Last Updated:February 19, 2026, 14:32 IST
दरअसल प्राचीन भारत में जो किस्से, कहानियां, ग्रंथ और शास्त्र लिखे गए, उसमें ऐसे यंत्रों की बात भी हुई है, जो बहुत स्मार्ट थे. अपने हिसाब से काम करते थे. क्या एआई जैसी कोई अवधारणा तब भी थी. हमारे पुराणों और प्राचीन किताबों में एआई जैसी बात को लेकर क्या लिखा और कहा गया है.

क्या आपको लगता है कि वैदिक चिंतकों ने कभी आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस जैसी कोई परिकल्पना की होगी. हमारे पुराणों, शास्त्रों और ग्रंथों में ऐसे यंत्रों की कोई बात की गई जो बहुत स्मार्ट थे. हमारे मन की बात समझकर संचालित होते थे. क्या तब हमारे पास ऐसे हथियार और एसेसरीज थीं, जो एआई के होने जैसा कोई अहसास कराती रही हों. हालांकि सैकड़ों सालों पहले से एआई जैसे यंत्रों की कल्पनाएं तो होने लगी थीं लेकिन क्या किसी को अंदाज था कि ये कैसे हकीकत बन सकेगा.
भारतीय शास्त्रों, पुराणों और वैदिक दार्शनिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसा शब्द तो स्पष्ट रूप से नहीं कहा, क्योंकि ये लेटेस्ट तकनीकी शब्द 20वीं -21वीं सदी का है. लेकिन कई परिकल्पनाएं और विचार तो तब भी ऐसे थे ही जिससे लगता है कि जो नए जमाने के AI, रोबोटिक्स या स्वचालित यंत्रों से मेल खाते हुए थे. हालांकि ये मिथक रूप में ही थे.
रामायण और महाभारत में
कुछ लेखकों और शोधों ने रामायण-महाभारत में ऐसे यंत्र का ज़िक्र पाया है जो मानवीय सहायता करते थे. और काम करते थे. महाभारत में ये चर्चा हुई है कि जब राजा युधिष्ठिर ने हस्तिनापुर में नई राजधानी बसाई तो उनका जो महल बना, वो घर अद्भुत और स्मार्ट था, स्वचालित यंत्रों से चलता था. ये कहा जाता है कि ये महल माया से चलता था. इस माया को कई लोग एआई जैसा लेकिन मिथकीय रूप बताते हैं.
प्राचीन नीति विज्ञान शुक्रनीति में यन्त्र पुरुष की चर्चा मिलती है, ऐसे प्राणी जो विशिष्ट काम कर सकते थे, जैसे आज हम स्मार्ट मशीनों को कहते हैं.
कुछ उत्तरकालीन ग्रंथों में “यंत्र” और “यंत्र-पुरुष” का उल्लेख मिलता है. बाद की परंपराओं में “चलने-बोलने वाले यंत्र” जैसी कल्पनाएं भी लिखी हैं. लेकिन ध्यान रहे कि ये मिथकीय या रूपकात्मक वर्णन हैं, न कि तकनीकी विवरण. इनमें न एल्गोरिद्म है, न डेटा-प्रोसेसिंग.
क्या तब के हथियार
महाभारत और रामायण में ऐसे अस्त्रों का वर्णन है जो विशेष लक्ष्य पर ही प्रहार करते थे. मंत्र से सक्रिय होते थे. गलत प्रयोग पर लौट भी सकते थे. आज कुछ लोग इसे गाइडेड इंटैलिजेंट वेपन्स से जोड़ते हैं.हालांकि ये ग्रंथीय स्तर पर यह दैवी शक्ति और मंत्र-विद्या का वर्णन है, मशीन बुद्धि का नहीं. कह सकते हैं कि AI से अधिक “स्मार्ट वेपन” जैसी कल्पना है, वो भी पौराणिक संदर्भों में.
रामायण और महाभारत में ऐसे अस्त्रों का वर्णन मिलता है जो केवल सही लक्ष्य पर काम करते थे, खुद फैसले ले लेते थे – यह आधुनिक AI-संचालित गाइडेड मिसाइल्स या स्मार्ट तकनीक की तरफ इशारा कर सकता है. यानि कह सकते हैं कि एआई जैसा शब्द और तकनीक तो तब नहीं थी लेकिन तकनीकी सोच की दिशा परंपरा में थी.
क्या माया और मंत्रों की ताकत एआई जैसे थे
वैदिक जमाने, रामायण और महाभारत काल में माया और मंत्र-संचालित शक्तियों से बहुत से काम लिये जाते थे. उनकी नियम आधारित भाषा प्रणाली थी. पुराण या वेद में प्राचीन दार्शनिक विमर्श ऐसे भी हैं जो बुद्धिमत्ता, चेतना और जीवन-जैसी अवधारणाओं पर गौर करते हैं.
क्या पाणिनी ने इसके बारे में कहा था
महर्षि पाणिनि ने लगभग 2500 साल पहले भाषा की सूत्र-आधारित व्याकरण प्रणाली अष्टाध्यायी तैयार की थी, जिसे आज के हिसाब से अल्गोरिदम कहा जा सकता है. इसकी तुलना आधुनिक नेचुरल लेंग्वेज प्रोसेसिंग अवधारणा से की जाती है.
सोचने वाली मशीन
AI” शब्द भले नया हो. पहली बार इस शब्द का इस्तेमाल 1956 में किया गया लेकिन “सोचने वाली मशीन” की कल्पना सैकड़ों साल पहले भी किताबों में मिलती है.
17वीं सदी में रेने देकार्त (1596–1650) ने शरीर को एक तरह की “जैविक मशीन” कहा. उन्होंने लिखा कि यदि शरीर मशीन है, तो सोच और चेतना का प्रश्न अलग है. गॉटफ्रीड विल्हेल्म लाइबनिज ने भी 17वीं सदी में कल्पना की कि अगर तर्क को प्रतीकों में बदला जाए, तो मशीन तर्क कर सकती है. 18वीं सदी में ऑटोमेटा बनाए गए यानि यांत्रिक खिलौने. यांत्रिक गुड़िया जो लिखती और संगीत बजाती थीं.
वैसे 19वीं सदी में पहली बार एआई की पहली गंभीर तकनीकी कल्पना चार्ल्स बैबेज की ओर से आई. उन्होंने एनालिटिक इंजन डिज़ाइन किया यानि ऐसी मशीन जो गणना कर सकती थी. शर्तों पर काम कर सकती थी. प्रोग्राम की जा सकती थी.1843 में एडा लवलेस ने लिखा कि मशीन केवल वही कर सकती है जो हम उसे बताते हैं. वह संगीत या जटिल पैटर्न भी बना सकती है. ये आधुनिक प्रोग्रामिंग और AI की दिशा में बड़ा कदम था.
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Sanjay Srivastavaडिप्टी एडीटर
लेखक न्यूज18 में डिप्टी एडीटर हैं. प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में काम करने का 30 सालों से ज्यादा का अनुभव. लंबे पत्रकारिता जीवन में लोकल रिपोर्टिंग से लेकर खेल पत्रकारिता का अनुभव. रिसर्च जैसे विषयों में खास...और पढ़ें
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First Published :
February 19, 2026, 14:32 IST

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