Video: कभी मोबाइल स्क्रीन पर लगाता था रॉकेट की फोटो! फटी कॉपियों से ISRO का सफर किया तय

2 hours ago

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कभी मोबाइल स्क्रीन पर लगाता था रॉकेट की फोटो! फटी कॉपियों से ISRO का सफर तय

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Success Story: बिहार के गया जिले के गुरुआ प्रखंड स्थित चंई गांव के सौरभ कुमार ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो गरीबी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बन सकती. एक साधारण किसान परिवार में जन्मे सौरभ का चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में वैज्ञानिक के तौर पर हुआ है. सौरभ के वैज्ञानिक बनने का सफर सातवीं-आठवीं कक्षा से ही शुरू हो गया था. जब वे अपनी कॉपियों और मोबाइल स्क्रीन पर 'इसरो' और 'नासा' की तस्वीरें सजाकर रखते थे. उनकी मेधा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे मैट्रिक और इंटरमीडिएट, दोनों में जिला टॉपर रहे। तंगहाली के बावजूद पिता सुदामा प्रसाद सिंह ने बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया. जेईई एडवांस के जरिए सौरभ ने 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस एंड साइंस टेक्नोलॉजी' में दाखिला लिया. उनकी प्रतिभा को देखते हुए संस्थान ने उन्हें स्कॉलरशिप भी प्रदान की. खास बात यह है कि इसरो से पहले सौरभ का चयन रक्षा मंत्रालय (BEL) में भी हुआ था, लेकिन अंतरिक्ष के प्रति उनके जुनून ने उन्हें इसरो तक पहुंचाया. आज सौरभ न केवल अपने प्रखंड के पहले इसरो वैज्ञानिक हैं, बल्कि करोड़ों युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा बन गए हैं.

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