयमाल्य बागची (Justice Joymalya Bagchi) की पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की जब हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा राज्य RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के फैसले को चुनौती देने वाले मामले पर सुनवाई हो रही थी_
CJI जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि जिन लोगों के हितों की रक्षा के लिए RERA का गठन किया गया था, वे आज निराश, हताश और आक्रोशित हैं. अदालत ने राज्यों को सलाह दी कि वे इस प्राधिकरण के गठन और उसकी संरचना पर पुनर्विचार करें. CJI ने कहा, ‘हर राज्य में यह संस्था रिटायर्ड IAS अधिकारियों का पुनर्वास केंद्र बन गई है. आम लोगों को कोई प्रभावी राहत नहीं मिल रही.’ मामला उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें Himachal Pradesh High Court ने जून 2025 की उस अधिसूचना पर रोक लगा दी थी, जिसके तहत RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला ट्रांसफर किया गया था. 30 दिसंबर 2025 के आदेश में हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश को जारी रखने का निर्देश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार को अपनी पसंद के स्थान पर RERA कार्यालय ले जाने की अनुमति दे दी, हालांकि यह अंतिम निर्णय हाईकोर्ट में लंबित याचिका के परिणाम पर निर्भर करेगा.
हिमाचल प्रदेश की क्या है दलील?
राज्य सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट माधवी दीवान ने दलील दी कि शिमला शहर में बढ़ते दबाव और भीड़ को कम करने के उद्देश्य से यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर लिया गया है. सरकार का कहना है कि पालमपुर, धर्मशाला और अन्य शहरों के विकास की नीति के तहत यह कदम उठाया गया है. वहीं, याचिकाकर्ता पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि RERA के 90 प्रतिशत प्रोजेक्ट शिमला, सोलन, परवाणू और सिरमौर जिलों में हैं, जो अधिकतम 40 किलोमीटर के दायरे में आते हैं. लगभग 92 प्रतिशत लंबित शिकायतें भी इन्हीं जिलों से संबंधित हैं, जबकि धर्मशाला में मात्र 20 परियोजनाएं हैं. ऐसे में कार्यालय को धर्मशाला ले जाना व्यावहारिक नहीं होगा.
रिटायर्ड अफसरों को नियुक्त करने का क्या औचित्य?
सुनवाई के दौरान CJI जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी सवाल उठाया कि RERA में सेवानिवृत्त नौकरशाहों की नियुक्ति का क्या औचित्य है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार पालमपुर और धर्मशाला जैसे शहरों का विकास चाहती है, तो पर्यावरण और स्थानीय जरूरतों को समझने वाले विशेषज्ञों और वास्तुकारों की सेवाएं ली जानी चाहिए. ‘NDTV’ की रिपोर्ट के अनुसार, पीठ को यह भी बताया गया कि RERA के आदेशों के खिलाफ अपीलें वर्तमान में शिमला के प्रधान जिला न्यायाधीश के समक्ष सुनी जाती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि कार्यालय धर्मशाला ट्रांसफर होता है तो अपीलीय अधिकार भी धर्मशाला के प्रधान जिला न्यायाधीश को सौंपे जा सकते हैं, ताकि प्रभावित पक्षों को शिमला आने में असुविधा न हो.
ओबीसी आयोग का मामला
9 फरवरी को एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार के ओबीसी आयोग को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक को भी रद्द कर दिया था, तब शीर्ष अदालत ने कहा था कि इस प्रकार के निर्णय नीतिगत मामलों के दायरे में आते हैं और सामान्यतः न्यायिक हस्तक्षेप के योग्य नहीं होते. सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों ने RERA की प्रभावशीलता और उसकी संरचना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब यह देखना होगा कि राज्य सरकारें इस पर क्या रुख अपनाती हैं और क्या वास्तव में RERA की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में कदम उठाए जाते हैं.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
February 13, 2026, 13:55 IST

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