वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को देश का आम बजट पेश करने वाली हैं. इस बार के बजट में इनकम टैक्स को लेकर बड़े ऐलान का अनुमान है. बजट 2026-27 में आयकर नियमों को लेकर जारी सुगबुगाहट के बीच देश के इतिहास की सबसे बड़ी आयकर रेड की चर्चा भी ताजा हो गई. इस छापे में बरामद काला धन तब किसी राज्य के कुल बजट के बराबर था.
16 जुलाई 1981 का सुबह का समय… कानपुर शहर अभी नींद से जाग भी नहीं पाया था कि स्वरूप नगर इलाके में सरदार इंदर सिंह के आलीशान बंगले के बाहर दर्जनों वाहन आकर रुक गए. इनकम टैक्स विभाग की टीम ने एक साथ कई ठिकानों पर दबिश दी, जिसमें 90 से ज्यादा आयकर अधिकारी और 200 पुलिसकर्मी शामिल थे. यह कोई साधारण छापेमारी नहीं थी. यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी और सबसे लंबी इनकम टैक्स रेड थी, जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया. इस रेड ने न सिर्फ काले धन का पहाड़ उजागर किया, बल्कि कारोबारी जगत में इतना डर फैलाया कि सालों तक लोग टैक्स चोरी से कांपते रहे.
यह कहानी है सरदार इंदर सिंह की, जो उस समय उत्तर भारत के बड़े उद्योगपति थे. उन्होंने देश की पहली स्टील री-रोलिंग मिल स्थापित की थी और उत्तर भारत की सबसे बड़ी रेलवे वैगन फैक्ट्री चलाते थे. पूर्व राज्यसभा सांसद रहे इंदर सिंह का नाम कानपुर में सम्मान से लिया जाता था. महंगे फर्नीचर, बड़े-बड़े कमरे और ऐशो-आराम… उनके बंगले में लग्जरी की कोई कमी नहीं थी.
काले धन की मिली गुप्त सूचना
उधर इनकम टैक्स विभाग को गुप्त सूचना मिली कि उनके पास भारी मात्रा में काला धन और अनलिस्टेड संपत्ति है. डिप्टी डायरेक्टर (इंटेलिजेंस) अलक कुमार बतब्याल के नेतृत्व में यह ऑपरेशन शुरू हुआ, जो करीब 2 दिन और 3 रातों तक चलता रहा.
इस रेड की शुरुआत सुबह-सुबह हुई. टीम ने इंदर सिंह के स्वरूप नगर स्थित घर के अलावा उनकी फैक्ट्रीज और परिवार के अन्य ठिकानों पर एक साथ छापा मारा. कानपुर, दिल्ली और मसूरी में 15 बैंक लॉकर भी खुलवाए गए. टीम ने घर के हर कोने को छाना… अलमारी, तिजोरियां, फर्श के नीचे छिपे कमरे, छत और यहां तक कि दीवारों में बने गुप्त स्थान को खंगाला गया. पहले दिन ही कानपुर के घर से 92 लाख रुपये कैश बरामद हुए… उस समय के हिसाब से यह रकम करोड़ों में थी. साथ में सोने-चांदी, जूलरी और फिक्स्ड डिपॉजिट के दस्तावेज मिले.
750 तोला सोना हुआ बरामद
लेकिन असली चौंकाने वाली बरामदगी इंदर सिंह की पत्नी मोहिंदर कौर के आवास से हुई. वहां सोने की दो भारी ईंटें मिलीं… कुल मिलाकर 750 तोला सोना (लगभग 8.75 किलो) जब्त किया गया. इसमें 2 सोने की ईंटें, कीमती गहने (करीब 8 लाख रुपये के), 1.85 लाख रुपये मूल्य के 144 गिनी सिक्के और अन्य जेवर शामिल थे. यह सब गोल्ड (कंट्रोल) एक्ट, 1968 के उल्लंघन में आया, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में सोना रखना उस समय गैरकानूनी था.
कैश की बरामदगी इतनी ज्यादा थी कि उसे गिनने में ही 18 घंटे लग गए. एक अलग कमरे में 45 लोगों की टीम लगाई गई, जिसमें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारी भी शामिल थे. नोटों के ढेर इतने ऊंचे थे कि उन्हें मेज पर फैलाकर, मशीनों और हाथों से गिनना पड़ा. अधिकारी थककर चूर हो गए, आंखें लाल हो गईं, लेकिन रुकना नहीं था.
किसी राज्य के बजट जितनी रकम मिली
कुल कैश 1.60 करोड़ रुपये निकला. उस दौर में यह रकम किसी राज्य के सालाना बजट के बराबर थी. दिल्ली के लॉकर से 72,000 रुपये और फिक्स्ड डिपॉजिट के दस्तावेज मिले, जबकि अन्य जगहों से 30 लाख के सोने की ईंटें और जेवर बरामद हुए. कुल बरामदगी 1.6 करोड़ कैश, 750 तोला सोना और अन्य संपत्ति थी.
यह रेड तीन रातें और दो दिन तक चली, जो भारतीय इतिहास की पहली बड़ी इनकम टैक्स रेड बनी. टीम ने घर के हर कोने को खंगाला, दस्तावेज जब्त किए, बैंक अकाउंट्स फ्रीज किए और फैक्ट्रीज की जांच की. पूरे कानपुर में हड़कंप मच गया. कारोबारी जगत में अफवाहें फैलीं कि अगर इतने बड़े आदमी के साथ ऐसा हो सकता है, तो छोटे कारोबारियों का क्या हाल होगा? कई लोगों ने खुद ही टैक्स रिटर्न सुधारने शुरू कर दिए.
इस रेड का असर सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं रहा. पूरे देश में टैक्स चोरी के खिलाफ एक मिसाल बन गई.सरदार इंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया और मामला कोर्ट में चला. हालांकि, बाद में कई कानूनी लड़ाइयों के बाद कुछ राहत मिली, लेकिन उनकी छवि पर दाग लगा रहा. इस घटना ने ब्लैक मनी के खिलाफ सरकारी कार्रवाई को मजबूती दी.
इसी छापे पर बनी अजय देवगन की फिल्म रेड
इस रेड की कहानी इतनी चर्चित हुई कि बॉलीवुड ने इस पर फिल्म बना दिया. अजय देवगन की 2018 की फिल्म ‘रेड’ इसी घटना से प्रेरित है. फिल्म में आईटी अधिकारी बने अजय देवगन के किरदार ने एक बड़े कारोबारी के घर पर रेड मारी थी. इस फिल्म की कहानी वास्तविकता से काफी मिलती-जुलती है. आज भी यह रेड भारतीय टैक्स इतिहास की सबसे बड़ी मिसाल है.
1981 में 1.60 करोड़ कैश और 750 तोला सोना जब्त होना उस समय का सबसे बड़ा खुलासा था. आज के दौर में जहां 300-400 करोड़ की रेड्स आम हो गई हैं, लेकिन उस समय की यह घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया. कारोबारियों में डर का माहौल बना… कोई भी नहीं जानता था कि अगली रेड किसके घर पर होगी.
यह कहानी सिर्फ काले धन की नहीं, बल्कि सरकारी जांच एजेंसियों की ताकत और आम आदमी की आस्था की भी है. जब टैक्स अधिकारी रात-दिन मेहनत कर ऐसे छिपे खजाने उजागर करते हैं, तो समाज में पारदर्शिता बढ़ती है. सरदार इंदर सिंह की यह रेड आज भी याद की जाती है – एक सबक के रूप में कि धन कमाना अच्छा है, लेकिन उसे छिपाना महंगा पड़ता है.

8 hours ago
