पहले फोन कॉल, फिर पोस्ट... राहुल गांधी का 'प्लान विजय' क्या, डीएमके को क्यों चुभा रहे ये पिन?

2 hours ago

कांग्रेस नेता राहुल गांधी का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किया गया एक पोस्ट खूब चर्चा में है. राहुल गांधी ने यह पोस्ट अभिनेता से नेता बने साउथ इंडियन फिल्मों के स्टार विजय के समर्थन में किया है. उन्होंने इस पोस्ट को पिन कर रखा है, जिसे लेकर जहां कांग्रेस के भीतर चर्चाएं तेज हो गई हैं, वहीं यह पिन पोस्ट सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) को सूई की तरह चुभ रहा है.

राहुल गांधी का यह पोस्ट ऐसे समय में सामने आया है, जब अभिनेता विजय की नई फिल्म ‘जना नायकन’ की रिलीज पर रोक लगी हुई है. राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर विजय के समर्थन में खुलकर आवाज उठाई, जबकि इस पूरे मामले पर डीएमके ने चुप्पी साध रखी है. खास बात यह रही कि राहुल गांधी का यह सपोर्ट ऐसे वक्त में सामने आया, जब वे तमिलनाडु के दौरे पर थे और सेंट थॉमस स्कूल के स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल हुए.

‘थलाइवा’ पर पोस्ट से क्या संदेश?

इस विवाद को और हवा तब मिली जब कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक पोस्ट शेयर की गई, जिसमें राहुल गांधी को ‘थलाइवा’ यानी नेता के रूप में दिखाया गया. इस पोस्ट को डीएमके के लिए एक अप्रत्यक्ष राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है. राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या कांग्रेस तमिलनाडु में डीएमके के अलावा अन्य विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार कर रही है.

फोन कॉल से बढ़ी दूरी

सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट ही नहीं, बल्कि राहुल गांधी का एक फोन कॉल भी डीएमके-कांग्रेस संबंधों में खटास की वजह बना है. दरअसल, विजय की एक रैली के दौरान मची भगदड़ में कुछ लोगों की मौत के बाद डीएमके ने विजय की कड़ी आलोचना की थी. हालांकि इसी बीच राहुल गांधी ने विजय को फोन कर इस हादसे पर संवेदना जताई. डीएमके ने इस कदम पर सवाल उठाए, जिससे दोनों दलों के बीच तनाव और गहरा गया.

कांग्रेस की ‘वॉटर टेस्टिंग’ की कोशिश

डीएमके और कांग्रेस की दरार और साफ तब दिखने लगी, जब राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले कांग्रेस के रिसर्च विभाग के प्रमुख प्रवीण चक्रवर्ती ने एक बयान में संकेत दिया कि पार्टी को विजय की TVK के साथ गठबंधन पर विचार करना चाहिए. हालांकि, तमिलनाडु कांग्रेस की सांसद जोतिमणि ने इस सुझाव को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया, लेकिन इससे यह संदेश जरूर गया कि कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे पर मंथन चल रहा है.

डीएमके से क्यों दूर होना चाहती है कांग्रेस

सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी डीएमके से दूरी बनाने की संभावनाएं टटोल रहे हैं. कांग्रेस के भीतर हमेशा से ही डीएमके को लेकर एक असहजता रही है. राजीव गांधी हत्याकांड को लेकर तत्कालीन डीएमके सरकार की कार्रवाई में देरी को लेकर कांग्रेस में नाराजगी रही है. हालांकि 2004 में कमलनाथ ने सोनिया गांधी को यह समझाया था कि भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए डीएमके के साथ जाना जरूरी है, जिसके बाद यूपीए सरकार का गठन हुआ.

समय के साथ एम. करुणानिधि सोनिया गांधी के भरोसेमंद सहयोगी बन गए. 2जी घोटाले के दौरान भी, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह डीएमके मंत्रियों को मंत्रिमंडल से हटाना चाहते थे, तब सोनिया गांधी और करुणानिधि ने उन्हें ऐसा न करने के लिए राजी किया. लेकिन अब पार्टी की कमान पूरी तरह संभाल चुके राहुल गांधी इस पुराने गठबंधन को नए सिरे से देखने के मूड में नजर आ रहे हैं.

सीट शेयरिंग और दबाव की राजनीति

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी का पिन्ड पोस्ट और विजय के समर्थन में खुलकर सामने आना डीएमके पर दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है. कांग्रेस चाहती है कि आगामी चुनावों में उसे बेहतर सीट शेयरिंग मिले. यदि डीएमके खुद को वरिष्ठ और प्रभावशाली साझेदार मानते हुए कांग्रेस को सीमित सीटें देने पर अड़ी रहती है, तो कांग्रेस अन्य विकल्पों की ओर रुख कर सकती है.

तमिलनाडु कांग्रेस के कुछ नेताओं ने राहुल गांधी को बताया है कि विजय महिलाओं और युवाओं में बेहद लोकप्रिय हैं और उनका साथ कांग्रेस के लिए फायदेमंद हो सकता है. हालांकि, पार्टी के भीतर इस बात को लेकर भी चिंता है कि चुनाव बाद विजय कहीं AIADMK और भाजपा के साथ न चले जाएं. सीबीआई जांच का दबाव भी विजय को कांग्रेस से दूरी बनाए रखने के लिए मजबूर कर सकता है.

कांग्रेस के लिए बड़ा दांव

कांग्रेस खेमे में यह आशंका भी जताई जा रही है कि राहुल गांधी डीएमके के साथ पुराने और लाभकारी गठबंधन को दांव पर लगा रहे हैं, जिसने विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को लगातार फायदा पहुंचाया है. अगर राहुल गांधी के प्रयासों के बावजूद विजय भाजपा के पाले में चले जाते हैं, तो यह कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है.

फिलहाल, तमिलनाडु कांग्रेस में राहुल गांधी और उनके समर्थक विजय के साथ संभावित गठबंधन को लेकर उत्साहित हैं, लेकिन एक फोन कॉल से शुरू हुई कहानी और एक पिन्ड पोस्ट तक पहुंचा यह सियासी घटनाक्रम डीएमके को नाराज कर चुका है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह खटास सिर्फ दबाव की राजनीति है या तमिलनाडु की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की भूमिका बन रही है.

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