Last Updated:February 25, 2026, 16:19 IST
जब पूरी दुनिया टाइपराइटर को इतिहास का हिस्सा मान चुकी है, तब भारत में एक नाम आज भी इस मशीन की खट-खट को जीवित रखे हुए है. दिल्ली से संचालित 'यूनिवर्सल टाइपराइटर' न केवल टाइपराइटर बेच रही है, बल्कि लगभग एक सदी पुरानी इस तकनीक को आधुनिक डिजिटल युग में भी सहेजकर आगे बढ़ा रही है.
दिल्ली: यह कहानी एक ऐसे शख्स और एक ऐसी कंपनी की है, जिसने बदलते तकनीकी दौर के साथ अपनी पहचान खोने के बजाय उसे और मजबूत किया. जब पूरी दुनिया टाइपराइटर को इतिहास का हिस्सा मान चुकी है, तब भारत में एक नाम आज भी इस मशीन की खट-खट को जीवित रखे हुए है. दिल्ली से संचालित ‘यूनिवर्सल टाइपराइटर’ न केवल टाइपराइटर बेच रही है, बल्कि लगभग एक सदी पुरानी इस तकनीक को आधुनिक डिजिटल युग में भी सहेजकर आगे बढ़ा रही है.
100 साल पहले शुरू किया था टाइपराइटर का कारोबार
इस कंपनी को फिलहाल दिल्ली में राजेश पल्टा संचालित कर रहे हैं. राजेश बताते हैं कि उनके परिवार ने करीब 100 वर्ष पहले टाइपराइटर का यह कारोबार शुरू किया था. वह इस व्यवसाय की तीसरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि अब उनके बच्चे चौथी पीढ़ी के रूप में इसे संभालने की तैयारी कर रहे हैं. राजेश का दावा है कि उनकी कंपनी आज भारत की आखिरी ऐसी संस्था है, जो न सिर्फ टाइपराइटर की बिक्री करती है, बल्कि उन्हें पेशेवर ढंग से रिस्टोर (पुनर्स्थापित) भी करती है. देश के विभिन्न हिस्सों से लोग अपने पुराने और खराब टाइपराइटर मरम्मत के लिए उनके पास भेजते हैं.
डिजिटल युग में भी हर महीने बिक रहे हैं 15 टाइपराइटर
राजेश बताते हैं कि भले ही लोगों को लगता हो कि डिजिटल युग में टाइपराइटर का उपयोग खत्म हो चुका है, लेकिन वह आज भी हर महीने औसतन 15 टाइपराइटर बेचते हैं. इसके अलावा कई ग्राहक अपने पुराने टाइपराइटर को दोबारा उपयोग के योग्य बनाने के लिए उनके पास आते हैं. राजेश के अनुसार, वह यह कारोबार केवल मुनाफे के लिए नहीं चला रहे. उनके लिए यह पारिवारिक विरासत को जीवित रखने का माध्यम है, साथ ही उन कर्मचारियों के भविष्य की जिम्मेदारी भी, जो वर्षों से उनके साथ जुड़े हुए हैं. यही कारण है कि कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने इस व्यवसाय को बंद करने का विचार नहीं किया.
क्यों आज भी लोग खरीदते हैं टाइपराइटर?
जब उनसे पूछा गया कि आधुनिक तकनीक के दौर में लोग अब भी टाइपराइटर क्यों खरीदते हैं, तो राजेश ने बताया कि कई ग्राहक मानते हैं कि टाइपराइटर रचनात्मकता को बेहतर बनाता है. कंप्यूटर या लैपटॉप की तरह इसमें ऑटो-करेक्शन की सुविधा नहीं होती, इसलिए हर शब्द सोच-समझकर टाइप करना पड़ता है. इससे एकाग्रता बढ़ती है और सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होती है. उन्होंने यह भी बताया कि जो लोग नया टाइपराइटर खरीदना चाहते हैं या अपने पुराने टाइपराइटर को रिस्टोर कराना चाहते हैं, वे ‘यूनिवर्सल टाइपराइटर’ की वेबसाइट के माध्यम से उनसे संपर्क कर सकते हैं.
एंटीक टाइपराइटर और म्यूज़ियम बनाने का सपना
राजेश पल्टा के पास टाइपराइटरों का एक विशाल और दुर्लभ संग्रह है. इसमें कई एंटीक मॉडल, विभिन्न लिपियों में उपयोग होने वाले टाइपराइटर और यहां तक कि दुनिया का सबसे बड़ा टाइपराइटर भी शामिल है. वह बताते हैं कि हर टाइपराइटर से उनका एक भावनात्मक जुड़ाव है. राजेश पल्टा का सपना है कि भविष्य में वह अपने इस संग्रह का एक म्यूज़ियम स्थापित करें, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक तकनीक को करीब से देख और समझ सकें.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क...और पढ़ें
First Published :
February 25, 2026, 16:19 IST

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