Last Updated:March 01, 2026, 11:08 IST
Holika Dahan 2026: रंगों के पर्व होली से एक दिन पहले मनाया जाने वाला होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. भारत में कुछ जगहों पर 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा तो कुछ जगहों पर 3 मार्च को. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सास-बहु समेत इन 5 लोगों को होलिका दहन की अग्नि नहीं देखनी चाहिए, यह अशुभ माना जाता है.
Holika Dahan 2026: होली का पर्व भारतीय संस्कृति में आस्था, उल्लास और परंपराओं का प्रतीक है और यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश भी देता है. लेकिन इस बार चंद्र ग्रहण की वजह से भारत में कुछ जगहों पर कल यानी 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा तो कुछ जगहों पर 3 मार्च को ग्रहण के बाद. देशभर में श्रद्धालु विधि-विधान से अग्नि प्रज्वलित कर पूजा-अर्चना करते हैं. हालांकि कई क्षेत्रों में यह लोकमान्यता प्रचलित है कि गर्भवती महिलाओं, नई दुल्हन, सास-बहू की जोड़ी समेत 5 लोगों को होलिका दहन की अग्नि नहीं देखनी चाहिए. बताया जाता है कि अगर ये लोग होलिका दहन की अग्नि को देखते हैं तो यह परिवार के लिए अच्छा नहीं माना जाता. आइए जानते हैं कौन से 5 लोग होलिका दहन की अग्नि ना देखें.
नई दुल्हन ना देखें होलिका दहन - विवाह के बाद दुल्हन को सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. अग्नि में किसी स्त्री (होलिका) के दहन की घटना का प्रतीकात्मक दृश्य उसके लिए अशुभ माना जाता है. लोक मान्यता के अनुसार, होलिका दहन के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है. नई दुल्हन को संवेदनशील और कोमल स्थिति में माना जाता है, इसलिए उसे ऐसी तीव्र ऊर्जा से दूर रखने की परंपरा है. कुछ परिवारों का विश्वास है कि नवविवाहिता यदि जलती हुई होली देखे तो वैवाहिक जीवन में बाधाएं आ सकती हैं. इसलिए उसकी मंगलकामना के लिए उसे घर के भीतर रखा जाता है.
गर्भवती महिलाएं ना देखें होलिका दहन - लोकविश्वास के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को होलिका दहन से दूर रहना चाहिए और मानसिक पूजन करना चाहिए. होलिका दहन के दौरान उठने वाला धुआं, तेज गर्मी और भीड़भाड़ उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है. पारंपरिक मान्यता यह भी कहती है कि इस समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है, इसलिए कोमल अवस्था में मौजूद महिलाओं को इससे दूर रखना शुभ माना जाता है.
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सास-बहू की जोड़ी ना देखें होलिका दहन - कुछ समुदायों में सास और बहू को एक साथ होलिका पूजन और जलती हुई होलिका देखने से रोका जाता है. दोनों को होलिका दहन के स्थल पर एक साथ होना अशुभ माना जाता है. मान्यता है कि यह परंपरा परिवार में सामंजस्य बनाए रखने और संभावित कलह से बचने के प्रतीकात्मक उपाय के रूप में अपनाई गई. हालांकि इसका कोई शास्त्रीय आधार स्पष्ट रूप से नहीं मिलता.
इकलौती संतान ना देखें होलिका दहन - जिनके घर में केवल एक ही संतान है, उनको होलिका दहन की अग्नि देखने से बचना चाहिए, यह अशुभ माना जाता है. इकलौती संतान को परिवार की वंश परंपरा का आधार माना जाता है. मान्यता है कि होलिका दहन की अग्नि के सामने उसे ले जाना जोखिमपूर्ण हो सकता है. इसलिए उसकी सुरक्षा और दीर्घायु की कामना के लिए उसे घर के भीतर ही रखा जाता है. घर पर किसी बड़े बुजुर्ग को होलिका दहन की परंपरा निभानी चाहिए.
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First Published :
March 01, 2026, 11:08 IST

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