Funding Bill: अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने एक फंडिंग बिल पास किया है, जिसके जरिए चीन से जुड़े मामलों में सख्ती बढ़ाई गई है. इस कानून का मकसद निर्यात पर कड़ा नियंत्रण, व्यापार नियमों का कड़ाई से पालन, सरकारी स्तर पर तकनीक की खरीद पर रोक और चीन के साथ सहयोग को सीमित करना है. इस विधेयक के तहत निर्यात नियंत्रण नियमों को लागू करने के लिए अधिक धन दिया गया है. चीन से जुड़े व्यापार मामलों को आगे बढ़ाने के लिए अलग से पैसा रखा गया है. साथ ही, बिना सुरक्षा जांच के कुछ सरकारी सूचना प्रौद्योगिकी उपकरणों की खरीद पर रोक लगाई गई है. विज्ञान और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में अमेरिका और चीन के बीच सहयोग को भी सीमित किया गया है. इस कानून में यह भी तय किया गया है कि चीन की आधिकारिक यात्रा करने वाले सरकारी अधिकारियों की जानकारी अब नियमित रूप से कांग्रेस को देनी होगी. इसके अलावा, ऊर्जा और परमाणु सुरक्षा से जुड़े कुछ नए नियम भी शामिल किए गए हैं.
सप्लाई चेन और साइबर सुरक्षा के लिए अमेरिका ने उठाया ये कदम
यह बिल ब्यूरो ऑफ इंडस्ट्री एंड सिक्योरिटी के लिए 44 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी देता है, जिससे इसकी कुल फंडिंग 235 मिलियन डॉलर हो जाती है. अमेरिका और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा पर नजर रखने वाली प्रतिनिधि सभा की समिति का कहना है कि यह अतिरिक्त धन संवेदनशील अमेरिकी तकनीक को चीन तक पहुंचने से रोकने में मदद करेगा. यह चीन से संबंधित एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी एनफोर्समेंट के लिए 16.4 मिलियन डॉलर भी आवंटित करता है. समर्थकों का कहना है कि यह फंडिंग अमेरिकी वर्कर्स और मैन्युफैक्चरर्स को गलत ट्रेड तरीकों से बचाने के लिए है. यह कानून सरकारी एजेंसियों पर तकनीक खरीदने के मामले में भी पाबंदी लगाता है. वाणिज्य विभाग, न्याय विभाग, नासा और राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन जैसी संस्थाएं तब तक नई सूचना प्रौद्योगिकी प्रणालियां नहीं खरीद पाएंगी, जब तक सप्लाई चेन और साइबर सुरक्षा से जुड़े खतरे की पूरी जांच न हो जाए. इन जांचों में खास तौर पर चीन जैसे विदेशी विरोधियों की भूमिका देखी जाएगी.
अमेरिका और चीन के बीच सहयोग पर रोक भी इस विधेयक का अहम हिस्सा है. इसके तहत नासा और ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी को चीन या चीनी स्वामित्व वाली कंपनियों के साथ द्विपक्षीय सहयोग या समझौतों में शामिल होने से रोका जाता है. इसके लिए पहले कांग्रेस की साफ अनुमति लेनी होगी. सरकारी यात्राओं पर निगरानी भी बढ़ाई गई है. वाणिज्य विभाग, नासा और राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन को हर तीन महीने में कांग्रेस को यह बताना होगा कि उनके कर्मचारी चीन क्यों गए और यात्रा का उद्देश्य क्या था. ऊर्जा और परमाणु सुरक्षा से जुड़े नियम भी इसमें शामिल हैं.
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से कच्चा तेल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को बेचने पर रोक लगाई गई है. यह कानून चीन और रूस के नागरिकों को अमेरिकी परमाणु हथियार उत्पादन केंद्रों तक पहुंचने से भी रोकता है और ऊर्जा विभाग को किसी भी विदेशी संस्था को वित्तीय सहायता प्रदान करने से रोकता है. यह पूरा खर्च पैकेज वाणिज्य, न्याय और आंतरिक मामलों के विभागों पर लागू होगा. इसके अलावा नासा, आर्मी कोर ऑफ इंजीनियर्स और पर्यावरण संरक्षण एजेंसी जैसी संस्थाओं को भी इससे धन मिलेगा. चीन से जुड़े इन प्रावधानों का समर्थन प्रतिनिधि सभा की सेलेक्ट कमेटी के चेयरमैन जॉन मूलनार ने किया है.
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जॉन मूलनार ने कहा कि चीन ने दशकों तक अपनी सत्तावादी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका की खुली नीतियों का फायदा उठाया है यह कानून एक्सपोर्ट कंट्रोल को लागू करने और चीनी व्यापार में होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगाने और अमेरिकी करदाताओं के पैसे, तकनीक और ऊर्जा संसाधनों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है. अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा पर बनी यह कमेटी चीन से पैदा हो रही आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा चुनौतियों का अध्ययन करती है. इसका मुख्य ध्यान सरकारी योजनाओं में सख्ती लाने और चीन पर निर्भरता कम करने पर रहा है.

16 hours ago
