Last Updated:January 10, 2026, 17:56 IST
IPAC रेड मामले में ED ने ममता बनर्जी पर सबूत मिटाने का आरोप लगाकर सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 32 याचिका दायर की है. बंगाल सरकार ने भी जवाब में कैविएट दाखिल किया है. हाईकोर्ट में सुनवाई टलने के बाद अब ED ने मामले की CBI जांच की मांग की है.
I-PAC पर ईडी की छापेमारी के खिलाफ कोलकाता में प्रदर्शन मार्च निकालतीं पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (PTI Photo)नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में कोयला घोटाले की जांच अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच गई है. प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने कोलकाता स्थित I-PAC दफ्तर और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर हुई रेड के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. ED ने इसके लिए संविधान के आर्टिकल 32 का सहारा लिया है. यह कदम कानूनी रूप से बेहद गंभीर माना जा रहा है. एजेंसी ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ने खुद रेड वाली जगह पर घुसकर अहम सबूतों और दस्तावेजों को वहां से हटाया है. बंगाल की पुलिस पर भी जांच में बाधा डालने का आरोप लगा है. उधर ममता सरकार ने भी सतर्कता दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दाखिल की है. कोलकाता हाईकोर्ट में हंगामे के चलते सुनवाई टलने के बाद अब सबकी नजरें दिल्ली पर टिकी हैं. यह मामला अब एक बड़े संवैधानिक टकराव की ओर बढ़ गया है.
क्या है आर्टिकल 32 जिसके तहत ED सीधे सुप्रीम कोर्ट गई?
आर्टिकल 32 को भारतीय संविधान की आत्मा कहा जाता है. इसके तहत कोई भी नागरिक या संस्था मौलिक अधिकारों के हनन पर सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकती है. आमतौर पर जांच एजेंसियां हाईकोर्ट जाती हैं. लेकिन ED ने दावा किया है कि बंगाल में उसकी निष्पक्ष जांच करने की आजादी छीन ली गई है. एजेंसी का कहना है कि राज्य की मशीनरी ने कानून का उल्लंघन किया है. पुलिस ने ईडी अधिकारियों को उनकी शक्ति का उपयोग करने से रोका है. यह संवैधानिक अधिकारों के हनन का मामला बन गया है. इसलिए ED ने सीधे दिल्ली स्थित शीर्ष अदालत से न्याय की गुहार लगाई है.
ममता बनर्जी पर क्या हैं ED के वो संगीन आरोप?
ED ने अपनी 28 पन्नों की याचिका में कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं. एजेंसी का दावा है कि प्रतीक जैन के घर पर रेड के दौरान ममता बनर्जी वहां पहुंची थीं. आरोप है कि उन्होंने वहां से कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कागज अपने कब्जे में ले लिए. ED के अनुसार ये सबूत कोयला घोटाले की मनी ट्रेल को साबित करने के लिए बेहद जरूरी थे. एजेंसी ने ममता बनर्जी के इस कदम को जांच में सीधा दखल बताया है. मुख्यमंत्री का किसी रेड वाली लोकेशन पर जाना कानूनी रूप से विवाद का विषय बन गया है. बीजेपी ने भी इस पर सवाल उठाए हैं.
बंगाल सरकार का ‘कैविएट’ क्या है और यह क्यों लगाया गया?
ममता सरकार को इस बात का पूरा अंदाजा था कि ED सुप्रीम कोर्ट जाएगी. इसलिए राज्य सरकार ने पहले ही वहां ‘कैविएट‘ दाखिल कर दिया. कैविएट एक प्रकार का कानूनी सुरक्षा कवच होता है. इसका सीधा मतलब है कि सुप्रीम कोर्ट बंगाल सरकार का पक्ष सुने बिना कोई आदेश नहीं देगा. यह याचिका एकतरफा कार्रवाई को रोकने के लिए लगाई जाती है. बंगाल सरकार चाहती है कि एजेंसी के दावों पर कोई भी फैसला आने से पहले उनका पक्ष सुना जाए. यह कूटनीतिक और कानूनी लड़ाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है.
आई-पैक और कोयला घोटाले का आपस में क्या कनेक्शन है?
कोयला घोटाले की जांच के दौरान करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का पता चला है. जांच एजेंसी का दावा है कि घोटाले की बड़ी रकम एक विशेष कोल कंपनी को भेजी गई. यह कंपनी राजनीतिक सलाहकार फर्म I-PAC से जुड़ी बताई जा रही है. इसी लिंक को तलाशने के लिए ED ने प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की थी. बीजेपी ने सवाल उठाया है कि सरकारी दस्तावेज एक प्राइवेट एजेंसी के पास क्या कर रहे थे. क्या बंगाल के अफसर किसी प्राइवेट संस्था को रिपोर्ट कर रहे हैं? यह सवाल अब ममता सरकार के लिए गले की हड्डी बन गया है.
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंची यह कानूनी जंग?
ED सबसे पहले इस मामले को लेकर कोलकाता हाईकोर्ट गई थी. वहां एजेंसी ने पुलिस की भूमिका और मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप की शिकायत की थी. लेकिन शुक्रवार को कोर्ट में वकीलों के भारी हंगामे के कारण माहौल खराब हो गया. इस हंगामे की वजह से हाईकोर्ट ने सुनवाई 14 जनवरी तक के लिए टाल दी. ED का मानना है कि जांच में हो रही देरी से सबूत नष्ट हो सकते हैं. इसी कारण एजेंसी को तत्काल सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा. अब मामला राज्य बनाम केंद्र की बड़ी लड़ाई में तब्दील हो चुका है.
क्या बंगाल में अब CBI की होगी एंट्री और आगे क्या होगा?
ED ने अपनी याचिका में केवल बाधाओं की शिकायत नहीं की है. एजेंसी ने साफ तौर पर मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच अब CBI को सौंपी जाए. उनका तर्क है कि राज्य पुलिस और प्रशासन के रहते निष्पक्ष जांच संभव नहीं है. अगर सुप्रीम कोर्ट CBI जांच के आदेश देता है तो यह राज्य सरकार के लिए बड़ा झटका होगा. टीएमसी के सांसदों ने भी इस रेड के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन किया है. आने वाले दिनों में यह विवाद सड़क से लेकर संसद और कोर्ट तक और अधिक गरमाने वाला है.
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दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़...और पढ़ें
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
January 10, 2026, 17:54 IST

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