Iran Protest: ईरान में पिछले डेढ़ दशक में कई बड़े जन आंदोलनों का सामना किया गया है. इनमें 2009 का ग्रीन मूवमेंट, 2019 में पेट्रोल कीमतों के खिलाफ विरोध, 2022 का महिला-नेतृत्व वाला आंदोलन और हाल में फिर से हो रहे प्रदर्शन शामिल हैं. हर आंदोलन में लाखों लोग सड़कों पर उतरे, सरकार विरोधी नारे लगे. शुरुआती दिनों में ऐसा लगा कि सरकार पर दबाव बढ़ रहा है, लेकिन हर बार आंदोलन का अंत एक ही तरीके से हुआ. आइए पूरी स्थिति को समझते हैं...
IRGC कैसे कर देती है जन आंदोलनों को खत्म?
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान में किसी बड़े आंदोलन की दिशा तब बदल जाती है जब इसकी जिम्मेदारी पुलिस और आंतरिक मंत्रालय से हटकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के हाथ में चली जाती है. बता दें, IRGC ईरान की सबसे शक्तिशाली सुरक्षा और सैन्य संस्था है जो सीधे देश के सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करती है. IRGC चुनी हुई सरकार या संसद के प्रति जवाबदेह नहीं होती जिससे यह राजनीतिक दबाव या जनमत की चिंता किए बिना कार्रवाई कर सकती है.
2009 के ग्रीन मूवमेंट के दौरान राष्ट्रपति चुनाव में धांधली के आरोपों के चलते बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए. शुरुआत में आंदोलन का दायरा तेजी से बढ़ा लेकिन IRGC ने जल्द ही इसके नेतृत्व और संचार नेटवर्क को निशाना बनाया. कई प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिया गया, मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण बढ़ाया गया और आंदोलन धीरे-धीरे बिखर गया.
2019 में पेट्रोल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी के बाद देशभर में हिंसक विरोध भड़क उठे. इस बार सुरक्षा बलों ने सख्त रणनीति अपनाई. इंटरनेट सेवाएं लगभग पूरी तरह बंद कर दी गईं, जिससे प्रदर्शनकारियों के बीच समन्वय टूट गया. IRGC और इसके सहयोगी बलों ने व्यापक स्तर पर गिरफ्तारियां कीं और कुछ ही दिनों में आंदोलन को खत्म कर दिया.
2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद शुरू हुआ महिला-नेतृत्व वाला आंदोलन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा. इसमें महिलाओं की भूमिका और सामाजिक स्वतंत्रताओं की मांग इसे पहले के आंदोलनों से अलग बनाती है. हालांकि, ईरानी प्रशासन ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए IRGC को खुली छूट दी. बल प्रयोग, निगरानी और कानूनी कार्रवाइयों के जरिए इस आंदोलन को कुचला गया.
जानिए क्या है बसीज मिलिशिया
IRGC की ताकत केवल सैन्य बल तक सीमित नहीं है. इसके पास एक मजबूत खुफिया नेटवर्क, साइबर निगरानी और जमीनी स्तर पर काम करने वाली बसीज (Basij) मिलिशिया है. बसीज मिलिशिया प्रदर्शनकारियों की पहचान, उनकी गतिविधियों पर नजर और आंदोलन के भीतर मौजूद नेतृत्व को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. बसीज ईरान का एक स्वयंसेवी अर्धसैनिक बल है जो इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अधीन कार्य करता है. इसकी स्थापना 1979 की ईरानी क्रांति के बाद अयातुल्ला खुमैनी ने की थी. इसका मुख्य उद्देश्य नैतिक पुलिसिंग करना है. बसीज को प्रदर्शनों के दमन और शासन की नीतियों को जमीनी स्तर पर लागू करने में उपयोग किया जाता है.
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बसीज में छात्र, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोग शामिल हैं, जिससे यह समाज के लगभग हर हिस्से में व्यापक रूप से फैला हुआ एक प्रभावशाली सरकारी तंत्र बन गया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ईरान में विरोध प्रदर्शन अक्सर जन समर्थन के बावजूद इसलिए सफल नहीं होते क्योंकि वे एक बहुत ही संगठित, केंद्रीकृत और वैचारिक रूप से एकजुट सुरक्षा तंत्र का सामना करते हैं. जब तक IRGC भीतर से कमजोर नहीं होती या इसके भीतर मतभेद नहीं उभरते तब तक ईरान में जन आंदोलनों का सफल होना बेहद मुश्किल है. इसी कारण ईरान में उठी आवाजें अक्सर बैरकों में लिए गए फैसलों के आगे दम तोड़ देती हैं.

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