DNA: 2026 के दूसरे महायुद्ध की तैयारी? 'ऑपरेशन मादुरो' खत्म, 'ऑपरेशन खलीफा' शुरू!

1 day ago

US Iran Tension: ऐसा लग रहा है जैसे ट्रंप 2025 का बदला 2026 में ले रहे हैं. पिछले साल वो सीजफायर के सरपंच बनकर घूम रहे थे. लेकिन नोबल शांति पुरस्कार नहीं मिलने की निराशा ने शायद उन्हें इस साल हमलावर बना दिया है. उनका पहला शिकार बने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो. कहा जा रहा है कि अब बारी खलीफा की है. वेनेज़ुएला में सबसे तेज़ तख्तापलट के बाद अब अमेरिका के अगले दुश्मन का जिक्र बार-बार हो रहा है. सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या मादुरो के बाद अब अगली बारी ईरान के खलीफा खामेनेई की है? क्या मादुरो के बाद अब खामेनेई का तख्तापलट होगा? क्या खामेनेई को भी अमेरिका मादुरो की तरह ही उठाएगा? क्या इस बार खलीफा का सत्ता से हटना तय है?

खलीफा का सत्ता से हटना तय!

ट्रंप ने ईरान के प्रदर्शनकारियों के पक्ष में खुलकर पोस्ट किया तो ईरान ने भी पलटवार किया. दोनों देशों के बीच इसी ज़ुबानी जंग की वजह से वास्तविक जंग की आशंका जताई जा रही है. लेकिन क्या मादुरो की तरह खामेनेई को भी सत्ता से हटाना आसान साबित होगा या फिर अमेरिका संभलकर क़दम बढ़ाएगा? ईरान में खलीफा का तख्तापलट करने के लिए ट्रंप सीधा हमला करेंगे या ईरान की जनता से ही तख्तापलट कराएंगे. इन सवालों के विश्लेषण से पहले आपको आज के दिन वेनेजुएला पर हुए हमले का ईरान कनेक्शन भी जानना चाहिए.

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आज यानी 3 जनवरी को अमेरिका ने वेनेज़ुएला पर हमला किया. आज से ठीक 6 साल पहले यानी 3 जनवरी 2020 को अमेरिका ने खामेनेई के क़रीबी जनरल क़ासिम सुलेमानी को मार गिराया था. अमेरिकी ड्रोन हमले में क़ासिम सुलेमानी मारा गया था. ईरान के लिए क़ासिम सुलेमानी हीरो था लेकिन अमेरिका के लिए आतंकी. उसकी मौत के बाद भी दुनिया पर युद्ध का ख़तरा मंडराने लगा था.

यानी 3 जनवरी का दिन ईरान से लेकर वेनेज़ुएला तक अमेरिका के दुश्मनों के लिए भारी है. अब मादुरो के तख्तापलट के बीच एक बार फिर अमेरिका और ईरान आमने-सामने हैं. ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई ने अमेरिका को जवाब देते हुए कहा है कि उनका देश दुश्मन के आगे नहीं झुकेगा.

'ईरान झुकेगा नहीं'

खामेनेई का ये जवाब ट्रंप की धमकी के बाद आया है. ट्रंप ने कल ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाता है तो अमेरिका उन्हें बचाने के लिए आएगा. आज खामेनेई ने अमेरिका को जवाब देते हुए साफ़ कर दिया कि वो ट्रंप की धमकी के आगे झुकने वाले नहीं हैं.

खलीफा पर संभावित अमेरिकी हमले की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है ईरान में लोगों का विद्रोह. वो विद्रोह जो काबू में आने की बजाय लगातार फैलता जा रहा है. ईरान के 31 में से 22 प्रांतों में ये प्रदर्शन हो रहे हैं. 100 से ज़्यादा जगहों पर हिंसा की चिंगारी भड़क चुकी है. महंगाई और आर्थिक संकट के ख़िलाफ़ शुरू प्रदर्शन अब खामेनेई की इस्लामिक सत्ता के ख़िलाफ़ बग़ावत में बदल चुका है. लगातार सातवें दिन खलीफ़ा के ख़िलाफ़ लोग सड़कों पर उतरकर अपना विरोध जता रहे हैं. लोग चुन-चुनकर इस्लामिक सत्ता के प्रतीकों को निशाना बना रहे हैं.

कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प भी हुई है जिसमें कम-से-कम 10 लोगों के मारे जाने की ख़बर है. सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों को किसी भी तरह की छूट नहीं दे रहे हैं. दूसरी तरफ़ प्रदर्शनकारी खामेनेई को हटाकर राजशाही बहाल करने की मांग कर रहे हैं. आज खामेनेई ने इस प्रदर्शन पर अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने कड़ा रुख़ अपनाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों से बातचीत का कोई फायदा नहीं है.

