DNA on Why F-35s breaking down repeatedly: इजरायल ने आतंकवाद की पूरी सरकार यानी हूती विद्रोहियों की सरकार को साफ कर अपनी खुफिया और डिफेंस ताकत का लोहा फिर मनवाया है. लेकिन दुनिया का सरपंच बनने का दावा करने वाले ट्रंप की आसमानी ताकत के चीथड़े-चीथड़े हो गए हैं. अलास्का जहां ट्रंप और पुतिन की मुलाकात हुई थी. वही अलास्का जहां पुतिन से डील कर ट्रंप दुनिया का सरपंच बनने का सपना देख रहे थे. उसी अलास्का में अमेरिका का फाइटर जेट एफ-35 क्रैश हो गया.
चंद सेकंड में ढेर हो गया अमेरिका का हवाई बाहुबली
इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें दिखता है कि कैसे एक एयरक्राफ्ट आसमान से गुलाटी खाते हुए जमीन पर गिरता है.धमाका होता है और फिर एयरक्राफ्ट आग का गोला बन जाता है. ये फाइटर जेट F-35 ही है, जिसे अमेरिका दुनिया का सबसे घातक फाइटर जेट बताता है. लेकिन अमेरिका का ये हवाई बाहुबली चंद सेकेंड में धमाके के बाद तबाह हो गया.
अलास्का में कैसे गिरा F-35 फाइटर जेट?
ये हादसा अमेरिका की आसमानी ताकत पर एक बड़ा सवाल है इसे भी आज हम आपको समझाते हैं. F-35 आसमान में ही टेक्निकल फॉल्ट का शिकार हो गया. फाइटर जेट के आगे और मेन लैंडिंग गियर की हाइड्रोलिक लाइनों में बर्फ जमने के कारण ठीक से लैंडिंग करना मुश्किल हो गया था. इसके बाद पायलट ने पांच इंजीनियरों के साथ कॉन्फ्रेंस कॉल की. करीब 50 मिनट तक हवा में ही F-35 को ठीक करने की कोशिश होती रही. लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. पायलट ने दो बार लैंडिंग की कोशिश की. इस दौरान लैंडिंग गियर और बुरी तरह से फंस गए. इसके बाद F-35 के सेंसर्स ने गलत सिग्नल दिए कि एयरक्राफ्ट जमीन पर उतर चुका है. फिर विमान पूरी तरह कंट्रोल से बाहर हो गया.
प्लेन गिरने से स्वाह हो गए 800 करोड़ रुपये
इस हादसे को अमेरिका की आसमानी ताकत पर बड़ा सवाल क्यों बताया जा रहा है, इसे भी समझिए. F-35 अमेरिका का सबसे घातक स्टेल्थ मल्टीरोल फाइटर जेट है. ये राडार की पकड़ में नहीं आता है. अमेरिका के एक F-35 फाइटर प्लेन की औसत कीमत करीब 800 करोड़ रुपए है. इसकी टॉप स्पीड 1930 किलोमीटर प्रति घंटा है.
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— Zee News (@ZeeNews) August 29, 2025
इसमें एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरै रडार है जो एक साथ सैकड़ों टारगेट को ट्रैक और टारगेट कर सकता है. इसका DAS सेंसर्स पायलट को 360 डिग्री का व्यू देते हैं. F-35 का इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल टारगेटिंग सिस्टम दिन-रात दोनों तरह के ऑपरेशन के लिए डिजाइन किया गया है.
परमाणु बमों और मिसाइलों को ले जाने में सक्षम
2200 किलोमीटर की ऑपरेशनल रेंज के साथ ही F-35 परमाणु बम और मिसाइलों को ले जाने में सक्षम है. 2006 में पहली बार उड़ान भरने वाले F-35 के 3 वेरिएंट हैं. दुनिया के 19 देशों के पास ये फाइटर जेट है. अमेरिका इसे सबसे एडवांस और घातक फाइटर जेट कहता है. लेकिन दुनिया F-35 को कबाड़ कहती है. इसकी वजह भी है, F-35 A अब तक 6 बार क्रैश हो चुका है. F-35 B अब तक 6 बार हादसे का शिकार हो चुका है. F-35 C अब तक दो बार क्रैश हो चुका है.
यहां हम आपको ये भी बताना चाहेंगे कि F-35 के जो हादसे हुए हैं उसमें 6 बार वजह तकनीकी खराबी रही. 5 बार पायलट की गलती से हादसा हुआ. 1 बार F-35 हवा में दूसरे जहाज से टकरा गया था. यानी ज्यादा हादसे F-35 की तकनीकी खराबी की वजह से हुए हैं. अलास्का में हुआ हादसा भी तकनीकी खराबी के कारण हुआ. इसलिए दुनिया का सबसे महंगा फाइटर जेट सवालों में है.
बार-बार खराब क्यों रहे अमेरिकी प्लेन?
आपको याद होगा 14 जून को संयुक्त समुद्री अभ्यास में शामिल होने भारत आए ब्रिटेन के F-35B फाइटर जेट को तकनीकी खराबी के कारण केरल के तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी थी. 38 दिन तक ये फाइजर जेट केरल में खड़ा रहा था. बाद में जापान में भी F-35 तकनीकी खराबी के कारण कागोशिमा एयरपोर्ट पर लैंड हुआ था.
साफ है अमेरिका चाहे लाख दावा करे लेकिन F-35 आसमानी बाहुबली नहीं सफेद हाथी ही साबित हुआ है. डॉनल्ड ट्रंप ने भारत को भी ये फाइटर जेट बेचने का ऑफर दिया था. लेकिन भारत ने ट्रंप के इस ऑफर में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. भारत से ट्रंप की नाराजगी की कई वजहों मे एक वजह ये भी बताई जाती है.