Last Updated:January 13, 2026, 13:22 IST
Supreme Court Stray Dogs: आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि कुत्तों के काटने, किसी बच्चे या बुजुर्ग की मौत या चोट लगने पर, राज्य को कुछ न करने के लिए मुआवजा देना पड़ सकता है. जस्टिस विक्रम नाथ के अनुसार, जो लोग कहते हैं कि वे कुत्तों को खाना खिलाते हैं, उन्हें भी ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा.
आवारा कुत्तों से जुड़े याचिका सुप्रीम कोर्ट में आज भी सुनवाई हुई. (फाइल)Supreme Court Stray Dogs: आवारा कुत्तों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज यानी मंगलवार को सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों को खिलाने वाले ग्रुप से तीखा सवाल किया. सुप्रीम कोर्ट ने डॉग लवर्स और फीडर्स से पूछा कि क्या आपकी भावनाएं सिर्फ कुत्तों के लिए हैं, इंसानों के लिए नहीं? आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चेतावनी दी कि कुत्तों के काटने, किसी बच्चे या बुजुर्ग की मौत या चोट लगने पर, राज्य को कुछ न करने के लिए मुआवजा देना पड़ सकता है. जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि जो लोग कहते हैं कि वे कुत्तों को खाना खिलाते हैं, उन्हें भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा. उन्होंने कहा कि ऐसा करो उन कुत्तों को अपने घर ले जाओ. सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि कुत्ते इधर-उधर गंदगी क्यों फैला रहे हैं, लोगों को क्यों काट रहे हैं, डरा रहे हैं?.
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की, जब एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने आवारा कुत्तों के मुद्दे को एक भावनात्मक मामला बताया. बेंच ने उनसे कहा, ‘अब तक भावनाएं सिर्फ कुत्तों के लिए ही दिख रही हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों को खिलाने वाले ग्रुप से सवाल किया और पूछा-क्या आपकी भावनाएं सिर्फ कुत्तों के लिए हैं, इंसानों के लिए नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या अदालत को आंखें मूंद लेनी चाहिए? इन मौतों के लिए कौन जिम्मेदार है? इस पर गुरुस्वामी ने जवाब दिया, ‘ऐसा नहीं है. मैं इंसानों के बारे में भी उतनी ही चिंतित हूं.’
‘7 नवंबर का आदेश पूरी तरह वैधानिक’
इधर सीनियर एडवोकेट अरविंद दातार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने दलीलें पेश करते हुए कहा कि 7 नवंबर का आदेश पूरी तरह वैधानिक और कानून समर्थित है. बता दें कि पिछले साल 7 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, बस स्टैंड, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था, और निर्देश दिया था कि इन कुत्तों को तय डॉग शेल्टर में भेजा जाए. वहीं,
‘राज्य को भी देना होगा मुआवजा’
अरविंद दातार ने कहा कि मामले में किसी विशेषज्ञ समिति के गठन की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि ABC नियम 60 से ज्यादा केंद्रीय और राज्य कानूनों के खिलाफ हैं. अरविंद दातार ने वन्यजीव क्षेत्रों में आवारा कुत्तों से खतरे का मुद्दा उठाया. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि 9 साल के बच्चे की मौत पर जिम्मेदारी किसकी होगी? कोर्ट ने कहा कि डॉग बाइट से मौत और चोट के मामलों में राज्य को भारी मुआवजा देना होगा.
डॉग फीडर्स की भूमिका पर भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने डॉग बाइट की हर घटना पर जिम्मेदारी तय करने के संकेत दिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुत्तों के काटने से हुई चोट या मौत पर अधिकारियों की जवाबदेही बनती है. सुप्रीम कोर्ट ने डॉग फीडर्स की भूमिका पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने संकेत दिया कि डॉग बाइट मामलों में मुआवजे की जिम्मेदारी तय की जा सकती है. आवारा कुत्तों से जुड़ी घटनाओं पर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए गए.
चलिए जानते हैं आवारा कुत्तों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी.
जब आवारा कुत्तों द्वारा एक 9 साल के बच्चे को मार दिया जाता है, जिन्हें कुत्ता प्रेमी संगठन द्वारा पाला-पोसा जा रहा है, तो किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? क्या इस अदालत को आंखें बंद करके सब कुछ होने देना चाहिए? ऐसा लगता है कि सहानुभूति सिर्फ कुत्तों के लिए ही है.About the Author
Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho...और पढ़ें
First Published :
January 13, 2026, 12:53 IST

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