EPF से 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड संभव, जानिए पूरा गणित आसान भाषा में

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Last Updated:February 27, 2026, 22:53 IST

क्या सिर्फ सैलरी से 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का रिटायरमेंट फंड बन सकता है? EPF के जरिए यह लक्ष्य संभव हो सकता है. नियमित योगदान और लंबी अवधि की कंपाउंडिंग इसमें बड़ी भूमिका निभाती है. आइए आसान गणित से समझते हैं पूरा हिसाब.

EPF से 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड संभव, जानिए पूरा गणित आसान भाषा मेंZoom

₹50,000 सैलरी पर EPFO कैसे बना सकता है 2.5 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड. (Image:AI)

नई दिल्ली. कई लोग मानते हैं कि सिर्फ शेयर बाजार या बिजनेस से ही करोड़ों की पूंजी बनाई जा सकती है. लेकिन सैलरीड कर्मचारियों के लिए ईपीएफओ (Employees Provident Fund Organisation-EPFO) चुपचाप बड़ा फंड तैयार करता रहता है. अगर कोई कर्मचारी 25 साल की उम्र में नौकरी शुरू करे और 60 साल तक लगातार योगदान दे, तो EPF के जरिए 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि बन सकती है. आइए आसान गणित से समझते हैं कैसे.

हर महीने कितना जाता है EPF में?
मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है. नियम के मुताबिक कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 12 फीसदी EPF में जमा करता है. यानी हर महीने 6,000 रुपये सीधे उसके EPF खाते में जाते हैं. नियोक्ता भी 12 फीसदी योगदान देता है, लेकिन उसमें से 3.67 फीसदी यानी करीब 4,750 रुपये EPF में आते हैं, जबकि 8.33 फीसदी हिस्सा पेंशन योजना में चला जाता है. इस तरह कुल मिलाकर हर महीने 10,750 रुपये EPF खाते में जमा होते हैं.

35 साल में कैसे बनता है 2.5 करोड़?
अगर यह योगदान 35 साल तक जारी रहे और EPF पर 8.25 फीसदी सालाना ब्याज मिलता रहे, तो कुल जमा रकम लगभग 45.15 लाख रुपये होगी. लेकिन कंपाउंडिंग की ताकत से रिटायरमेंट के समय यह रकम करीब 2.54 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. खास बात यह है कि यहां सैलरी को 35 साल तक समान माना गया है, जबकि हकीकत में हर साल वेतन बढ़ता है. ऐसे में वास्तविक रिटायरमेंट फंड इससे भी ज्यादा हो सकता है.

टैक्स फायदा और पेंशन का सहारा
पुरानी टैक्स व्यवस्था में EPF योगदान पर आयकर में छूट भी मिलती है, जिससे वास्तविक रिटर्न और बेहतर हो जाता है. साथ ही नियोक्ता का जो हिस्सा पेंशन योजना में जाता है, वह रिटायरमेंट के बाद मासिक पेंशन के रूप में मदद करता है. यानी EPF सिर्फ एक बचत योजना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा कवच है. यह उदाहरण दिखाता है कि नियमित योगदान और लंबे समय का संयम साधारण सैलरी को भी करोड़ों की पूंजी में बदल सकता है. सही उम्र में शुरुआत और निरंतर निवेश ही असली चाबी है.

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Rakesh Singh

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in ...और पढ़ें

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New Delhi,Delhi

First Published :

February 27, 2026, 22:53 IST

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