Last Updated:March 02, 2026, 20:56 IST
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद पूरी दुनिया में हाहाकार मचा है, लेकिन नई दिल्ली में एक अजीब सी कूटनीतिक खामोशी है. भारत सरकार ने अब तक खामेनेई की मौत पर न तो कोई आधिकारिक शोक जताया है और न ही अमेरिका-इजरायल के इस हमले की निंदा की है.आखिर इसकी वजह क्या है?

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है. इस बीच, भारत में विपक्ष खासकर कांग्रेस-सपा और अन्य दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर खामेनेई की हत्या पर चुप्पी साधने का आरोप लगा रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि सरकार भारत की पारंपरिक विदेश नीति से भटक रही है. लेकिन खामेनेई की हत्या की भारत ने निंदा क्यों नहीं की, इसके पीछे पूरी कूटनीतिक कहानी है.
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया के हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा, भारत शांति और स्थिरता का पक्षधर है. भारत ने हमेशा ऐसे विवादों का समाधान खोजने के लिए बातचीत और कूटनीति का आह्वान किया है.” यह बयान संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान पर नई दिल्ली के पुराने और स्पष्ट रुख को दर्शाता है.
भारत क्यों नहीं कर रहा खामेनेई की हत्या की निंदा?
भारत की इस चुप्पी के पीछे खामेनेई का वह पुराना इतिहास है, जब उन्होंने भारत के आंतरिक मामलों में बार-बार दखलंदाजी की थी. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, 2017 से 2024 के बीच खामेनेई ने चार बार ऐसे भड़काऊ बयान दिए, जिसके कारण विदेश मंत्रालय (MEA) को हर बार ईरानी दूतों को तलब करना पड़ा.
खामेनेई के भारत विरोधी बयानों का ट्रैक रिकॉर्ड
2017 (कश्मीर मुद्दा): खामेनेई ने पाकिस्तान की भाषा बोलते हुए उत्पीड़ित कश्मीरियों के लिए मुसलमानों को एकजुट होने का आह्वान किया था. 2019 (अनुच्छेद 370): जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद, उन्होंने भारत से ‘न्यायपूर्ण नीति’ अपनाने की मांग की थी. 2020 (दिल्ली दंगे): खामेनेई ने हिंदू पीड़ितों को नजरअंदाज करते हुए #IndianMuslimsInDanger का इस्तेमाल किया और ‘कट्टरपंथी हिंदुओं द्वारा मुसलमानों के नरसंहार’ का ट्वीट कर पाकिस्तानी नैरेटिव को हवा दी. इसके अलावा ईरान की संसद ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को भी मुस्लिम विरोधी बताया था. सितंबर 2024: अपने 2.7 मिलियन फॉलोअर्स को किए गए एक ट्वीट में खामेनेई ने भारत की तुलना गाजा और म्यांमार से कर दी थी. विदेश मंत्रालय ने इसे गलत जानकारी पर आधारित और अस्वीकार्य करार दिया था.इन बयानों से अस्थायी कूटनीतिक तनाव पैदा हुआ, लेकिन भारत ने ऊर्जा सहयोग और रणनीतिक जुड़ाव के कारण ईरान से वृहद संबंधों को पटरी से नहीं उतरने दिया.
ईरान की अपील और भारत की तेल चिंताएं
रविवार को भारत में ईरानी दूतावास ने दुनिया भर की सरकारों से अमेरिका-इजरायल के हमले और खामेनेई की हत्या की कड़ी निंदा करने का आग्रह किया था. इस बीच, भारत सरकार युद्ध के आर्थिक प्रभावों पर पैनी नजर रखे हुए है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोमवार को स्पष्ट किया कि वह हालात की लगातार निगरानी कर रहा है और देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता व सही कीमत सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा.
भारत अपनी कच्चे तेल की 88% जरूरत और प्राकृतिक गैस की लगभग आधी जरूरत आयात से पूरी करता है. इसका ज्यादातर हिस्सा होर्मुज से होकर आता है. अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरानी अधिकारियों ने इसी अहम समुद्री रास्ते को बंद करने की धमकी दी है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा खतरा मंडरा रहा है.
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Delhi,Delhi,Delhi
First Published :
March 02, 2026, 20:56 IST

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