Video: नौकरी नहीं मिली तो खुद बने 'बॉस'! अब मॉल्स में बिक रहे इनके ब्रांडेड स्पोर्ट्स कपड़े

2 hours ago

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एक योजना ने बदली जिंदगी, अब मॉल्स में बिक रहे इनके ब्रांडेड स्पोर्ट्स कपड़े

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Success Story: छपरा के जयप्रकाश विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करने के बाद जब रवि शंकर को नौकरी नहीं मिली. तो उन्होंने हार मानने के बजाय स्वरोजगार की राह चुनी. गरखा प्रखंड के मौजमपुर गांव के रहने वाले रवि ने बिहार सरकार की मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत 10 लाख रुपये का लोन लिया. अपने घर पर ही स्पोर्ट्स गारमेंट्स (खेल के कपड़े) बनाने की यूनिट शुरू की. आज रवि सिर्फ एक व्यवसायी नहीं, बल्कि 10 अन्य महिलाओं और युवाओं के लिए अन्नदाता भी बन चुके हैं. उनकी यूनिट में तैयार टी-शर्ट, लोअर और जर्सी की क्वालिटी इतनी शानदार है कि छपरा के अलावा वैशाली और सिवान के बड़े मॉल्स और स्पोर्ट्स दुकानों से उन्हें एडवांस ऑर्डर मिलते हैं. हरियाणा और दिल्ली से बेहतरीन फैब्रिक मंगवाकर रवि बाजार से काफी कम दाम में उच्च गुणवत्ता वाले कपड़े तैयार करते हैं. रवि कहते हैं कि इस उद्योग ने न सिर्फ मेरी बेरोजगारी दूर की, बल्कि अब मैं दूसरों के घर का चूल्हा जलाने में मदद कर रहा हूं. उनका लक्ष्य अब अपने इस कारोबार को और विस्तार देना है ताकि वे अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार से जोड़ सकें.

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