Last Updated:February 27, 2026, 13:35 IST
AI vs Humans: क्या एआई अब छात्रों की जगह लेगा? मनीकंट्रोल के एक एक्सपेरिमेंट में चैटजीपीटी ने सीबीएसई कक्षा 10वीं गणित का 15 पेज का पेपर 60 सेकंड से भी कम समय में हल कर दिया. जानिए इस हैरान कर देने वाले टेस्ट के नतीजे और शिक्षा के भविष्य पर इसके गहरे प्रभाव.

नई दिल्ली (AI vs Humans). तकनीक की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) किस स्पीड से आगे बढ़ रहा है, इसका ताजा नमूना एक एक्सपेरिमेंट में देखने को मिला. मनीकंट्रोल के चौंकाने वाले टेस्ट में दुनिया के सबसे लोकप्रिय एआई चैटबॉट ChatGPT ने सीबीएसई कक्षा 10वीं गणित का 15 पन्नों का प्रश्न पत्र महज 1 मिनट में सॉल्व कर दिया. इस पेपर को हल करने के लिए स्टूडेंट्स को 3 घंटे का समय मिलता है. एआई की इस स्पीड ने एक्सपर्ट्स को हैरान कर दिया है. साथ ही एग्जाम सिस्टम पर भी सवाल उठा दिए हैं.
यह एक्सपेरिमेंट केवल स्पीड पर आधारित नहीं था, बल्कि एआई की सटीकता और तर्क क्षमता का भी टेस्ट था. 15 पेज के इस विस्तृत प्रश्न पत्र में एलजेब्रा, ज्योमेट्री और ट्रिग्नोमेट्री जैसे कठिन सेक्शन शामिल थे. जहां इंसानी दिमाग को हर स्टेप सोचने और लिखने में समय लगता है, वहीं ChatGPT ने पलक झपकते ही न केवल उत्तर दिए, बल्कि उनके स्टेप-बाय-स्टेप सॉल्यूशन भी प्रेजेंट किए. इस एक्सपेरिमेंट ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है कि क्या पारंपरिक बोर्ड परीक्षाएं एआई के दौर में पुरानी पड़ चुकी हैं?
चैटजीपीटी का कमाल, 60 सेकंड में सॉल्व किया पेपर
इस टेस्ट के दौरान प्रश्न पत्र के टेक्स्ट और इमेज को जैसे ही चैटजीपीटी के लेटेस्ट मॉडल में फीड किया गया, उसने प्रोसेसिंग शुरू की और कुछ ही सेकंड्स में उत्तरों की झड़ी लगा दी. 15 पन्नों के लंबे-चौड़े पेपर को हल करने में उसे 60 सेकंड यानी 1 मिनट से भी कम समय लगा. यह स्पीड किसी भी सुपर-ह्यूमन कैलकुलेटर से कहीं ज्यादा है.
क्या एआई से भी होती है गलती?
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, एआई ने ज्यादातर सवालों के सही जवाब दिए. हालांकि, ज्योमेट्री के कुछ कठिन डायग्राम समझने में उसे थोड़ी मशक्कत करनी पड़ी. लेकिन कुल मिलाकर उसका प्रदर्शन डिस्टिंक्शन लेवल का रहा. इससे साबित होता है कि एआई अब केवल भाषा ही नहीं, बल्कि Mathematical Reasoning में भी महारत हासिल कर चुका है.
शिक्षा व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी
अगर एआई 3 घंटे का काम 1 मिनट में कर सकता है तो होमवर्क और प्रोजेक्ट्स का रेलेवेंस क्या रह जाएगा? शिक्षकों और एजुकेशनिस्ट का मानना है कि अब ‘रटने’ या ‘सॉल्व करने’ की क्षमता के बजाय ‘क्रिटिकल थिंकिंग’ और एआई का सही इस्तेमाल सिखाने पर जोर देना होगा. सीबीएसई जैसे बोर्ड के लिए यह बड़ी चुनौती है कि वे अपने एग्जाम सिस्टम को एआई-प्रूफ कैसे बनाएं.
स्टूडेंट्स के लिए वरदान या अभिशाप?
एक तरफ जहां यह टूल स्टूडेंट्स के लिए पर्सनल ट्यूटर का काम कर सकता है, वहीं दूसरी तरफ यह उनकी सोचने की क्षमता को कम भी कर सकता है. अगर समाधान इतनी आसानी से उपलब्ध होंगे तो छात्र स्ट्रगल या मेहनत करना छोड़ सकते हैं. भविष्य में शिक्षा का स्वरूप ‘मानव-मशीन सहयोग’ पर आधारित होगा, न कि केवल अंकों की दौड़ पर.
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With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys...और पढ़ें
First Published :
February 27, 2026, 13:35 IST

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