बिहार के इस महाराज ने लगाई थी मिल, 5000 मजदूरों को मिलता था काम, अब विधानसभा में गूंज उठा मुद्दा

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Last Updated:February 27, 2026, 09:26 IST

समस्तीपुर के कल्याणपुर में स्थित रामेश्वर जूट मिल, जो कभी हजारों परिवारों की रोज़ी-रोटी का सहारा थी. आज फिर बंद है. 1 नवंबर 2025 से गेट पर ताला लटका है. होली जैसे त्योहार से पहले मजदूरों के घरों में रंग नहीं, बल्कि चिंता और अनिश्चितता पसरी है. यह सिर्फ एक मिल की कहानी नहीं, बल्कि बार-बार बंद होने की दास्तान है. जो अब बिहार विधानसभा तक पहुंच चुकी है और इस पर राजनीति शुरू हो गई है.

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कल्याणपुर में स्थित रामेश्वर जूट मिल.

समस्तीपुरः बिहार के समस्तीपुर की रामेश्वर जूट मिल की स्थापना दरभंगा महाराज ने साल 1922 में की थी. 1926 के बाद से यहां उत्पादन भी शुरू हो गया. यह जूट मिल इस इलाके के लिए वरदान साबित हुई. मिल में कभी 5000 से अधिक मजदूर काम करते थे और इसी के सहारे मजदूर का पूरा परिवार का भरण पोषण होता था. इलाके में खुशहाली बढ़ रही थी. आगे चलकर दरभंगा महाराज के द्वारा इसे एक निजी कंपनी के हाथों 100 साल की लीज पर दे दिया गया, लेकिन धीरे-धीरे मिल की स्थिति बिगड़ने लगी. समस्तीपुर की लाइफ लाइन कही जाने वाली रामेश्वर जूट मिल को बंद करना पड़ गया. कई बार शुरू होने के बाद यह बंद हो गई. लेकिन, अब मिल का मुद्दा बिहार विधानसभा के बजट सत्र में एक बार फिर उठाया गया.

यह मिल 6 जुलाई 2017 को पहली बार बंद किया गया. मिल प्रबंधन ने उत्पादन घाटे बाकाय वेतन और मजदूर विवाद को कारण बताते हुए जूट मिल को बंद कर दिया. उस वक्त 4200 मजदूर मिल में काम कर रहे थे. मिल बंद होने के कारण उनके परिवार के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई थी. जिसके बाद लगभग 3 साल बाद दिसंबर 2020 में कल्याणपुर विधानसभा के स्थानीय विधायक महेश्वर हजारी और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद मिल में उत्पादन कार्य फिर शुरू किया गया. लेकिन इस बार मजदूरों की वह संख्या यहां नहीं थी. जैसे-तैसे जूट मिल प्रबंधन के द्वारा मिल को चलाया जाता रहा और फिर नवंबर 2022 में मिल प्रबंधन के द्वारा अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया. और 1500 मजदूर जो मिल में काम कर रहे थे उनके सामने एक बार फिर परिवार और रोजगार की समस्या खड़ी हो गई.

2025 में फिर से की गई बंद
स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासन के प्रयास से मिल प्रबंधन के साथ वार्ता कर मिल को शुरू कराया गया, लेकिन 1 नवंबर 2025 को फिर समस्तीपुर का रामेश्वर जूट मिल बंद कर दिया गया. और बंदी का कारण सुरक्षा, मजदूर यूनियन और मिल प्रबंधन के बीच विवाद, जूट की कीमत में वृद्धि एवं अन्य बातों को बताया गया. मिल बंद होने के कारण यहां काम करने वाले कामगार मजदूर एक बार फिर बेरोजगार हो गए. मजदूर समस्तीपुर छोड़कर दूसरे प्रदेश चले गए, लेकिन जो यहां हैं उनके सामने परिवार चलाने और रंगों के त्योहार होली की खुशी फीकी पड़ने की चिंता सता रही. यहां काम करने वाले कामगार मजदूर अपने काम किए हुए मजदूरी की मांग कर रहे ताकि उनकी होली थी कि नहीं हो.

विधानसभा में गूंज उठा मुद्दा
समस्तीपुर रामेश्वर जूट मिल की बंदी और मजदूरों की समस्या का मामला बिहार विधानसभा में भी गूंज बिहार सरकार में पूर्व उद्योग मंत्री रहे और कल्याणपुर विधानसभा के विधायक महेश्वर हजारी ने बजट सत्र के दौरान इस मुद्दा को उठाया है. और सरकार से मजदूरों के हित में तमाम समस्याओं ध्यान में रखते हुए सरकार से जूट मिल को फिर से शुरू करवाने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की. कल्याणपुर के स्थानीय विधायक महेश्वर हजारी के द्वारा विधानसभा में उठाए गए इस सवाल का जवाब सरकार के द्वारा दिया गया और बिहार के डिप्टी सीएम और उद्योग मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विधानसभा में प्रश्नों का विस्तार से जवाब दिया. और मिल के बंद होने के कारण के साथ-साथ कई और बातें सदन को बताएं. हालांकि प्रश्न पूछने वाले विधायक महेश्वर हजारी इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखे.

क्या बोले मिल मैनेजर
समस्तीपुर के बंद पड़े रामेश्वर जूट मिल क्यों बंद किए गए और इस पूरे मामले पर मिल प्रबंधन क्या कहती है और मिल को शुरू करवाने के लिए प्रबंधन की क्या योजना है. इसे जानने के लिए हमारी टीम जूट मिल के मैनेजर शशि भूषण पाण्डे से मुलाकात की और उनका पक्ष जानने का प्रयास किया. मिल मैनेजर शशि भूषण पांडे ने बताया कि मिल को पुनः चालू करने का प्रयास किया जा रहा है और एग्रीमेंट एवं अन्य लीगल डॉक्यूमेंट्री का जो काम है उसे पूरा किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि अगले 15 से 20 दिनों में मिल के मेंटेनेंस का कार्य शुरू किया जाएगा. लेकिन उन्होंने मिल शुरू करने और सुचारू रूप से चलने के लिए कई तरह की चिंता भी प्रकट की. जिसमें सुरक्षा सबसे बड़ा मामला है उन्होंने बताया कि यहां पर सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है और इसके कारण कई घटना भी पूर्व में हो चुकी हैं. इसको लेकर के स्थानीय प्रशासन से सरकार तक को इसमें इंवॉल्व होना होगा. साथ ही उन्होंने बताया कि बिहार सरकार के यहां 50 से 52 करोड़ रुपए बकाया है और इसको लेकर के भी सरकार से पत्राचार किया है.

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Mahesh Amrawanshi

कहानी सुनने, गुनने और लिखने का शौकीन. शुद्ध कीबोर्ड पीटक. माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी भोपाल से शिक्षा-दीक्षा. द सूत्र, खबरिया न्यूज़, दैनिक नई दुनिया (अखबार) से सीखते हुए हाल मुकाम News18 है. 5 साल से पत्रकार...और पढ़ें

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Patna,Patna,Bihar

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February 27, 2026, 09:26 IST

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