कंफ्यूजन का फायदा उठाने की तैयारी!

सुना आपने, ट्रंप जिन लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी बता रहे हैं, वो खामेनेई की नज़र में दंगाई हैं. खामेनेई के मुताबिक़ अमेरिका और इज़रायल के इशारे पर उनके ख़िलाफ़ प्रदर्शन हो रहे हैं. उन्होंने ये भी कहा कि प्रदर्शन की आड़ में कुछ लोग ईरान और इस्लाम के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे हैं. यानी उन्होंने इस प्रदर्शन को इस्लाम विरोधी बताकर तोड़ने की कोशिश की है.

खामेनेई का ये कड़ा रुख़ बताता है कि वो इस प्रदर्शन के आगे झुकने वाले नहीं हैं. वो इसके लिए साफ़ तौर पर अमेरिका और इज़रायल को ज़िम्मेदार बता रहे हैं. इसका अगला क़दम ये होगा कि खामेनेई बंदूक़ के दम पर इस प्रदर्शन को ख़त्म करने की कोशिश करेंगे.

लेकिन खामेनेई का बयान ईरान की सरकार के भीतर विरोधाभास को भी दिखाता है. खामेनेई प्रदर्शनकारियों को अमेरिका और इज़रायल का एजेंट बता रहे हैं, उन्हें दंगाई बता रहे हैं. उधर ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने कल ही प्रदर्शन के लिए सरकार की ग़लती बताई थी. उनके मुताबिक़ मौजूदा हालात के लिए अमेरिका नहीं बल्कि ईरान की सरकार जिम्मेदार है.

ईरान के भीतर फैले इसी कन्फ्यूज़न का अमेरिका फायदा उठाना चाहता है. ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी ने ईरान के प्रदर्शनकारियों का साथ देने के लिए ट्रंप का धन्यवाद किया है.

रज़ा पहलवी ने कहा है कि ट्रंप की चेतावनी ईरानी लोगों को ताकत और उम्मीद देती है और ये दिखाती है कि अमेरिका का राष्ट्रपति उनके साथ मजबूती से खड़ा है. रज़ा के मुताबिक़ ट्रंप के मज़बूत नेतृत्व और समर्थन से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ा है.

 ट्रंप की पहली कोशिश ईरान में फैले असंतोष के ज़रिए खामेनेई की सत्ता उखाड़ने की होगी. सरकार के कड़े रुख़ के बावजूद जिस तरह से लोगों का ग़ुस्सा फैल रहा है, उससे ट्रंप की उम्मीद कायम है. अगर खामेनेई जल्द इस प्रदर्शन को काबू नहीं कर पाए तो उनके लिए मुसीबत बढ़ेगी. जहां तक खामेनेई के ख़िलाफ़ मादुरो जैसे ऑपरेशन की बात है तो उसके लिए आपको वेनेज़ुएला और ईरान के बीच का अंतर समझना चाहिए.

सैन्य ताकत के मामले में वेनेज़ुएला कमज़ोर देश है जबकि ईरान मज़बूत है. दूरी के हिसाब से देखें तो वेनेज़ुएला अमेरिका के पास है, सेना भेजना आसान है जबकि ईरान, अमेरिका से 10,000 किमी से ज़्यादा दूर है. वेनेज़ुएला का कोई ऐसा सहयोगी देश नहीं है जो उसके साथ लड़ने के लिए तैयार हो जबकि ईरान के पास रूस और चीन जैसे सहयोगी देश हैं. वेनेज़ुएला के पास परमाणु बम नहीं है जबकि ईरान परमाणु बम बनाने के बहुत क़रीब है. वेनेज़ुएला के पास लड़ाई का अनुभव नहीं है जबकि ईरान पिछले 40 साल में कई युद्ध लड़ चुका है.

वेनेज़ुएला और ईरान के बीच इस अंतर को देखते हुए ट्रंप ईरान में अपनी डेल्टा फोर्स भेजने से परहेज करेंगे. ईरान ने अपने प्रदर्शनकारियों से बहुत ज्यादा सख्ती की तो अमेरिका को अपने वादे के मुताबिक़ युद्ध के लिए उतरना होगा. इससे ईरान के खिलाफ अमेरिका के युद्ध का दायरा बढ़ सकता है. कई मुस्लिम देशों के साथ-साथ रूस और चीन जैसे देश अमेरिका के खिलाफ ईरान के साथ उतर सकते हैं.

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