क्रूड ऑयल की कहानी: ईरान और भारत के बीच तेल व्यापार का रोमांचक इतिहास

1 hour ago

नई दिल्ली. ईरान और भारत के बीच क्रूड ऑयल का व्यापार एक ऐसी कहानी है जो सदियों पुरानी दोस्ती, राजनीतिक उथल-पुथल और आर्थिक जरूरतों से बुनी गई है. जैसे दो पुराने दोस्त जो कभी साथ चलते हैं, तो कभी रास्ते अलग हो जाते हैं. यह व्यापार न सिर्फ तेल की धारा है, बल्कि दोनों देशों की ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक दबावों की मिसाल भी. 20वीं सदी की शुरुआत से शुरू होकर आज तक, यह रिश्ता उतार-चढ़ाव से गुजरा है, जहां कभी तेल की बाढ़ आई, तो कभी सूखा पड़ गया. लेकिन हर बार, दोनों देशों ने नए रास्ते तलाशे. इस रोमांचक सफर में राजनीति ने तेल की पाइपलाइन को बार-बार मोड़ा.

शुरुआती दिनों की दोस्ती
20वीं सदी की शुरुआत में, जब ब्रिटिश साम्राज्य ईरान में तेल खोज रहा था, भारत भी उसका हिस्सा था. 1908 में ईरान के दक्षिण-पश्चिम में तेल के कुओं की खोज ने सब कुछ बदल दिया. ब्रिटिश कंपनी एंग्लो-ईरानी ऑयल ने भारत को तेल पहुंचाना शुरू किया, जो उस समय ब्रिटिश राज का हिस्सा था. यह जैसे एक नई दोस्ती की शुरुआत थी, जहां ईरान का तेल भारत की मशीनों को चला रहा था. 1947 में भारत आजाद हुआ, लेकिन यह व्यापार जारी रहा. 1960 के दशक में ईरान भारत को लाखों बैरल क्रूड ऑयल बेचने लगा, और बदले में भारत ईरान को गैसोलीन देता, क्योंकि ईरान की रिफाइनरी कमजोर थी. यह दौर ऐसा था मानो दोनों देश एक-दूसरे की कमजोरियों को पूरा कर रहे हों.

1970 के दशक का सुनहरा दौर
1970 के दशक में यह व्यापार और मजबूत हुआ. 1973 में दोनों देशों ने एक समझौता किया, जहां ईरान भारत को तेल देता और बदले में भारत ईरान में फैक्टरियां और प्रोजेक्ट्स बनाता. जैसे मद्रास रिफाइनरी का निर्माण, जहां ईरान का तेल भारत की अर्थव्यवस्था को रफ्तार दे रहा था. यह समय वैश्विक तेल संकट का था, लेकिन ईरान-भारत की दोस्ती ने भारत को बचाया. ईरान भारत का बड़ा सप्लायर बन गया, और व्यापार करोड़ों डॉलर तक पहुंचा. यह दौर ऐसा था जैसे दो पड़ोसी मिलकर तूफान का सामना कर रहे हों, जहां राजनीति कम और आर्थिक फायदा ज्यादा था. ईरान की क्रांति से पहले तक, यह रिश्ता बिना रुकावट चलता रहा.

2000 के दशक में चरम पर पहुंचा व्यापार
2000 के दशक में कहानी और रोचक हो गई. ईरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा क्रूड ऑयल सप्लायर बन गया. 2008-09 में भारत ने ईरान से 16.5 प्रतिशत तेल आयात किया, जो लाखों बैरल रोजाना था. ईरान भारत को सस्ता तेल देता, लंबी क्रेडिट और फ्री इंश्योरेंस के साथ. बदले में, भारत ईरान के फारसी ब्लॉक और साउथ पार्स गैस फील्ड में निवेश करता. चाबहार पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स ने दोनों को जोड़ा. यह समय ऐसा था मानो तेल की नदी बह रही हो, और दोनों देश उसमें तैर रहे हों. लेकिन वैश्विक राजनीति ने जल्दी ही इस धारा को रोकने की कोशिश की.

सैंक्शन्स की पहली लहर
2011-12 में अमेरिका और यूरोप ने ईरान पर परमाणु कार्यक्रम के चलते सैंक्शन्स लगा दिए. यह जैसे तेल की पाइपलाइन पर ताला लग गया. भारत को ईरान से तेल आयात कम करना पड़ा, आयात 37 प्रतिशत तक गिर गए. भारत ने सऊदी अरब, इराक और अन्य देशों से तेल लिया. लेकिन ईरान के साथ रिश्ता टूटा नहीं; भारत ने रुपये में भुगतान जैसे तरीके अपनाए. यह दौर चुनौतीपूर्ण था, जहां भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच संतुलन बनाना पड़ा. मानो एक दोस्त को छोड़ना पड़ रहा हो, लेकिन दिल से नहीं.

2016 का राहत भरा मोड़
2016 में JCPOA समझौते से सैंक्शन्स हटे, और ईरान-भारत व्यापार फिर पटरी पर आया. भारत ने ईरान से 5 लाख बैरल रोजाना तेल लिया, जो पांच साल का रेकॉर्ड था. ईरान ने डिस्काउंट दिए, और भारत ने चाबहार में निवेश बढ़ाया. यह समय उम्मीदों से भरा था, जहां दोनों देश नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे थे. लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन नहीं चली; राजनीतिक बादल फिर घिर आए.

2018 की दूसरी सैंक्शन्स की मार
2018 में अमेरिका ने JCPOA से बाहर निकलकर फिर सैंक्शन्स लगाए. भारत का ईरान से तेल आयात लगभग रुक गया. 2018-19 में 12 अरब डॉलर का व्यापार था, लेकिन उसके बाद गिरावट आई. ईरान की जगह रूस ने ली, जो सस्ता तेल दे रहा था. यह दौर दुखद था, जहां पुरानी दोस्ती राजनीति की भेंट चढ़ गई. लेकिन भारत ने चाबहार जैसे प्रोजेक्ट्स जारी रखे, दिखाते हुए कि रिश्ता सिर्फ तेल से नहीं है.

आज का परिदृश्य और भविष्य
2020 के दशक में ईरान से तेल आयात न के बराबर है, लेकिन उम्मीद बाकी है. रूस अब भारत का बड़ा सप्लायर है, अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला बोल दिया है. वैश्विक राजनीति बदल रही है, और ईरान में शायद सत्ता में बदलाव के बाद सैंक्शन्स हटें तो व्यापार फिर शुरू हो. यह कहानी सिखाती है कि व्यापार सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि विश्वास और लचीलापन भी है. भविष्य में, दोनों देश नई तकनीक और हरित ऊर्जा से इस रिश्ते को मजबूत कर सकते हैं.

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