Last Updated:July 29, 2025, 13:49 IST
Ocimum tenuiflorum herb Tulsi plant uses: आमतौर पर सर्दी-खांसी में काढ़े में इस्तेमाल की जाने वाली तुलसी के पौधे की पत्तियां हार्ट के लिए रामबाण औषधि हैं. आयुष मंत्रालय की मानें तो तुलसी के पौधे में कार्डियक...और पढ़ें

हाइलाइट्स
तुलसी हार्ट और फेफड़ों के लिए टॉनिक है.तुलसी के पत्ते संक्रमणों को दूर करने में मदद करते हैं.आयुष मंत्रालय तुलसी पर वैज्ञानिक रिसर्च कर रहा है.Benefits for Holy basil for Heart: एक समय था जब घर में लगे पेड़ -पौधों से ही बड़े-बुजुर्ग तमाम छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज कर देते थे . भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद भी इसी तरह उपचार करता है. लेकिन आजकल हर छोटी-छोटी परेशानी में डॉक्टर के पास भागने वाले लोगों को पता ही नहीं है कि उनके घर में लगा एक छोटा सा पौधा कितनी बड़ी जड़ी-बूटी है और कितनी गंभीर बीमारियों को आने से रोक सकता है. हालांकि अब आयुष मंत्रालय ऐसे 4 औषधीय पौधों के लिए सेफ्टी डोजियर बना रहा है ताकि लोगों को वैज्ञानिक सबूतों के साथ इनके बारे में पता चल सके और वे इसका इस्तेमाल करके रोगों को दूर रख सकें.
बता दें कि इन 4 पौधों में से एक पौधा ऐसा भी है जो आमतौर पर हर भारतीय घर में मिल जाता है. कुछ लोग इसका इस्तेमाल सर्दी-खांसी होने पर काढ़ा बनाने में भी करते हैं लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि यह हार्ट के लिए रामबाण है. हार्ट की मसल्स को मजबूत करने के अलावा यह उन्हें सिकुड़ने से रोकता है और शरीर के हर टिश्यू तक ब्लड फ्लो बढ़ाने में कारगर है . इतना ही नहीं इस पौधे की पत्तियां फेफड़ों में संक्रमण को रोकने का भी काम करती हैं. यह औषधीय पौधा तुलसी का पौधा (ओसीमम सैंक्टम) है.
हार्ट और फेफड़ों के लिए टॉनिक
आयुष मंत्रालय के अनुसार तुलसी के पौधे की पत्तियां हृदय रोगों को दूर रखती हैं. यह हार्ट के लिए टॉनिक का काम करता है. अगर आप तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल रोजमर्रा के जीवर में करते हैं तो इसके औषधीय गुण शरीर को मिलते हैं . इतना ही नहीं तुलसी के पत्ते या इनका अर्क आयुर्वेद में ज्वर यानि बुखार, सर्दी और खांसी के अलावा अस्थमा और कई प्रकार के संक्रमणों में प्रभावकारी है. यह फेफड़ों को मजबूत बनाने के साथ ही इन्फेक्शन से बचाता है.
इस तरह कर सकते हैं इस्तेमाल
तुलसी की पत्तियों के अलावा इसकी लकड़ी और मंजरी को भी इस्तेमाल किया जाता है. आयुर्वेद में इसे विशेष जड़ी-बूटी माना गया है. हालांकि आयुर्वेदिक दवाओं के अलावा इसका इस्तेमाल घर पर भी आसानी से किया जा सकता है और स्वस्थ रहा जा सकता है.
काढ़ा बनाकर
लोग तलसी के पत्तों को पानी में डालकर उबालकर काढ़ा बनाकर भी पी सकते हैं. काढ़े में तुलसी के पत्तों के साथ गुड़, कालीमिर्च, दालचीनी, अदरक, पीपल, इलायची आदि हर्ब्स को भी डाला जा सकता है. यह इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ ही कई प्रकार के इन्फेक्शन से बचाता है.
चाय में डालकर
बहुत सारे लोग तुलसी के पत्तों को चाय में डालकर भी रोजाना पीते हैं.यह भी बंद नाक, जुकाम, सर्दी, खांसी, मौसमी संक्रमणों में काफी कारगर है.
अर्क निकालकर
तुलसी के पत्तों को कूटकर उनका अर्क निकालकर भी पिया जा सकता है. यह इम्यूनिटी बूस्टर है. वहीं सर्दी, खांसी या बुखार में अर्क के साथ शहद मिलाकर ले सकते हैं.
अब दुनिया उठाएगी लाभ
तुलसी के पौधे को भारत में पहले से ही औषधीय पौधा माना जाता है और इसका आयुर्वेदिक उपचार में अहम स्थान भी है लेकिन अभी तक वैज्ञानिक साक्ष्यों का अभाव था.जिससे विश्व में इसे साबित कर पाने में कई मुश्किलें थीं. हालांकि अब भारत सरकार का आयुष मंत्रालय तुलसी के पौधे पर वैज्ञानिक रूप से रिसर्च को बढ़ाने के साथ ही इसका सेफ्टी डोजियर यानि पूर्ण दस्तावेजीकरण कर रहा है . जिससे दुनिया के सामने इसके औषधीय गुणों की पुष्टि हो सकेगी और इसका लाभ पूरी दुनिया के मरीजों को मिल सकेगा.
तुलसी के अलावा ये 3 और हैं जड़ी बूटियां
पारंपरिक चिकित्सा के वैज्ञानिक साक्ष्य आधार को मजबूत करने के लिए आयुष मंत्रालय, भारत सरकार चार महत्वपूर्ण आयुष जड़ी-बूटियों के लिए सुरक्षा दस्तावेज तैयार कर रहा है. तुलसी के अलावा ये 3 जड़ी बूटियां हैं गोक्षुरा (ट्रिबुलस टेरेस्ट्रिस), हरिद्रा (करकुमा लोंगा), और चंद्राशुरा (लेपिडियम सैटाइवम).
प्रिया गौतमSenior Correspondent
अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ और रियल एस...और पढ़ें
अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ और रियल एस...
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