राजस्थान पंचायत और नगरीय चुनाव में 2 बच्चों की बाध्यता खत्म, क्या इससे BJP को होगा जबरदस्त फायदा?

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Last Updated:February 26, 2026, 14:33 IST

Rajasthan Panchayat and Urban Body Elections 2026: भजनलाल शर्मा कैबिनेट ने बड़ा फैसला लेते हुए पंचायतीराज संशोधन बिल और राजस्थान नगरपालिका संशोधन बिल 2026 को मंजूरी दे दी है. इस निर्णय के साथ ही पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए लागू 'दो से अधिक संतान' की बाध्यता समाप्त कर दी गई है. आइए समझने की कोशिश करते हैं कि क्या इस फैसले से बीजेपी को फायदा होगा या नहीं.

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जयपुर: राजस्थान की भजनलाल कैबिनेट ने पंचायतीराज संशोधन बिल और राजस्थान नगरपालिका संशोधन बिल 2026 को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय के चुनावों में दो बच्चों की बाध्यता खत्म हो गई है. यानी अब जिन लोगों के दो से ज्यादा बच्चे हैं वो भी पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव में प्रत्याशी बन पाएंगे. भजनलाल सरकार इस बिल को विधानसभा के इसी सत्र में पेश कर इसे पास कराकर लागू करने की तैयारी में है.

सरकार के इस फैसले पर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या बीजेपी को आगामी पंचायत और नगरीय चुनावों में जबरदस्त फायदा होने वाला है. राजस्थान के गांव-कस्बों के चट्टी चौराहों पर गुरुवार सुबह से इस बात की चर्चा होती दिखी कि बीजेपी ने 35 साल पुराने नियम को बदलकर गांव की सरकार में लोगों की भागीदारी बढ़ाने वाला कदम उठाया है.

राज्यवर्धन सिंह राठौर और जोगाराम पटेल के बयानों में बड़ा हिंट

1995 में भैरोंसिंह शेखावत की अगुवाई वाली बीजेपी की सरकार ने राजस्थान में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए दो बच्चों की बाध्यता लागू की थी. अब जब बीजेपी सरकार वाली कैबिनेट ने ही इस फैसले को बदला है तो इसपर मीडिया से बात करने के लिए राज्य के दो मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर और जोगाराम पटेल मीडिया के सामने आए.

राज्यवर्धन सिंह राठौर ने साफ शब्दों में कहा कि राजस्थान सरकार ने आज बड़ा फैसला करते हुए पंचायत और नगरपालिका चुनाव में दो संतान का नियम हटा दिया है. अब किसी व्यक्ति के कितने भी बच्चे हैं वो पंचायत और नगरपालिका चुनाव लड़ सकता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा समय की मांग है कि नियम में बदलाव किए जाएं. सीएम भजनलाल शर्मा ने जनहित की भावनाओं का ख्याल रखते हुए यह फैसला लिया है.

वहीं मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि उस दौर में जनसंख्या बढ़ोत्तरी का भारी दबाव था. इसलिए हालात को कंट्रोल करने के लिए तब की सरकार ने दो बच्चों की बाध्यता लागू की थी. अब हालात सुधर गए हैं. अब पहले वाली स्थिति नहीं रही है. दोनों नेताओं के बयान से साफ है कि बीजेपी पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव के नियमों में बदलाव का लेकर पॉजिटिव है. जमीन स्तर पर फीडबैक लेने के बाद ही इतना बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है.

विपक्षी कांग्रेस चुनाव नियमों में बदलाव पर नाराज

पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों के नियम में बदलाव पर विपक्षी कांग्रेस के नेता नाराज हैं. उन्होंने कहा कि भारत चीन को पीछे छोड़कर जनसंख्या के मामले में नंबर वन बन चुका है. दूसरी तरफ भजनलाल सरकार के मंत्री कह रहे हैं कि हालात सुधर रहे हैं. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि भजनलाल सरकार ने यह फैसला आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री को खुश करने के लिए यह फैसला लिया है.

वहीं राज्य में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि सरकार बिना योजना के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एजेंटों को साधने के लिए ऐसे फैसले कर रही है. यहां बता दें कि कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने दो दिन पहले पुष्कर में हिंदुओं को आबादी बढ़ाने की बात कही थी. विपक्षी नेताओं के बयानों पर गौर करें तो बीजेपी ने पूरी होशियारी के साथ इस फैसले को हिंदू हित से जोड़ने का काम किया है. ऐसे में अगर पंचायत और नगरीय चुनावों में वोटों का धुर्वीकरण भी होता है तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को होना तय माना जा सकता है.

पंचायत चुनाव को लेकर पूरी तरह से तैयार है बीजेपी

राजस्थान पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव को लेकर बीजेपी पिछले साल नवंबर-दिसंबर से ही तैयारियों में जुटा है. बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने नये जिला प्रभारियों और सह प्रभारियों की नियुक्ति कर इसकी पहल शुरू कर दी थी. इन नियुक्तियों के दौरान ही मदन राठौड़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि आगामी पंचायत और निकाय चुनावों को देखते हुए नव नियुक्त पदाधिकारी ग्राउंड पर उतरकर मेहनत में जुट जाएं. उन्हें निर्देश दिया गया कि स्थानीय विधायकों और सांसदों के साथ सामंज्सय बनाकर गांव-कस्बे के लोगों से जुड़ाव बढ़ाया जाए.

मदन राठौर ने ये भी कहा था कि पार्टी ने प्रभारी बनाने में स्थानीय के बजाय बाहरी नेताओं को प्रभारी बनाया गया है ताकि दबाव की राजनीति से ऊपर उठा जा सके. इसके बाद जयपुर में नए प्रभारियों और सह प्रभारियों को बूथ लेवल पर जाकर चुनाव जीतने की प्लानिंग बताई जा चुकी है.

इसके अलावा भजनलाल सरकार मंडल स्तर तक सासंद खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करा रही है. इन खेल प्रतियोगिताओं के जरिए बीजेपी पार्टी के साथ युवा वोटरों को साथ लाने के प्रयास में जुटी है. जानकार मानते हैं कि राजस्थान की बड़ी आबादी पंचायत और नगरीय चुनाव के जरिए सरकार में अपनी भागीदारी बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन नियम में बाध्यता के चलते वे ऐसा कर नहीं पा रहे थे. अब भजनलाल सरकार उन्हें अपनी मंशा पूरी करने का मौका दे रही है.

पंचायत चुनावों के लिए तैयारियां जोरों पर

उधर, राजस्थान राज्य चुनाव आयोग ने पंचायत चुनाव के लिए अंतिम फोटोयुक्त मतदाता सूची जारी कर दी है. प्रदेश के 41 जिलों में कुल 4 करोड़ 2 लाख मतदाता दर्ज. ड्राफ्ट सूची में 3 करोड़ 96 लाख थे मतदाता. अंतिम प्रकाशन में 5 लाख 73 हजार 568 नए मतदाता जुड़े. 14 हजार 403 ग्राम पंचायतों के लिए जारी की गई वोटर लिस्ट. जयपुर जिले की 22 पंचायतों में 18.91 लाख मतदाता. एक जनवरी 2026 तक 18 साल पूरे करने वाले युवाओं को सूची में शामिल किया गया. कोर्ट के अब तक के आदेश अनुसार 15 अप्रैल तक चुनाव कराना अनिवार्य है.

Location :

Jaipur,Jaipur,Rajasthan

First Published :

February 26, 2026, 14:33 IST

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