Ayatollah Ali Khamenei: ईरान में लगातार बढ़ रहे विरोध प्रदर्शनों और सत्ता पर दबाव के बीच सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है. ब्रिटिश अखबार द टाइम्स ने खुफिया रिपोर्ट्स के हवाले से कहा है कि 86 वर्षीय खामेनेई के पास देश छोड़ने की एक बैकअप योजना मौजूद है. रिपोर्ट के मुताबिक, यदि सुरक्षा बल हालात को काबू में रखने में नाकाम रहते हैं या उनके भीतर भी विद्रोह की स्थिति बनती है तो खामेनेई अपने परिवार और करीबी सहयोगियों के साथ रूस जा सकते हैं.
खामेनेई के प्लान B में शामिल है उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह ‘प्लान-B’ बेहद गोपनीय है और केवल लगभग 20 लोगों तक सीमित है. इनमें उनके बेटे और उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई भी शामिल हैं. एक खुफिया सूत्र के अनुसार, रूस को उनके लिए एकमात्र सुरक्षित ठिकाना माना जा रहा है क्योंकि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ खामेनेई के करीबी रणनीतिक और वैचारिक संबंध रहे हैं.
खुफिया रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि इजरायल के साथ पिछले साल हुए 12 दिन के युद्ध के बाद खामेनेई शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर नजर आ रहे हैं. हाल के महीनों में उनका सार्वजनिक रूप से कम दिखाई देना, युद्ध के दौरान बंकर में रहना और सुरक्षा पर अत्यधिक जोर उनकी बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है. रिपोर्ट उन्हें वैचारिक रूप से कठोर, लेकिन सत्ता बचाने के लिए व्यावहारिक रणनीति अपनाने वाला नेता बताती है.
खामेनेई खुद को मानते है वैश्विक शिया नेतृत्व केंद्र
बता दें, खामेनेई लंबे समय से खुद को वैश्विक शिया नेतृत्व का केंद्र मानते रहे हैं और ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’-लेबनान, गाजा, इराक, सीरिया और यमन में भारी निवेश करते आए हैं. हालांकि, इन मोर्चों पर हालिया झटकों के बाद ईरान के भीतर यह सवाल तेज हो गया है कि जब देश महंगाई, बेरोजगारी और गिरते जीवन स्तर से जूझ रहा है तब विदेशों में इतना खर्च क्यों किया जा रहा है. सड़कों पर गूंजता नारा 'ना गाजा, ना लेबनान, जान सिर्फ ईरान' इसी असंतोष को दर्शाता है.
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रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि खामेनेई के नियंत्रण में आने वाले अर्ध-सरकारी नेटवर्क, खासकर ‘सेताद’, के पास अरबों डॉलर की संपत्तियां हैं. 2013 की एक जांच में इन संपत्तियों का अनुमान करीब 95 अरब डॉलर तक लगाया गया था. कई वरिष्ठ सहयोगियों के परिवार पहले से अमेरिका, कनाडा और दुबई में रह रहे हैं. कुल मिलाकर, रिपोर्ट संकेत देती है कि यदि ईरान में सत्ता की पकड़ कमजोर पड़ती है तो खामेनेई के पास देश छोड़ने की पूरी तैयारी है. अब सवाल यह है कि क्या मौजूदा विरोध उस निर्णायक मोड़ तक पहुंचेगा या सत्ता एक बार फिर सख्ती के सहारे बनी रहेगी.

1 day ago
