जायदाद लेकर 84 साल के पिता को ठुकराने वाली बेटियों को हाईकोर्ट का तमाचा, ऐसे पकड़ी गई चालबाजी

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Last Updated:February 08, 2026, 06:59 IST

Karnataka Highcourt: कर्नाटक हाईकोर्ट ने 84 वर्षीय बुजुर्ग को बड़ी राहत देते हुए बेटियों के नाम की गई जमीन की गिफ्ट डीड रद्द कर दी. कोर्ट ने कहा कि बुजुर्गों का भरोसा तोड़कर संपत्ति लेना कानूनन गलत है. अदालत ने राजस्व रिकॉर्ड में बुजुर्ग का नाम फिर से दर्ज करने का आदेश दिया.

जायदाद लेकर 84 साल के पिता को ठुकराने वाली बेटियों को हाईकोर्ट का तमाचाZoom

कर्नाटक हाईकोर्ट ने 84 वर्षीय बुजुर्ग को राहत देते हुए बेटियों के नाम की गई संपत्ति की गिफ्ट डीड रद्द की. (AI फोटो)

Karnataka Higcourt: कर्नाटक हाईकोर्ट में एक ऐसा केस आया जिसे पढ़कर आप भी भावुक हो जाएंगे. जायदाद के लिए घरों में विवाद होता रहता है. लेकिन यह विवाद किसी भाई-भाई या भाई-बहन के बीच नहीं था. यह विवाद बेटियों और उनके पिता के बीच था. दरअसल 84 वर्षीय बुजुर्ग पिता ने भरोसे और पारिवारिक रिश्तों के आधार पर अपनी दो बेटियों को दो एकड़ से ज्यादा जमीन गिफ्ट कर दी थी. लेकिन संपत्ति मिलने के कुछ समय बाद ही बेटियों ने कथित तौर पर पिता की देखभाल से दूरी बना ली. बुजुर्ग पिता को भोजन, दवा और रहने जैसी मूल सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ा. मामला जब अदालत पहुंचा तो न्यायालय ने बुजुर्ग की पीड़ा को गंभीरता से लिया और बेटियों द्वारा की गई कथित चालबाजी पर सख्त रुख अपनाया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि बुजुर्ग माता-पिता अक्सर अपने बच्चों पर भरोसा कर संपत्ति ट्रांसफर कर देते हैं और लिखित शर्तों पर जोर नहीं देते. अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में सामाजिक वास्तविकता को समझना जरूरी है. कोर्ट ने पाया कि बुजुर्ग ने बेटियों के भरोसे पर संपत्ति ट्रांसफर की थी, लेकिन बाद में बेटियों ने जिम्मेदारी निभाने से इनकार कर दिया. न्यायालय ने इसे भरोसे का दुरुपयोग और कानून की नजर में धोखाधड़ी माना और गिफ्ट डीड को रद्द कर दिया.

भरोसे का दुरुपयोग, कानून बना बुजुर्ग का सहारा

84 वर्षीय वेंकटैया ने अपनी बेटियों शिवम्मा और पुट्टम्मा को 2023 में अपनी संपत्ति गिफ्ट की थी. उनका कहना था कि बेटियों ने वादा किया था कि वे उनके खाने, इलाज और रहने की पूरी जिम्मेदारी उठाएंगी. लेकिन संपत्ति ट्रांसफर होने के बाद हालात बदल गए. वेंकटैया ने आरोप लगाया कि बेटियों ने उन्हें नजरअंदाज करना शुरू कर दिया और मूलभूत जरूरतें भी पूरी नहीं कीं. इसके बाद उन्होंने ‘Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007’ की धारा 23 के तहत अदालत का दरवाजा खटखटाया.

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि गिफ्ट डीड बेटियों ने तैयार करवाई थी और बुजुर्ग पिता निरक्षर होने के कारण दस्तावेज की पूरी जानकारी नहीं रख पाए थे. कोर्ट ने माना कि यह पूरी प्रक्रिया भरोसे के आधार पर हुई थी. अदालत ने कहा कि यदि बुजुर्ग संपत्ति देने के बाद बच्चों से देखभाल की उम्मीद करते हैं और वह पूरी नहीं होती, तो ऐसा ट्रांसफर धोखाधड़ी माना जा सकता है. सुनवाई के दौरान पुट्टम्मा ने भी गिफ्ट डीड रद्द करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई. जबकि मृत बेटी शिवम्मा के बेटे ने संपत्ति पर दावा जताया. कोर्ट ने पोते के दावे को खारिज करते हुए कहा कि बिना जिम्मेदारी निभाए संपत्ति पर अधिकार जताना कानून के उद्देश्य के खिलाफ है.
(AI फोटो)

कोर्ट ने गिफ्ट डीड को क्यों रद्द किया?

कोर्ट ने पाया कि बुजुर्ग पिता ने बेटियों पर भरोसा कर संपत्ति दी थी, लेकिन उन्होंने देखभाल की जिम्मेदारी नहीं निभाई. इसे भरोसे का दुरुपयोग और कानून के तहत धोखाधड़ी माना गया, इसलिए गिफ्ट डीड को अवैध घोषित कर दिया गया.

इस मामले में किस कानून का सहारा लिया गया?

यह मामला ‘Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007’ की धारा 23 के तहत सुना गया. इस कानून के अनुसार यदि बुजुर्ग व्यक्ति संपत्ति देने के बाद देखभाल से वंचित रहता है, तो वह ट्रांसफर रद्द कराया जा सकता है.

कोर्ट ने सामाजिक पहलू पर क्या टिप्पणी की?

कोर्ट ने कहा कि बुजुर्ग माता-पिता अक्सर भावनात्मक भरोसे के आधार पर संपत्ति बच्चों को दे देते हैं. ऐसे मामलों में लिखित शर्तों की कमी को आधार बनाकर बच्चों को फायदा नहीं दिया जा सकता. कानून का उद्देश्य बुजुर्गों की सुरक्षा करना है.

बुजुर्गों की सुरक्षा पर अदालत का सख्त संदेश

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बुजुर्गों की भावनात्मक और आर्थिक निर्भरता एक सामाजिक सच्चाई है. ऐसे मामलों में कानून को संवेदनशीलता के साथ लागू करना जरूरी है. अदालत ने आदेश दिया कि संबंधित राजस्व रिकॉर्ड में वेंकटैया को संपत्ति का पूर्ण मालिक दोबारा दर्ज किया जाए.

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Sumit Kumar

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह...और पढ़ें

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February 08, 2026, 06:59 IST

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जायदाद लेकर 84 साल के पिता को ठुकराने वाली बेटियों को हाईकोर्ट का तमाचा

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