अमित मालवीय के खिलाफ FIR रद्द, उदयनिधि स्टालिन का सनातन धर्म वाला बयान हेट स्पीच- हाईकोर्ट

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Last Updated:January 21, 2026, 12:53 IST

Amit Malviya Gets Relief From High Court: मद्रास हाईकोर्ट ने अमित मालवीय के खिलाफ केस खारिज कर दिया है. साथ ही मंत्री उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर बयान को हेट स्पीच माना है.

मालवीय के खिलाफ FIR रद्द, उदयनिधि का सनातन धर्म वाला बयान हेट स्पीच- हाईकोर्टमद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने अमित मालवीय को बड़ी राहत दी है.

Amit Malviya Gets Relief From High Court: मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने एक अहम फैसले में बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को पूरी तरह खारिज कर दिया. कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म को समाप्त करने वाले बयान को हेट स्पीच माना जा सकता है, जबकि उस बयान पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और उसकी प्रतिक्रिया देने वालों पर ही केस दर्ज किए गए.

जस्टिस एस. श्रीमती की एकल पीठ ने अमित मालवीय की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि दो सितंबर 2023 को ‘सनातन ओझिप्पु सम्मेलन’ में उदयनिधि स्टालिन द्वारा दिए गए भाषण को जनसंहार की मंशा वाला बयान माना जा सकता है. मालवीय ने सोशल मीडिया पर उस भाषण का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा था कि यह सनातन धर्म के अनुयायियों के खिलाफ जनसंहार का आह्वान है. इस पोस्ट के आधार पर उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए (धर्म के आधार पर दुश्मनी फैलाना), 505 (सार्वजनिक उपद्रव) सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया था.

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अगर सनातन धर्म को ‘ओझिप्पु’ (समाप्त) करना है, तो इसका मतलब है कि उसके अनुयायियों का अस्तित्व नहीं रहना चाहिए. जज ने तमिल शब्द ‘ओझिप्पु’ का बार-बार इस्तेमाल होने पर गहरा विश्लेषण किया और इसे सांस्कृतिक विनाश या सांप्रदायिक उन्मूलन की मंशा से जोड़ा. कोर्ट ने मार्च 2024 के एक अन्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि उसी हाईकोर्ट ने पहले भी उदयनिधि के बयान को हेट स्पीच माना था. जस्टिस श्रीमती ने गंभीर चिंता जताई कि जब कोई मंत्री हेट स्पीच देता है, तो उसका विरोध करना अपराध नहीं हो सकता. कोर्ट उन लोगों से सवाल कर रहे हैं जिन्होंने प्रतिक्रिया दी, लेकिन मूल बयान देने वाले के खिलाफ कानून की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

कोर्ट ने जांच अधिकारी की काउंटर एफिडेविट में राजनीतिक रंग वाली टिप्पणियों पर भी कड़ी फटकार लगाई. जांच अधिकारी ने लिखा था कि अगर राज्यपाल और बीजेपी नेता सनातन धर्म पर बोल सकते हैं तो मंत्री क्यों नहीं. कोर्ट ने कहा कि अधिकारी पूरी तरह पॉलिटिकल पक्ष ले रहे है. पक्ष लेना निंदनीय है.

मालवीय के वकील ने तर्क दिया कि पोस्ट में सिर्फ मंत्री का सार्वजनिक भाषण दोहराया गया और उसकी व्याख्या की गई, जिसमें हिंसा या आंदोलन का आह्वान नहीं था. कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि मालवीय का पोस्ट सवाल उठाने वाला था, न कि नफरत फैलाने वाला. कोर्ट ने ऐतिहासिक संदर्भ भी दिया कि द्रविड़ कझगम और बाद में DMK ने दशकों से हिंदू धर्म और सनातन पर विचारधारा आधारित विरोध किया है. ऐसे में मालवीय का पोस्ट उस भाषण के गहरे अर्थ पर सवाल था.

यह फैसला तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा मोड़ माना जा रहा है. उदयनिधि स्टालिन के बयान पर पहले भी कई FIR दर्ज हुई थीं, लेकिन उनमें से ज्यादातर पर कार्रवाई नहीं हुई. अमित मालवीय ने फैसले के बाद X पर लिखा- सत्य की जीत हुई. सनातन के खिलाफ नफरत फैलाने वालों को संरक्षण नहीं मिलेगा. वहीं, DMK नेताओं ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.

First Published :

January 21, 2026, 12:36 IST

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