Last Updated:August 29, 2025, 19:50 IST
Himanta Biswa Sarma News: असम CM हिमंत बिस्वा सरमा का कांग्रेस से BJP तक का सियासी सफर सुर्खियों में है. अरशद मदनी के बयान ने पुराने विवाद को जिंदा किया और कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति के आरोप तेज हो गए.

नई दिल्ली: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा एक बार फिर सुर्खियों में हैं. दरअसल जमीअत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख अरशद मदनी ने दावा किया है कि जब सरमा कांग्रेस में थे तो उन्होंने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कहा था कि सरमा को टिकट न दिया जाए क्योंकि उनमें “RSS मानसिकता” है. इस बयान ने असम की राजनीति में हलचल मचा दी है. BJP ने भी इस पर कांग्रेस को घेरा है. आइए इस खबर में जानते हैं हिमंत बिस्वा सरमा का कांग्रेस वाला सियासी सफर.
BJP आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि कांग्रेस टिकट बांटने के लिए मौलवियों पर निर्भर थी और अब वही इतिहास उजागर हो रहा है. मालवीय ने सवाल दागा- “क्या कांग्रेस के उम्मीदवार तय करने का काम मौलवियों के हवाले था?”
कांग्रेस से मोहभंग और इस्तीफा
साल 2011 के बाद कांग्रेस में उनके और तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बीच मतभेद गहराने लगे. सरमा का मानना था कि गोगोई की पकड़ कमजोर हो रही है और नई नेतृत्व पीढ़ी को आगे लाने में पार्टी हिचक रही है. लंबे समय तक चले खींचतान के बाद उन्होंने आखिरकार 2015 में कांग्रेस छोड़ दी.
भाजपा में नई शुरुआत
23 अगस्त 2015 को हिमंत बिस्वा सरमा भाजपा में शामिल हुए. उनकी एंट्री ने न सिर्फ असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर की राजनीति का समीकरण बदल दिया. साल 2016 में वे भाजपा उम्मीदवार के रूप में फिर से जालुकबारी से जीते और सर्बानंद सोनोवाल की सरकार में मंत्री बने. इसके बाद वे भाजपा के पूर्वोत्तर अभियान के मुख्य रणनीतिकार बन गए.
मुख्यमंत्री की कुर्सी तक
साल 2021 विधानसभा चुनाव में भाजपा की वापसी के बाद सरमा को विधायक दल का नेता चुना गया और वे असम के मुख्यमंत्री बने. आज वे भाजपा के लिए पूर्वोत्तर की राजनीति में सबसे बड़ा चेहरा हैं.
मदनी का बयान और मालवीय का पलटवार
अरशद मदनी का बयान पुराने पन्नों को फिर से खोल रहा है. उन्होंने कहा कि उन्होंने सोनिया गांधी को चेताया था कि सरमा को टिकट न दिया जाए, लेकिन 2011 में उन्हें टिकट मिला और वे जीते. BJP नेता अमित मालवीय ने इसे लपकते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने टिकट वितरण में भी “मौलवियों की मर्जी” को तवज्जो दी और यह दिखाता है कि पार्टी किस हद तक वोटबैंक की राजनीति में डूबी रही.
कांग्रेस से भाजपा तक का सबक
हिमंत बिस्वा सरमा का सफर बताता है कि कैसे 2011 तक कांग्रेस के मजबूत चेहरे रहे नेता आज भाजपा के सबसे बड़े रणनीतिकार और मुख्यमंत्री बन चुके हैं. मदनी का बयान उस “भूत” को जिंदा कर रहा है जिसे कांग्रेस भुलाना चाहती थी. क्योंकि वही नेता जिसे रोकने की मांग की गई थी, आज पूर्वोत्तर में भाजपा का असली मास्टरमाइंड है.
Sumit Kumar is working as Senior Sub Editor in News18 Hindi. He has been associated with the Central Desk team here for the last 3 years. He has a Master's degree in Journalism. Before working in News18 Hindi, ...और पढ़ें
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First Published :
August 29, 2025, 19:50 IST