Last Updated:January 04, 2026, 05:01 IST
Bageshwar : देश की सेवा में तीन दशक से अधिक समय बिताने वाले कपकोट निवासी सेवानिवृत्त सैनिक कल्याण राम को साइबर ठगों ने एक फोन कॉल के जरिए आतंकवादी करार देकर डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसा लिया. डर और अपमान के बीच उनकी इज्जत और जिंदगी खतरे में पड़ गई, लेकिन समय रहते पुलिस की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया.
60 की उम्र में ‘आतंकवादी’ ठहराया गया फौजी, वक्त रहते बची इज़्ज़त और ज़िंदगी: कपकोट में डिजिटल जाल से रिटायर्ड सैनिक की रेस्क्यू कहानी।।बागेश्वर: तीन दशक से अधिक समय तक देश की सीमाओं की रक्षा करने वाला एक सेवानिवृत्त सैनिक जब अपने ही घर में साइबर ठगों के डर के जाल में फंस गया, तो उसकी इज्जत और जिंदगी दोनों खतरे में पड़ गईं. कपकोट क्षेत्र में सामने आया यह मामला न केवल साइबर अपराध की गंभीरता दिखाता है, बल्कि पुलिस की तत्परता की मिसाल भी पेश करता है.
फोन कॉल से शुरू हुआ डर का खेल
यह मामला कपकोट क्षेत्र के रहने वाले 62 वर्षीय सेवानिवृत्त सैनिक कल्याण राम से जुड़ा है. 2 जनवरी की सुबह उनके पैतृक घर पर एक अज्ञात कॉल आई. फोन करने वाले ने खुद को जम्मू कश्मीर एटीएस का अधिकारी बताया और दावा किया कि कल्याण राम का बैंक खाता पुलवामा हमले से जुड़े आतंकियों की फंडिंग में इस्तेमाल हुआ है. यह सुनते ही वह सकते में आ गए.
आतंकवाद का नाम लेकर दी गिरफ्तारी की धमकी
कुछ ही मिनटों में ठगों ने उन्हें आतंकियों का मददगार करार देते हुए गिरफ्तारी और देशद्रोह के मुकदमे की धमकी दे दी. एक ईमानदार और देशभक्त फौजी के लिए यह आरोप असहनीय था. डर और अपमान ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया और वे ठगों की बातों में उलझते चले गए.
डिजिटल अरेस्ट में बनाया बंधक
इसके बाद शुरू हुआ तथाकथित डिजिटल अरेस्ट. साइबर ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए कल्याण राम को एक कमरे में बंद रहने का आदेश दिया. करीब पांच घंटे तक वह मानसिक और भावनात्मक रूप से बंधक बने रहे. जेल, बदनामी और देशद्रोह जैसे शब्दों का डर उनके दिल और दिमाग पर हावी हो गया.
बैंक जानकारी लेकर शुरू की ठगी की कोशिश
डर के माहौल में ठगों ने उनसे बैंक खातों की जानकारी, आधार विवरण और अन्य गोपनीय सूचनाएं हासिल कर लीं. इतना ही नहीं, करीब 2 लाख रुपये ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई. यह वही रकम थी, जो उन्होंने अपने परिवार और बुढ़ापे के लिए जोड़कर रखी थी.
पड़ोसियों की सतर्कता बनी जीवनरक्षक
इसी दौरान पड़ोसियों को कुछ असामान्य नजर आया. कल्याण राम लगातार फोन पर थे, दरवाजा नहीं खोल रहे थे और किसी से बातचीत नहीं कर रहे थे. शक होते ही उन्होंने तुरंत कपकोट थाना पुलिस को सूचना दी. यही सतर्कता आगे चलकर उनकी जिंदगी और इज्जत दोनों बचाने में अहम साबित हुई.
पुलिस ने संभाला मोर्चा
कपकोट थानाध्यक्ष प्रताप सिंह नगरकोटी ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस को मामला बेहद संवेदनशील लगा. पीड़ित पहले से ही गहरे डर में था, इसलिए बेहद सावधानी से कार्रवाई की गई. दो टीमें बनाई गईं, एक सिविल ड्रेस में और दूसरी वर्दी में, ताकि पीड़ित को और भय न हो.
कमरे का दरवाजा खुलवाकर रोकी ठगी
लगातार प्रयासों के बाद पुलिस ने कमरे का दरवाजा खुलवाया. अंदर कल्याण राम बदहवास और डरे हुए मिले. उसी समय चल रहे बैंक ट्रांजैक्शन को तुरंत रुकवाया गया, जिससे लगभग 2 लाख रुपये की ठगी टल गई. यह पुलिस की तत्परता का बड़ा उदाहरण था.
सच सामने आते ही फूट पड़े आंसू
जब पुलिस ने उन्हें बताया कि यह आतंकी मामला नहीं बल्कि साइबर ठगी है, तो वह भावुक हो गए. होश में आते ही वह फूट फूट कर रो पड़े. उन्होंने कहा कि पूरी जिंदगी ईमानदारी और देशभक्ति से सेवा करने के बाद आतंकियों का मददगार कहा जाना उनके लिए सबसे बड़ा अपमान था.
पुलिस और प्रशासन की अपील
एसपी चन्द्रशेखर घोडके ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि साइबर अपराधी अब आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे शब्दों को डर के हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने साफ किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर न तो किसी को आतंकवादी घोषित करती है और न ही पैसों की मांग करती है. उन्होंने जनता से अपील की कि ऐसी किसी भी कॉल पर घबराएं नहीं और तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने से संपर्क करें.
Location :
Bageshwar,Uttarakhand
First Published :
January 04, 2026, 05:01 IST
60 की उम्र में ‘आतंकवादी’ ठहराया गया फौजी, वक्त रहते बची इज़्ज़त और ज़िंदगी

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