महाराष्ट्र के शहरी राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे नगर निकाय चुनावों में इस बार नतीजों ने नया इतिहास रच दिया है. देश की सबसे अमीर और प्रतिष्ठित नगरपालिका बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) गठबंधन ने निर्णायक बढ़त बनाते हुए सत्ता पर कब्जा कर लिया है. मुंबई के साथ-साथ पूरे राज्य में महायुति की यह जीत विपक्ष के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि 29 में से 23 महानगरपालिकाओं में बीजेपी और उसके सहयोगी बहुमत की स्थिति में पहुंच गए हैं.
इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में फिलहाल विकास बनाम पहचान की लड़ाई में विकास का एजेंडा भारी पड़ा है. जहां ठाकरे बंधुओं ने मराठी अस्मिता और स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ा, वहीं बीजेपी और शिंदे शिवसेना ने मेट्रो, कोस्टल रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर और डबल इंजन सरकार के मॉडल को जनता के सामने रखा. नतीजों ने यह भी संकेत दिया है कि विधानसभा चुनावों के बाद अब निकाय स्तर पर भी महायुति ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली है.
आइए इन चुनाव नतीजों की 10 खास बातों पर नजर डालते हैं…
1. BMC में महायुति की ऐतिहासिक जीत
227 सदस्यीय बीएमसी में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने 128 सीटें जीतकर बहुमत के बेहद करीब पहुंचते हुए सत्ता सुनिश्चित कर ली है. बीजेपी अकेले 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं.
2. ठाकरे बंधुओं की रणनीति रही नाकाम
मराठी मानुष और भाषा के मुद्दे पर साथ आए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की जोड़ी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली. शिवसेना (UBT) को 65 सींटें मिलीं, जबकि एमएनएस सिर्फ 6 सीटों पर सिमट गई. कुल मिलाकर यह गठबंधन महायुति को चुनौती देने में असफल रहा.
3. राज्य की 29 में से 23 महानगरपालिकाओं में महायुति आगे
मुंबई के अलावा पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, नागपुर, नवी मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, जलगांव, सांगली, जालना और धुले जैसे बड़े शहरों में बीजेपी या महायुति ने बहुमत हासिल किया है. यह शहरी राजनीति में बीजेपी का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है.
4. पुणे और पिंपरी में पवार फैक्टर भी नहीं चला
शरद पवार और अजित पवार के गुटों के एकजुट होने के बावजूद पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में बीजेपी ने जबरदस्त जीत दर्ज की. पुणे में बीजेपी को 96 सीटें मिलीं, जबकि एनसीपी दोनों गुट मिलकर भी बीजेपी को टक्कर नहीं दे सके.
5. नागपुर में फडणवीस की साख मजबूत
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गृह जिले नागपुर में बीजेपी ने 151 में से 102 सीटें जीतकर कांग्रेस को करारी शिकस्त दी. यह जीत फडणवीस के नेतृत्व को और मजबूत करती है.
6. विकास एजेंडा बना सबसे बड़ा फैक्टर
बीजेपी नेताओं का दावा है कि मेट्रो प्रोजेक्ट, कोस्टल रोड, सड़कें, जल आपूर्ति और शहरी बुनियादी ढांचे के कामों ने मतदाताओं को प्रभावित किया. प्रधानमंत्री मोदी और डबल इंजन सरकार का नैरेटिव शहरी वोटरों में असरदार साबित हुआ.
7. कांग्रेस का भी प्रदर्शन खराब
कांग्रेस केवल कुछ ही शहरों में असर दिखा सकी. लातूर में पार्टी ने जीत दर्ज की, जबकि कोल्हापुर में उसे कड़ी टक्कर मिली. मुंबई में कांग्रेस 24 सीटों पर सिमट गई, जो पार्टी के लिए चिंता का विषय है.
8. AIMIM और छोटे दलों की मौजूदगी
असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने 29 महानगरपालिकाओं में कुल 95 सीटें जीतीं, जिनमें BMC की 8 सीटें शामिल हैं. हालांकि सत्ता की राजनीति में उनकी भूमिका सीमित रही.
9. पीएम मोदी और अमित शाह का सीधा संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने जीत को सुशासन और विकास नीतियों पर जनता की मुहर बताया. दोनों नेताओं ने महाराष्ट्र की जनता का आभार जताते हुए इसे एनडीए के लिए बड़े जनादेश के रूप में पेश किया.
10. अगला मेयर महायुति से तय
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ कर दिया है कि बीएमसी सहित अधिकांश नगर निगमों में मेयर महायुति का ही होगा. हालांकि मुंबई का मेयर बीजेपी का होगा या शिवसेना का, इस पर फैसला आगे किया जाएगा.
कुल मिलाकर इन निकाय चुनावों ने यह संकेत दे दिया है कि महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में बीजेपी और उसकी सहयोगी शिवसेना फिलहाल सबसे मजबूत ताकत बनकर उभरी है. विपक्ष के लिए यह नतीजे आत्ममंथन का संदेश हैं, जबकि महायुति के लिए यह 2029 की बड़ी सियासी लड़ाइयों की मजबूत जमीन तैयार करते नजर आ रहे हैं.

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