170 साल बाद दिवालिया हो गई ईस्‍ट इंडिया कंपनी, 56 देशों पर राज करने वाली कंपनी आज किसकी है कर्जदार

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170 साल बाद दिवालिया हो गई ईस्‍ट इंडिया कंपनी, कितने रुपये का लदा है कर्ज

Last Updated:February 27, 2026, 17:28 IST

ईस्‍ट इंडिया कंपनी को तो आप जानते ही होंगे, वही जिसने भारत सहित दुनिया के तमाम देशों पर राज किया था. अब इस कंपनी का नामोनिशान खत्‍म होने की कगार पर है. साल 2010 में एक भारतीय-ब्रिटिश ने कंपनी का टाइटल खरीदकर रिटेल सामान बेचना शुरू किया था. अब इस कंपनी पर बड़ा बकाया है, जिसकी वजह से कंपनी दिवालिया हो चुकी है और इसका सारा कारोबार भी बंद हो चुका है.

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ईस्‍ट इंडिया कंपनी दिवालिया होकर बंद होने की कगार पर है.

नई दिल्‍ली. एक समय दुनिया के 56 देशों पर राज करने वाली ईस्‍ट इंडिया कंपनी का आखिरी समय आ गया है. भारत सहित दुनियाभर के कई देशों से खरबों डॉलर लूटने वाली यह कंपनी आज खुद कर्ज तले दबी है और दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गई है. ब्रिटेन की सबसे शक्तिशाली व्‍यापारिक कंपनी अब बंद हो चुकी है और लंदन में एक लग्‍जरी रिटेलर के रूप में उसका आखिरी समय चल रहा है. वैसे तो असली ईस्‍ट इंडिया कंपनी करीब 152 साल पहले ही बंद हो चुकी थी, लेकिन साल 2010 में एक ब्रिटिश भारतीय ने इसका नाम टाइटल खरीदकर दोबारा कारोबार शुरू किया था. अब यह कंपनी दिवालिया हो चुकी है और उसके सारे प्रोजेक्‍ट भी खत्‍म हो चुके हैं.

इंडिया टुडे के मुताबिक, साल 1857 के भारतीय विद्रोह, जिसे सिपाही विद्रोह भी कहा जाता है, के बाद भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन ब्रिटिश सरकार ने अपने हाथ में ले लिया था. साल 1858 में ब्रिटिश क्राउन ने इसका नियंत्रण संभाला, जिससे भारत में सीधे ब्रिटिश राज की शुरुआत हुई. ईस्ट इंडिया कंपनी की विरासत को आमतौर पर नकारात्मक रूप में देखा जाता है, क्योंकि इसने भारत और एशिया के अन्य हिस्सों में बड़े पैमाने पर शोषण किया. इस कंपनी ने वैश्विक व्यापार को बदल दिया, लेकिन भारतीयों के लिए भारी पीड़ा भी लाई, जिसमें हिंसा और बंगाल का भयानक अकाल शामिल था, जिसमें 3 करोड़ लोगों की मौत हो गई थी.

किसने खरीदा था कंपनी को
जब भारतीय उद्यमी संजीव मेहता ने साल 2010 में ईस्ट इंडिया कंपनी के नाम के अधिकार खरीदे, तो इसे उपनिवेशितों की बदला लेने की तरह देखा गया. जिस कंपनी ने कभी भारत पर राज किया था, अब उस पर एक भारतीय का राज होना, यह खबर दुनियाभर की सुर्खियों में छा गई थी. हालांकि, कंपनी का आधुनिक संस्करण अब दिवालिया हो गया है.

कंपनी पर कितने रुपये बकाया
ब्रिटिश अखबार के मुताबिक, द ईस्ट इंडिया कंपनी लिमिटेड ने अक्टूबर 2025 में लिक्विडेटर्स नियुक्त किए थे. कंपनी पर अपनी पैरेंट ग्रुप, जो ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में रजिस्टर्ड है, के 6.3 करोड़ रुपये (600,000 पाउंड) से ज्यादा, टैक्स के 2.03 करोड़ रुपये (193,789 पाउंड) और कर्मचारियों के 1.71 करोड़ रुपये (163,105 पाउंड) बकाया थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि मालिक संजीव मेहता से जुड़े कई अन्य कंपनियां, जिनके नाम में ईस्ट इंडिया है, भी बंद कर दी गई हैं. कंपनी की वेबसाइट बंद है. लंदन के मेफेयर में 97 न्यू बॉन्ड स्ट्रीट पर उसकी दुकान खाली है और एजेंट्स के जरिये किराय पर दी जा रही है.

कौन हैं संजीव मेहता
संजीव मेहता ने साल 2000 के दशक की शुरुआत में ईस्ट इंडिया कंपनी का नाम हासिल करने की प्रक्रिया शुरू की थी. साल 2010 में उन्होंने मेफेयर में 2,000 वर्ग फुट का एक लग्जरी स्टोर खोला. यहां उच्च गुणवत्ता वाली चाय, चॉकलेट, मिठाई, मसाले और अन्य सामान बेचे जाते थे, जो फोर्टनम एंड मेसन जैसी प्रसिद्ध दुकानों के समान थे. हालांकि, साल 1800 के शुरुआती दौर में, जब यह कंपनी अपने चरम पर थी. तब उसके पास लगभग 2,50,000 सैनिकों की निजी सेना थी, जो उस समय ब्रिटिश सेना से दोगुनी थी और उसने भारत के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर रखा था. इस कंपनी ने मसाले, कपास, रेशम, चाय, नील और कई अन्य चीजों के वैश्विक व्यापार को बढ़ाया.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि...और पढ़ें

Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

February 27, 2026, 17:28 IST

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