जम्मू हाईवे पर खींच लेगी 'डोगरी रसोई' के खाने की खुशबू, स्वाद ऐसा की चाटते रहेंगे उंगलियां

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Last Updated:March 02, 2026, 09:32 IST

जम्मू के अखनूर हाईवे से गुजरे और निशा देवी की 'डोगरी रसोई' का स्वाद नहीं चखा, तो क्या खाया. यहां अंबल, राजमा-चावल और मक्की की रोटी-साग जैसे डोगरी व्यंजन मिलते हैं. स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं निशा ने शुरुआती मुश्किलों को पार करते हुए न सिर्फ अपना मुकाम बनाया, बल्कि कई अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर किया.

जम्मूः जम्मू के अखनूर में हाईवे के किनारे से गुजरते हुए, आपको पारंपरिक डोगरी मसालों की सोंधी महक अपनी ओर जरूर खींचेगी. यह महक सिर्फ स्वादिष्ट भोजन की नहीं, बल्कि निशा देवी के अडिग हौसले और आत्मनिर्भरता की है. निशा देवी ने अपनी ‘डोगरी रसोई’ की शुरुआत कर न केवल अपनी, बल्कि इलाके की कई अन्य महिलाओं की किस्मत बदल दी.

हर बड़े मुकाम की तरह, निशा देवी का यह सफर भी शुरुआत में आसान नहीं था. जब उन्होंने इस भोजनालय की नींव रखी, तो उनके सामने कई आर्थिक और व्यावहारिक चुनौतियां आईं. ग्राहकों का इंतजार और काम का दबाव उन्हें निराश कर सकता था, लेकिन उनका अपनी पाक-कला और डोगरी संस्कृति पर अटूट विश्वास था. उन्होंने हार नहीं मानी. धीरे-धीरे लोगों की जुबान पर उनके हाथों का जादू चढ़ने लगा.

खाने वालों की लगती है खचाखच भीड़
आज स्थिति यह है कि उनकी रसोई में परोसे जाने वाले पारंपरिक डोगरी व्यंजन जैसे खट्टा-मीठा अंबल, राजमा-चावल, ताजा पनीर और सरसों के साग के साथ मक्की की रोटी का स्वाद चखने के लिए हर दिन भारी संख्या में लोग रुकते हैं. हाईवे पर स्थित होने के कारण राहगीरों के लिए यह जगह एक पसंदीदा ठिकाना बन गई है. इस सफलता की सबसे खूबसूरत बात यह है कि निशा इस सफर में अकेली आगे नहीं बढ़ीं. स्वयं सहायता समूह के सहयोग से शुरू की गई इस पहल को उन्होंने दूसरी महिलाओं के लिए एक अवसर में बदल दिया. उन्होंने काफी संख्या में स्थानीय महिलाओं को अपने साथ रोजगार से जोड़ा. जो महिलाएं कभी सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित थीं, आज यह रसोई उनके लिए आमदनी का एक मजबूत और सम्मानजनक जरिया बन चुकी है.

स्वाद के दीवाने हैं लोग
निशा देवी की ‘डोगरी रसोई’ सिर्फ एक दुकान नहीं है, यह इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि अगर इंसान अपनी जड़ों से जुड़ा रहे और मुश्किलों के आगे घुटने न टेके, तो सफलता जरूर कदम चूमती है. उनका यह सफर हमें सिखाता है कि जब एक महिला सशक्त होती है, तो वह पूरे समाज को अपने साथ आगे ले जाती है. बता दें, कि इस रसोई में खाने वालों की भीड़ लगती है, लोग इस रसोई के स्वाद के दीवाने हैं.

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Mahesh Amrawanshi

कहानी सुनने, गुनने और लिखने का शौकीन. शुद्ध कीबोर्ड पीटक. माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी भोपाल से शिक्षा-दीक्षा. द सूत्र, खबरिया न्यूज़, दैनिक नई दुनिया (अखबार) से सीखते हुए हाल मुकाम News18 है. 5 साल से पत्रकार...और पढ़ें

First Published :

March 02, 2026, 09:32 IST

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