पाकिस्‍तान से आए हिन्‍दू शरणार्थी नहीं होंगे दर-बदर, आ गया सुप्रीम आदेश

4 hours ago

Last Updated:August 30, 2025, 08:29 IST

Pakistan Hindu Refugee: पाकिस्‍तान में हिन्‍दुओं पर होने वाले अत्‍याचार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वहां इनकी आबादी अपने न्‍यूनतम स्‍तर तक पहुंच गई है. जान बचाने के लिए बड़ी संख्‍या में लोग भारत आते है...और पढ़ें

पाकिस्‍तान से आए हिन्‍दू शरणार्थी नहीं होंगे दर-बदर, आ गया सुप्रीम आदेशमजनू का टीला पर रहने वाले हिन्‍दू शणार्थियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है.

नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली के मजनू का टीला इलाके में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को एक अहम आदेश में शरणार्थियों को उनके आश्रयों से हटाने पर रोक लगा दी है. साथ ही केंद्र सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उस याचिका पर आया है, जिसमें शरणार्थियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के 30 मई के आदेश को चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा था कि बाढ़ क्षेत्र में पर्यावरणीय मानकों का पालन आवश्यक है, इसलिए वहां बने अस्थायी शिविरों को हटाना होगा. हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद डीडीए ने जुलाई में शरणार्थियों को नोटिस जारी किया था, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि किसी भी समय उनके शिविरों पर बुलडोज़र चलाया जा सकता है.

शरणार्थियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन ने एकतरफा अंतरिम राहत की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगाते हुए शरणार्थियों को तत्काल राहत दी और मामले पर केंद्र व डीडीए से जवाब तलब किया. मजनू का टीला इलाके में पाकिस्तान से आए 300 से अधिक हिंदू शरणार्थी परिवार बीते कई वर्षों से टिन, टेंट और अस्थायी झोपड़ियों में रह रहे हैं. इनमें से ज्यादातर सिंध प्रांत से पलायन कर भारत आए थे. ये लोग लंबे समय से नागरिकता मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं. शरणार्थियों का कहना है कि भारत ने उन्हें शरण देकर जीवनदान दिया है, लेकिन हर समय यह डर बना रहता है कि कहीं उनका आशियाना भी छिन न जाए. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद उन्होंने राहत की सांस ली है.

दिल्‍ली हाईकोर्ट का फैसला

मई में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि यमुना बाढ़ क्षेत्र में बने अवैध ढांचे पर्यावरण और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते हैं, इसलिए इन्हें संरक्षित नहीं किया जा सकता. अदालत ने यह भी कहा था कि इस तरह के अतिक्रमण से नदी का प्राकृतिक प्रवाह और पारिस्थितिकी प्रभावित होती है. इसके बाद डीडीए ने नोटिस जारी कर शरणार्थियों को हटने का निर्देश दिया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश शरणार्थियों के लिए बड़ा सहारा साबित हुआ है. अब तक यह साफ नहीं है कि केंद्र और डीडीए सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष किस तरह पेश करेंगे. लेकिन फिलहाल, शरणार्थियों को हटाने की कार्रवाई पर रोक ने उनके भविष्य की अनिश्चितता को कुछ समय के लिए टाल दिया है.

जीने की उम्‍मीद…

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल मानवीय आधार पर ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय और प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी अहम है. सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई में यह देखा जाएगा कि अदालत शरणार्थियों की नागरिकता और स्थायी पुनर्वास को लेकर क्या रुख अपनाती है. फिलहाल, मजनू का टीला के शरणार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह उनके लिए जीने की उम्मीद लेकर आया है.

Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें

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Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

August 30, 2025, 08:21 IST

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