Last Updated:March 06, 2026, 12:55 IST
इस किस्म के ओल का वजन 10 किलो से भी अधिक होता है. खास बात यह है कि जिन बगीचों में छाया की वजह से दूसरी फसलें नहीं हो पातीं, वहां भी ओल की खेती आसानी से की जा सकती है और किसान इससे अच्छी कमाई कर रहे हैं.
छपरा: बिहार के छपरा जिले के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ नगदी फसलों में भी नए प्रयोग कर रहे हैं. इससे उन्हें कम खर्च में बेहतर मुनाफा मिल रहा है. ऐसी ही एक फसल के बारे में हम बता रहे हैं, जिसे किसान अपने बगीचे में भी कम लागत में लगाकर अच्छी कमाई कर सकते हैं. इस फसल में मुख्य खर्च केवल बीज खरीदने में आता है. इसके बाद खेत में सड़ा हुआ गोबर डालकर किसान अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं.
ओल का वजन 10 किलो से भी अधिक
ईसूवापुर प्रखंड के चकहन गांव निवासी किसान शशि नंदन कुमार सिंह लंबे समय से हरी सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर करते आ रहे हैं. हालांकि हरी सब्जियों की खेती में लागत अधिक आती है. ऐसे में उन्होंने एक और नगदी फसल की खेती शुरू की, जिसमें खर्च कम और मुनाफा अधिक है. उन्होंने अपने बगीचे में खास किस्म के ओल की खेती शुरू की है. इस किस्म के ओल का वजन 10 किलो से भी अधिक होता है. खास बात यह है कि जिन बगीचों में छाया की वजह से दूसरी फसलें नहीं हो पातीं, वहां भी ओल की खेती आसानी से की जा सकती है और किसान इससे अच्छी कमाई कर रहे हैं.
कहां से मिला खेती का आइडिया
शशि नंदन कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने आत्मा (ATMA) योजना के तहत प्रशिक्षण लिया था. इसी प्रशिक्षण के दौरान उन्हें इस खास किस्म के ओल की खेती के बारे में जानकारी मिली. जानकारी मिलने के बाद उन्होंने पहले अपने बगीचे में प्रयोग के तौर पर थोड़ी मात्रा में इसकी खेती की. जब उन्हें इसमें सफलता मिली तो उन्होंने बड़े पैमाने पर इसकी खेती शुरू कर दी. अब वे इसकी बिक्री कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. प्रशिक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने इस किस्म के बारे में विस्तार से जानकारी दी थी. तब से वे खुद भी इसकी खेती कर रहे हैं और अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं.
कैसे की जाती है खेती
ओल की खेती के लिए सबसे पहले खेत की एक बार अच्छी तरह जुताई करनी होती है. इसके बाद ओल को काटकर लगभग 250 ग्राम के टुकड़ों में मिट्टी में दबा दिया जाता है. ध्यान रखना जरूरी है कि ओल काटते समय उसमें “आंख” जरूर होनी चाहिए, क्योंकि वहीं से पौधा निकलता है. पौधा निकलने के बाद गर्मी के मौसम में एक से दो बार सिंचाई करना जरूरी होता है. खेत में सड़ा हुआ गोबर डाल देने से उत्पादन और बढ़ जाता है. एक ओल का वजन 10 से 15 किलो तक हो सकता है. बाजार में इसकी कीमत 4000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक मिल जाती है, जिससे किसान अच्छी कमाई कर लेते हैं. इसकी खासियत यह भी है कि इसे खाने पर खुजली या कटाव नहीं होता. इसका स्वाद भी काफी अच्छा होता है और अचार बनाने के लिए भी यह काफी मशहूर है.
एक कट्ठा में 5 क्विंटल से अधिक उत्पादन
शशि नंदन कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने बगीचे में गजेंद्र वैरायटी के ओल की खेती की है, जिसका उत्पादन काफी अच्छा हो रहा है. इसमें लागत बहुत कम आती है, जबकि मुनाफा ज्यादा होता है. इस ओल से बनी सब्जी, अचार और चोखा काफी स्वादिष्ट होता है. यह खाने में बिल्कुल नहीं काटता और न ही खुजली करता है. किसान इसे 4000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक कीमत पर बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. उन्होंने बताया कि एक कट्ठा खेत में 5 क्विंटल से अधिक उत्पादन मिल जाता है. आत्मा योजना के तहत कृषि वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने इसकी खेती शुरू की और अब इससे अच्छी आमदनी कर रहे हैं. उनके अनुभव को देखकर आसपास के किसान भी उनसे जानकारी लेकर अपने बगीचे में इसकी खेती कर रहे हैं और अच्छा लाभ कमा रहे हैं.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क...और पढ़ें
Location :
Chapra,Saran,Bihar
First Published :
March 06, 2026, 12:55 IST

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