Last Updated:March 08, 2026, 22:44 IST
भारत की ऊर्जा नीति को लेकर हाल के महीनों में वैश्विक स्तर पर काफी चर्चा रही है. अमेरिका की ओर से दबाव के बावजूद भारत ने अपने तेल आयात के फैसलों में बदलाव नहीं किया. आंकड़ों से पता चलता है कि देश ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति भारत की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है.

नई दिल्ली. कच्चे तेल के आयात से जुड़े हालिया आंकड़े बताते हैं कि भारत ने अपनी ऊर्जा नीति तय करने में स्वतंत्र रुख अपनाया है. नवंबर 2024 से फरवरी 2026 के बीच के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि अमेरिका की ओर से लगातार दबाव बनाए जाने के बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा. इस दौरान अमेरिका ने कई बार भारत को रूसी ऊर्जा खरीद कम करने की सलाह दी, लेकिन भारत ने अपने आर्थिक हितों और ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता दी. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देश के लिए सस्ती और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना सबसे अहम होता है.
ट्रंप के बयानों से शुरू हुआ दबाव
अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान के दौरान ही भारत को रूस से तेल खरीदने को लेकर चेतावनी दी थी. जनवरी 2025 में सत्ता संभालने के बाद यह दबाव और बढ़ गया. धीरे-धीरे यह बयानबाजी नीतिगत कदमों में बदलने लगी. अप्रैल 2025 में अमेरिकी प्रशासन ने भारत पर 25 प्रतिशत का तथाकथित रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी. इसके बाद भी भारत ने रूस से तेल आयात में कमी नहीं की, बल्कि उसी महीने कुल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 43 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो उस अवधि का सबसे ऊंचा स्तर था.
टैरिफ और तनाव के बावजूद बढ़ा आयात
मई 2025 के बाद भारत और अमेरिका के संबंधों में तनाव और बढ़ने की खबरें सामने आईं. अगस्त 2025 में अमेरिका ने एक और सख्त कदम उठाते हुए कुल 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का फैसला किया. इसमें पहले से लागू 25 प्रतिशत टैरिफ के साथ अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल था, जो खास तौर पर रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर लगाया गया था. हालांकि इन कदमों का भी भारत के आयात पैटर्न पर ज्यादा असर नहीं पड़ा. रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2025 में रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात करीब 1.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन था, जो अक्टूबर 2025 तक बढ़कर लगभग 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया.
बाद में अमेरिका ने नरम किया रुख
लगातार बढ़ते वैश्विक तनाव और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच अमेरिका ने आखिरकार अपना रुख कुछ नरम किया. फरवरी 2026 में ट्रंप प्रशासन ने भारत से जुड़े कुछ प्रतिबंध हटाने की घोषणा की, हालांकि भविष्य में कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई. इसके बाद भी आंकड़ों से पता चला कि फरवरी में रूस से भारत के तेल आयात में पिछले महीने के मुकाबले करीब 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. मार्च 2026 में अमेरिका ने 30 दिनों की राहत अवधि देते हुए कई प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटा दिए.
ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देता रहा भारत
पिछले करीब 15 महीनों के घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि भारत ने अपनी ऊर्जा नीति में राष्ट्रीय हित को सबसे ऊपर रखा. देश ने सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्रोतों से तेल खरीद जारी रखी. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने एक संतुलित रणनीति अपनाई, जिसमें एक ओर वैश्विक कूटनीतिक संबंध बनाए रखे गए और दूसरी ओर घरेलू ऊर्जा जरूरतों को भी पूरा किया गया. यही वजह है कि दबाव के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा नीति को स्वतंत्र रूप से संचालित करना जारी रखा.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in ...और पढ़ें
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New Delhi,Delhi
First Published :
March 08, 2026, 22:44 IST

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