Last Updated:January 08, 2026, 18:25 IST
दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण हार्ट अटैक और कोरोनरी आर्टरी डिजीज के मामलों में इजाफा कर रहा है, जबकि शिमला में ऐसा संबंध नहीं मिला. हाल ही में प्रकाशित स्टडी बताती है कि दिल्ली में एक्यूआई PM10 और PM2.5 का स्तर 10 यूनिट बढ़ा तो अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या क्रमशः 1.8 फीसदी, 1.2 फीसदी और 2 फीसदी तक बढ़ गई. जबकि प्रदूषण होने के बावजूद शिमला में ऐसा नहीं दिखा.
स्टडी बताती है कि दिल्ली में प्रदूषण की वजह से हार्ट अटैक के मामले शिमला के मुकाबले ज्यादा हैं. Delhi Pollution and Heart Disease: दिल्ली का प्रदूषण किसी भी शहर की जलवायु या परिस्थिति से खतरनाक साबित हो रहा है. अभी तक प्रदूषण को सांसों के रोग के लिए जिम्मेदार मान रहे लोगों को समझना होगा कि खराब हवा दिल की बीमारियों को पैदा करने में भी अहम भूमिका निभा रही है, और यह बात हालिया प्रकाशित स्टडी में साबित हो गई है. जिसमें दिल्ली और शिमला में दिल से जुड़ी आपातकालीन बीमारियों के मामलों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है.
साल 2021 में शुरु किए गए लेकिन हाल ही में एक पत्रिका डिस्कवर पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित पायलटिंग सर्विलांस ऑफ इरवायरनमेंटल रिस्क एंड कार्डियोवैस्कुलर इवेंट्स इन दिल्ली एंड शिमला इंडिया 2021 नाम के एक अध्ययन में बताया गया है कि दिल्ली में जैसे-जैसे हवा की गुणवत्ता खराब होती है और एक्यूआई का स्तर बढ़ता है, वैसे-वैसे यहां हार्ट अटैक और कोरोनरी आर्टरी डिजीज के मामले बढ़ जाते हैं.
स्टडी कहती है कि जैसे ही दिल्ली में एक्यूआई PM10 और PM2.5 का स्तर 10 यूनिट बढ़ा तो अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या क्रमशः 1.8 फीसदी, 1.2 फीसदी और 2 फीसदी तक बढ़ गए. इसी स्टडी में ठंडे पहाड़ी शहर शिमला के आंकड़ों का भी विश्लेषण किया गया लेकिन वहां प्रदूषण की वजह से दिल की बीमारियां बढ़ने के बीच कोई संबंध नहीं मिला.
टीओआई में छपी खबर के मुताबिक यह रिसर्च एनसीडीसी से पूर्वी पटेल, आकाश श्रीवास्तव, तंजीन दिकिद और आईएमडी से एससी भान, सेफ्टीनैट से निवेदिथा एन कृष्णन ने किया.
कैसे किया गया अध्ययन?
जनवरी से जुलाई 2021 के बीच शोधकर्ताओं ने दिल्ली और शिमला के अस्पतालों में दिल की बीमारियों से जुड़े भर्ती और मौतों के आंकड़े इकठ्ठे किए साथ ही हवा की गुणवत्ता और मौसम के रोजाना डेटा का विश्लेषण किया. इस दौरान कुल 41,000 से ज्यादा अस्पताल में भर्ती मामलों की जांच की गई.जिसमें पाया गया कि दिल्ली में 11,000 से ज्यादा दिल से जुड़े मामले सामने आए जबकि शिमला में लगभग 3,900 मामले दर्ज हुए.
क्या कहती है रिसर्च
इतना ही नहीं रिसर्च बताती है कि दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के एक दिन के भीतर दिल से जुड़ी इमरजेंसी मामलों में साफ बढ़ोतरी देखी गई. एक्यूआई में हर 10 पॉइंट की बढ़ोतरी पर दिल की घटनाएं 1.8 फीसदी बढ़ीं. वहीं PM10 से 1.2 फीसदी और PM2.5 से 2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. तापमान, नमी और मौसम को ध्यान में रखने के बाद भी ये नतीजे सही पाए गए.वहीं शिमला में, कुछ महीनों में प्रदूषण ज्यादा होने के बावजूद, दिल की बीमारियों से कोई पुख्ता संबंध साबित नहीं हुआ.
दिल्ली और शिमला के मरीजों में क्या दिखा फर्क
अध्ययन बताता है कि दोनों शहरों के मरीजों की जीवनशैली अलग थी. दिल्ली के मरीज जहां कम शारीरिक गतिविधि, ज्यादा नमक और फैट वाला खाना, हाई ब्लड प्रेशर, मानसिक तनाव, शराब का सेवन आदि से ग्रस्त मिले. वहीं शिमला के मरीजों पाया गया कि बीड़ी या सिगरेट पीना, खाना बनाने के लिए लकड़ी, कोयला या केरोसिन जैसे ईंधन का इस्तेमाल बहुतायत में पाया गया. शिमला के 98 फीसदी तंबाकू इस्तेमाल करने वाले लोग बीड़ी या सिगरेट पीते थे. शिमला के लगभग 67 फीसदी लोग ठोस ईंधन या केरोसिन से खाना बनाते थे. जबकि दिल्ली के 98 फीसदी लोग गैस या इलेक्ट्रिक चूल्हा इस्तेमाल करते थे.
विशेषज्ञों ने बताया कि स्टडी का मकसद भारत की मौजूदा नेशनल आउटडोर एयर एंड डिजीज सर्विलांस (NOADS) प्रणाली में दिल की बीमारियों को भी शामिल करना था, क्योंकि फिलहाल यह सिस्टम ज्यादातर सांस की बीमारियों पर ही ध्यान देता है. जबकि प्रदूषण से दिल पर भी गहरा असर पड़ता है.
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प्रिया गौतमSenior Correspondent
अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्...और पढ़ें
Location :
Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradesh
First Published :
January 08, 2026, 18:25 IST

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