मिडिल ईस्ट में बढ़ी अमेरिकी फौज की तैनाती, क्या हमला करने वाला है US? तारीख भी आई सामने!

1 hour ago

एक तरफ तो ये आशंका जताई जा रही है ट्रंप का निशाना सीधे खामेनेई हैं. दूसरी तरफ अमेरिका ईरान की पूरी घेराबंदी में जुटा है. ट्रंप ने एक तरफ अपने बयान में ये इशारा तो कर दिया की वो फिलहाल ईरान पर हमला नहीं करने वाले हैं. लेकिन अमेरिकी सैन्य मूवमेंट से कुछ और ही प्रतीत हो रहा है. क्योंकि अमेरिकी हथियार आसमान और समंदर के रास्ते चुपचाप ईरान के करीब पहुंच रहे हैं. ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक 12 अमेरिका F-15 फाइटर जेट्स ब्रिटेन के लेकनहेथ एयरबेस से जॉर्डन के मुवक्कुफ साल्ती एयर बेस पहुंच गए हैं.

अमेरिका के KC-135 रिफ्यूलिंग टैंकर विमान भी जॉर्डर में तैनात कर दिए गए हैं. ये टैंकर हवा में लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले बॉम्बर्स में ईंधन भरते हैं. जॉर्डन में अमेरिकी फाइटर जेट्स की तैनाती के मायने क्या हैं. आपको ये भी समझना चाहिए. 

जॉर्डन के मुवक्कुफ साल्ती एयर बेस से तेहरान की दूरी करीब 1500 किलोमीटर दूर है. जो अमेरिकी F-15 फाइटर जेट यहां तैनात है उसकी टॉप स्पीड 3000 किलोमीटर प्रति घंटा है. यानी आधे घंटे में अमेरिका तेहरान पर हवाई हमला कर सकता है. अमेरिका ने ईरान को घेरने के लिए एक और साइलेंट तैनाती कर दी है. मेरिका का  USS Abraham Lincoln कैरियर स्ट्राइक ग्रुप साउथ चाइना सी से मिडल ईस्ट की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जो एक हफ्ते में पहुंच सकता है. इस स्ट्राइक ग्रुप में F-35, F-16, F-22 फाइटर जेट्स जैसे 90 अटैक एयरक्राफ्ट हैं. इस स्ट्राइक ग्रुप में डिस्ट्रॉयर्स शिप्सऔर सबमरीन्स भी ईरान के पास पहुंच रही हैं. 

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अमेरिकी सैन्य मूवमेंट से ये लग रहा है कि इस बार ट्रंप का हमला निर्णायक होने वाला है. क्योंकि अमेरिका ने ईरान के इर्द गिर्द एक सैन्य घेरा तैयार कर लिया है. एक तरफ जॉर्डन के Muwaffaq Salti बेस पर F-15 की तैनाती. लाल सागर में भी अमेरिकी नेवी के डिस्ट्रॉयर्स तैनात हैं. जो एंटी मिसाइल सिस्टम से लैस हैं और अरब सागर में USS Abraham Lincon ने ईरान को घेर रखा है. अचानक से ईरान के आसपास ऐसी सैन्य तैनाती देख एक आम आदमी भी आसानी से समझ सकता है कि आने वाले दिनों में क्या होने वाला है, ऐसे में सोचिये इस तैनाती से तेहरान में कितनी खलबली होगी

अमेरिका का युद्धक बेड़ा जिस तरह से ईरान को घेरे खड़ा है उससे ये तय माना जा रहा है कि हमला तो होगा. लेकिन सवाल है कब. आइए हमले की तारीख के आंकलन का विश्लेषण करते हैं. फिलहाल जो एक तारीख इस वक्त पूरी दुनियाभर में चर्चा का विषय है वो जनवरी 31. इजरायली सोशल मीडिया हैंडल्स से लेकर भविष्यवाणियों पर चलने वाले ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पर ये चर्चा तेज है कि जनवरी 31 से पहले पहले ट्रंप ईरान पर हमला कर देंगे.

यानी अगले 11 दिनों में ही ईरान पर अमेरिका का हमला होने वाला है. यही दावा इजरायली सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से भी किया जा रहा है. 31 जनवरी से पहले पहले ईरान पर अमेरिका हमले का ये दावा क्यों किया जा रहा है. आपको ये भी जानना चाहिए.

दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ईरान के बढ़ते मिसाइल भंडार, रूस के हथियार आयात और चीन की एयर डिफेंस सिस्टम्स के चलते 31 जनवरी से पहले हमला कर सकता है.

- ईरान हर महीने 300 मिसाइलें बना रहा है और ये मिसाइल भंडार बढ़ता जा रहा है. 
- बीते कुछ वक्त में ईरान को रूस से शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें मिली हैं.
- रूस ने ईरान को हाल फिलहाल में S-300 एयर डिफेंस सिस्टम दिए हैं..
- दावा है कि चीन ने भी ईरान को HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम्स दिए हैं.

माना जा रहा है कि ईरान के जिस तरह से युद्ध का साजो सामान जमा किया जा रहा है. उसे देखते हुए अमेरिका जल्द से जल्द हमला कर सकता है. यही वजह है कि 31 जनवरी से पहले की तारीख तय की गई है. 

विदेशी मीडिया पर दुनियाभर के वॉर एक्सपर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ईरान में किसी बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने वाले हैं. लेकिन इसी के साथ साथ एक ऑपरेशन इजरायल में भी चल रहा है. ईरान में हमले से पहले इजरायल को सेक्योर यानी सुरक्षित किया जा रहा है. ये तय मानिये की अगर ईरान पर हमला हुआ तो ईरान जवाब में सबसे पहले इजरायल पर मिसाइलों की बरसात कर देगा.

इसी को देखते हुए अमेरिका ने इजरायल को मिसाइल इटरसेप्टर्स की नई खेप भेजी है. रिपोर्ट्स बताती हैं जनवरी के महीने में अमेरिकी THAAD डिफेंस सिस्टम की नई बैटरीज इजरायल पहुंची हैं. अमेरिका की तैयारी से हमला तय माना जा रहा है. बस सवाल ये है कि टारगेट खामेनेई होंगे, ईरान के परमाणु ठीकाने होंगे या ईरान के सैन्य ठिकाने.

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