Last Updated:January 05, 2026, 15:09 IST
एम्स नई दिल्ली भारत का नंबर वन अस्पताल है, जहां जटिल बीमारियों से जूझ रहे गंभीर मरीजों का अंतिम सांस बची होने तक इलाज किया जाता है, यही वजह है कि यहां स्ट्रैचर पर आए मरीज अक्सर मुस्कुराते हुए घर लौटते हैं. इस अस्पताल में देशभर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी मरीज आते हैं और साल में करीब 50 लाख लोगों का इलाज यहां किया जाता है. इसमें ओपीडी से लेकर आईपीडी और इमरजेंसी के मरीज शामिल हैं. हालांकि साल 2026 आने पर एम्स के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने मरीजों से अपील करते हुए बताया है कि अस्पताल में कौन से मरीज इलाज के लिए आएं? ताकि एम्स की विशेषज्ञता का लाभ उठाया जा सके और मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके.. आइए जानते हैं...

एम्स नई दिल्ली में हर साल इलाज के लिए करीब 50 लाख मरीज आते हैं. ये मरीज बहुत गंभीर हालत में आते हैं लेकिन यहां से ठीक होकर ही लौटते हैं. हालांकि बहुत सारे मरीज ऐसे भी होते हैं जो हल्की-फुल्की बीमारियों में भी एम्स में इलाज कराने के लिए आ जाते हैं. अब एम्स नई दिल्ली ने नए साल में इलाज की अपनी प्राथमिकताएं और नियमों में बदलाव किया है और बताया है कि एम्स में किन बीमारियों के मरीज आएं, ताकि उन्हें बेहतर इलाज मिल सके.

इस बारे में एम्स के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने बताया कि एम्स एक टर्शियरी केयर सेंटर है, जहां गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज आधुनिक और हाईटेक तकनीक व विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा किया जाता है. आमतौर पर यहां ऐसे मरीज रैफर होकर आते हैं, जिनका इलाज स्थानीय स्तर पर नहीं हो पाता है. उन्होंने कहा, मेरा मरीजों से निवेदन है कि वे सामान्य सर्दी-खांसी-बुखार की बीमारी के लिए एम्स न आएं. इनका इलाज स्थानीय अस्पतालों में करवाना ज्यादा सही है.'

डॉ. श्रीनिवास ने आगे कहा,' एम्स में सीमित संसाधनों के बीच गंभीर और जटिल बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बेहतर इलाज तभी मिल पाएगा, जब सामान्य बीमारियों का दबाव कम होगा. यह संस्थान मौसमी छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज के लिए नहीं है. देखा जाता है कि एम्स में बहुत सारे ऐसे मरीज पहुंच जाते हैं, जिनका इलाज सामान्य अस्पतालों में हो सकता है. इससे गंभीर मरीजों को समय पर सुविधा देने में परेशानियां आती हैं. अगर लोग इस चीज का ध्यान रखेंगे तो गंभीर मरीजों को यहां जल्द से जल्द इलाज देना संभव होगा.'
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एम्स में अभी तक ऑनलाइन और ऑफलाइन दो तरह से मरीज इलाज कराने आते थे. उन्होंने कहा कि एम्स में ऑनलाइन सिस्टम को और मजबूत बनाया जा रहा है. अस्पताल के अंदर हर जानकारी ऑनलाइन डैशबोर्ड पर देने के साथ ही जो मरीज ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेकर इलाज कराने आएंगे उन्हें इलाज में प्राथमिकता दी जाएगी. बिना अपॉइंटमेंट यहां आकर कष्ट झेलने की जरूरत नहीं है. ऐसे लोगों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.

एम्स हर स्तर पर मरीजों को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है. यहां मरीजों और उनके परिजनों के ठहरने के लिए विश्राम सदन की सुविधाएं हैं, साथ ही मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए फ्री ई-शटल सेवाएं भी चल रही हैं. एम्स दिल्ली और एनसीआई झज्जर में मिलाकर 1500 बेड विश्राम सदनों में हैं, इनका चार्ज भी 20 रुपये रोजाना है और खाना भी मिलता है.

डॉ. श्रीनिवास ने आगे कहा कि यहां रेफरल मरीजों को वरीयता दी जाती है. अगर कोई सेंटर जहां संसाधनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है, वह मरीज को एम्स के लिए रैफर कर रहा है तो उसे पहले देखा जाता है. इन मरीजों को इंतजार नहीं करना पड़ेगा. यहां मरीज ओपीडी के अलावा इमरजेंसी में दिखा सकते हैं. अस्पताल में बेड से लेकर डॉक्टरों की उपस्थिति की जानकारी भी ऑनलाइन डैशबोर्ड पर उपलब्ध रहेगी.

एम्स में ऐसी-ऐसी बीमारियों के इलाज के लिए नए-नए रिसर्च और तकनीकों को उपलब्ध कराया जा रहा है, जो देश के अन्य अस्पतालों में भी नहीं हैं. यही वजह है कि यहां एम्स प्रशासन के मुताबिक, 1 अप्रैल से ऑनलाइन ऑन-कॉल डैशबोर्ड ही आधिकारिक माध्यम होगा. मैन्युअल प्रक्रिया लगभग खत्म हो जाएगी. इससे अस्पताल का कामकाज ज्यादा व्यवस्थित होगा और इसका सीधा फायदा मरीजों को होगा.
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1 day ago
