Last Updated:February 27, 2026, 08:46 IST
हाल ही में साइंटिस्ट्स ने खुलासा किया है कि चांद समय के सिकुड़ रहा है. हर बीतते साल के साथ चांद की गोलाई कम हो रही है. ये धरती के लिए कितना नुकसानदायक है, आइये जानते हैं.

चंदा मामा दिन-ब-दिन छोटे होते जा रहे हैं. पढ़कर आपको हैरानी हो रही होगी लेकिन साइंस इसे सच मानती है! हाल ही में NASA और स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन के वैज्ञानिकों ने खुलासा किया कि चांद अभी भी सिकुड़ रहा है.
2010 में ही पता चला था कि चांद का इंटीरियर ठंडा हो रहा है, जिससे उसकी पूरी सतह सिकुड़ रही है. नई रिसर्च में द प्लैनेटरी साइंस जर्नल (फरवरी 2026) में प्रकाशित स्टडी से पता चला कि चांद की डार्क प्लेन्स (मारे) में 1000 से ज्यादा छोटी रिजेस (small mare ridges) मिली हैं, जो हाल की टेक्टॉनिक एक्टिविटी दिखाती है. चांद का व्यास पिछले कई सौ मिलियन सालों में करीब 50 मीटर (150 फीट) छोटा हो चुका है. यह सिकुड़न चांद के कोर के ठंडा होने से होती है– जैसे कोई गर्म गेंद ठंडी होने पर सिकुड़ जाती है. तो इसका धरती पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
कैसे छोटा हो रहा है चांद?
चांद की क्रस्ट ब्रिटल है, इसलिए सिकुड़ने पर दरारें पड़ती हैं और थ्रस्ट फॉल्ट्स बनते हैं, जहां एक हिस्सा दूसरे पर चढ़ जाता है. ये फॉल्ट्स लोबेट स्कार्प्स और स्मॉल मारे रिजेस के रूप में दिखते हैं. 2026 की स्टडी में पहली बार ग्लोबल मैप बनाकर दिखाया गया कि ये फीचर्स मारे क्षेत्रों में फैले हैं, जो पहले सिर्फ हाइलैंड्स में देखे जाते थे. इस सिकुड़न से मूनक्वेक्स (चंद्र भूकंप) आते हैं. अपोलो मिशन्स के दौरान रिकॉर्ड किए गए मूनक्वेक्स में से कई इन फॉल्ट्स से जुड़े पाए गए. कुछ मूनक्वेक्स रिक्टर स्केल पर 5.5 तक के होते हैं और 10 मिनट तक चल सकते हैं. हाल की खोज बताती है कि साउथ पोल क्षेत्र में भी ऐसे फॉल्ट्स हैं, जहां NASA का आर्टेमिस प्रोग्राम लैंडिंग प्लान कर रहा है. अगर नई फॉल्ट्स बनती हैं या पुरानी स्लिप करती हैं, तो लैंडिंग साइट्स पर लैंडस्लाइड या ग्राउंड शेकिंग हो सकती है– जो एस्ट्रोनॉट्स और बेस के लिए खतरनाक है.
धरती पर इसका क्या असर?
वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती के लिए कोई बड़ा नुकसान नहीं है. चांद की सिकुड़न की रेट बहुत धीमी है– हर साल व्यास में सिर्फ कुछ नैनोमीटर या उससे भी कम की कमी देखी जा रही है. यह इतना छोटा है कि टाइड्स, समुद्री स्तर, मौसम या ग्रेविटी पर कोई नोटिसेबल प्रभाव नहीं पड़ता है. चांद धरती से दूर भी जा रहा है (हर साल 3.8 सेमी), लेकिन सिकुड़न से उसकी मास नहीं बदलती, सिर्फ शेप थोड़ा कॉम्पैक्ट होता है. इसलिए पृथ्वी पर पूर्णिमा या अमावस्या जैसी चीजें वैसे ही रहेंगी. यह प्रक्रिया चांद की उम्र दिखाती है– 4.5 अरब साल पुराना होने के बावजूद उसका इंटीरियर अभी भी गर्म है और ठंडा हो रहा है. पहले सोचा जाता था कि चांद जियोलीजिकली डेड है, लेकिन अब साफ है कि वह एक्टिव है. 2019 की स्टडी में अपोलो डेटा से कन्फर्म हुआ कि मूनक्वेक्स आज भी हो रहे हैं.
First Published :
February 27, 2026, 08:46 IST

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