नई दिल्ली: ईरान में पिछले कई दिनों से हिंसा और अशांति का माहौल है. प्रदर्शन शुरू हुए महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ लेकिन धीरे-धीरे ये हिंसक हो गए. तेहरान की सड़कों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें आम हो गईं. इंटरनेट बंद कर दिया गया. हजारों लोग घरों में कैद हो गए. मोबाइल नेटवर्क भी ठप. ऐसे में भारतीय नागरिकों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया. कई छात्र, जियारत करने वाले और काम करने वाले फंसे रहे. हालात कितने गंभीर हैं इसकी असली तस्वीर अब सामने आ रही है. तेहरान से दिल्ली पहुंची पहली फ्लाइट ने सिर्फ यात्रियों को नहीं, बल्कि डर, बेचैनी और अनिश्चितता की कहानियां भी साथ लाई हैं. News18 से भारत लौटे लोगों ने बताया कि ईरान में जिंदगी कैसे थम सी गई थी.
देर रात महान एयर का विमान दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा. इस फ्लाइट में धार्मिक जियारत पर गए लोग थे, छात्र थे और नौकरी करने वाले भारतीय थे. सबके चेहरे पर राहत साफ दिखी. न्यूज18 से बातचीत में उन्होंने बताया कि पिछले एक हफ्ते से ज्यादा वक्त तक उनका बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं था. इंटरनेट पूरी तरह बंद था. परिवार परेशान था. खुद वे डर में जी रहे थे. तेहरान और आसपास के इलाकों में हिंसा ने हालात बिगाड़ दिए थे. इन यात्रियों की बातें ही ईरान की जमीनी हकीकत बयान करती हैं.
#WATCH | Delhi | An Indian national who returned from Iran says, “I am pursuing an MBBS at Shiraz University of Medical Sciences, Iran. The situation there is normal. There are no internet services. We heard about protests in Iran but never saw anything like that…” pic.twitter.com/lIbcEBTidp
इंटरनेट बंद, दुनिया से कटा ईरान
भारत लौटे यात्रियों ने बताया कि इंटरनेट बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी हुई. कोई वीडियो कॉल नहीं. कोई मैसेज नहीं. परिवार को यह तक नहीं पता था कि वे सुरक्षित हैं या नहीं. मोबाइल नेटवर्क भी कई इलाकों में काम नहीं कर रहा था. सोशल मीडिया पूरी तरह ठप था. ऐसे में अफवाहें फैलती रहीं. डर और बढ़ता गया. लोग घरों और होटलों में कैद होकर रह गए.
तेहरान की सड़कों पर डर का साया
लौटे भारतीयों के मुताबिक तेहरान की सड़कों पर तनाव साफ दिखता था. कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हो रही थीं. गोली चलने की आवाजें सुनाई देती थीं. आगजनी की घटनाएं सामने आईं, बाजार भी बंद थे. दुकानें नहीं खुल रहीं थीं. लोग बाहर निकलने से डर रहे थे. कुछ यात्रियों ने बताया कि वे कई दिनों तक होटल के कमरों से बाहर नहीं निकले.
ईरान में अभी भी हजारों भारतीय मौजूद हैं. (फोटो ANI)
फ्लाइट में कौन-कौन लौटे भारत
इस पहली फ्लाइट में ज्यादातर यात्री धार्मिक जियारत पर गए थे. कुछ छात्र थे, जिनकी पढ़ाई बीच में रुक गई. कुछ लोग काम के सिलसिले में ईरान गए थे. सभी की कहानी लगभग एक जैसी थी. डर, अनिश्चितता और घर लौटने की बेचैनी. फ्लाइट में बैठते ही लोगों ने राहत की सांस ली. दिल्ली पहुंचते ही भावनाएं उमड़ पड़ीं.
भारतीय दूतावास की भूमिका
हालात बिगड़ते देख 14 जनवरी को तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी जारी की. सभी भारतीय नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी गई. दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए. लोगों से सुरक्षित जगहों पर रहने को कहा गया. इसके बाद महान एयर की पहली फ्लाइट की व्यवस्था की गई. भारत सरकार और विदेश मंत्रालय ने इसे प्राथमिकता पर लिया.
दिल्ली एयरपोर्ट पर भावुक दृश्य
दिल्ली एयरपोर्ट पर लौटे यात्रियों के परिवार पहले से मौजूद थे. जैसे ही अपने लोग दिखे, आंसू छलक पड़े. एक दूसरे के गले मिले और राहत की सांस ली. कई लोगों ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसी हालत में देश लौटना पड़ेगा. छात्रों ने कहा कि अब वे पढ़ाई फिर से शुरू करेंगे. जियारत करने वालों ने कहा कि अगली यात्रा से पहले हालात जरूर देखेंगे.
ईरान में अब भी फंसे भारतीय
ईरान में अभी भी हजारों भारतीय मौजूद हैं. ज्यादातर छात्र हैं और कुछ कामकाजी लोग हैं. हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है. और भी फ्लाइट्स की योजना बनाई जा रही है. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि है.
ईरान में हिंसा का माहौल कैसे बना?
ईरान में बीते कई दिनों से अशांति फैली हुई है. शुरुआत महंगाई, बेरोजगारी और फ्यूल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ विरोध से हुई. लोग सड़कों पर उतरे. सरकार ने सख्ती दिखाई. पुलिस और सुरक्षाबलों की कार्रवाई तेज हुई. धीरे-धीरे प्रदर्शन हिंसक हो गए. कई शहरों में झड़पें शुरू हो गईं. राजधानी तेहरान सबसे ज्यादा प्रभावित रहा. हालात बेकाबू होते देख सरकार ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं.
आगे क्या होंगे हालात
ईरान में हालात कब सुधरेंगे, कहना मुश्किल है. प्रदर्शन अभी भी जारी हैं. सरकार सख्त कदम उठा रही है. इंटरनेट पर पाबंदियां बनी हुई हैं. ऐसे में लौटे भारतीयों की कहानियां चेतावनी भी हैं. और राहत की मिसाल भी. यह दिखाता है कि संकट के समय सुरक्षित वापसी कितनी अहम होती है.

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