PHOTOS: 1770 के अकाल की गवाही और इतिहास की सीढ़ियां... गोलघर की खामोश दीवारों से सुबह-सुबह संवाद करने पहुंचे नीतीश कुमार

8 hours ago

Last Updated:January 11, 2026, 12:42 IST

Bihar Tourist Spot: सुबह की हल्की ठंड, गंगा की लहरों की ओर से आती हवा और पटना की पहचान बन चुके गोलघर की घुमावदार सीढ़ियों पर कदमों की आहट... रविवार की शांत सुबह में जब आमतौर पर सैलानी यहां पहुंचते हैं उसी वक्त बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अचानक गोलघर के परिसर में नजर आए. यह कोई तय कार्यक्रम नहीं था, न मंच था और न भाषण- बिहार के समृद्ध इतिहास के साये में मुख्यमंत्री इस विशेष धरोहर को करीब से देखने पहुंचे थे.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना के ऐतिहासिक गोलघर का अनौपचारिक दौरा किया तो उनके साथ जदयू के राज्यसभा सांसद संजय झा भी मौजूद थे. मुख्यमंत्री ने गोलघर परिसर की मौजूदा स्थिति का निरीक्षण किया.नीतीश कुमार का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब गोलघर आम लोगों के लिए अस्थायी रूप से बंद है. संरक्षण कार्य और संरचना की मरम्मत के चलते पर्यटकों की एंट्री पर रोक लगी हुई है.

गोलघर पटना की पहचान और ब्रिटिश कालीन इंजीनियरिंग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है. गांधी मैदान के पश्चिमी छोर पर स्थित यह विशाल गोलाकार संरचना वर्ष 1786 में बनाई गई थी. इसका निर्माण ब्रिटिश इंजीनियर कैप्टन जॉन गार्स्टिन ने कराया था. तत्कालीन गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स ने 1770 के भीषण अकाल के बाद इसे बनवाने का आदेश दिया था, ताकि भविष्य में अनाज संकट से निपटा जा सके.

इतिहासकारों के अनुसार 1770 के अकाल में बंगाल और बिहार क्षेत्र में लाखों लोगों की मौत हो गई थी. इसी त्रासदी के बाद गोलघर की परिकल्पना हुई। यह एक विशाल अनाज भंडार के रूप में बनाया गया था, जिसकी क्षमता लगभग 1.4 लाख टन अनाज रखने की थी. इसकी ऊंचाई करीब 29 मीटर है और आधार पर इसकी दीवारें करीब 3.6 मीटर मोटी हैं जो इसे बेहद मजबूत बनाती हैं.

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गोलघर की बनावट अपने आप में अनोखी है. इसमें कुल 145 घुमावदार सीढ़ियां हैं, जिन्हें इस तरह डिजाइन किया गया था कि मजदूर अनाज को ऊपर तक ले जा सकें और खाली होकर नीचे लौट सकें. हालांकि, इंजीनियरिंग डिजाइन में कुछ खामियों के कारण इसे कभी भी अनाज भंडारण के लिए पूरी तरह इस्तेमाल नहीं किया गया. इसके बावजूद यह संरचना आज भी मजबूती से खड़ी है.

वर्तमान समय में गोलघर पटना का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है. यहां से गंगा नदी और पूरे शहर का मनोरम दृश्य दिखाई देता है. पर्यटकों के आकर्षण के लिए यहां लेजर शो, सजावटी लाइटिंग और आसपास गार्डन विकसित किए गए हैं. शाम के समय गोलघर की रोशनी शहर की खूबसूरती को और बढ़ा देती है.

<br />हालांकि, हाल के दिनों में गोलघर को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है. वजह है इसकी पुरानी संरचना में आई दरारें और फाउंडेशन की मरम्मत. वर्ष 2002 से इसके संरक्षण और सुधार का काम चरणबद्ध तरीके से चल रहा है. विशेषज्ञों की सलाह पर फिलहाल केवल आधिकारिक निरीक्षण और सीमित विजिटर्स को ही अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है.

मुख्यमंत्री का अचानक यहां पहुंचना यह दर्शाता है कि सरकार पटना की ऐतिहासिक धरोहरों की स्थिति को लेकर गंभीर है और उन्हें नए सिरे से संवारने की दिशा में सक्रिय है. बता दें कि मुख्यमंत्री इससे पहले भी पटना के कई प्रमुख स्थलों का सुबह के समय निरीक्षण कर चुके हैं.

हाल के महीनों में उन्होंने इको पार्क, जेपी गंगा पाथ और कुम्हरार पार्क का दौरा किया था. नीतीश कुमार का मानना है कि शहर के सार्वजनिक और ऐतिहासिक स्थलों की जमीनी स्थिति को खुद देखकर ही बेहतर फैसले लिए जा सकते हैं. गोलघर का दौरा भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है.

गोलघर के बंद होने का असर स्थानीय पर्यटन और आसपास के छोटे व्यवसायों पर भी पड़ा है. पर्यटकों की संख्या कम होने से गाइड, छोटे दुकानदार और फोटोग्राफरों की आमदनी प्रभावित हुई है. हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह रोक अस्थायी है और संरक्षण कार्य पूरा होते ही गोलघर को फिर से आम लोगों के लिए खोला जाएगा.

First Published :

January 11, 2026, 12:42 IST

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1770 के अकाल की गवाही और इतिहास की सीढ़ियां... गोलघर देखने पहुंचे नीतीश कुमार

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