Jammu Cricket Palestine Flag Controversy: जम्मू में आयोजित जम्मू कश्मीर चैंपियंस लीग इन दिनों खेल से ज्यादा एक विवाद को लेकर चर्चा में है. लीग के एक मैच के दौरान क्रिकेटर फरकान भट द्वारा अपने हेलमेट पर ‘फिलिस्तीन का झंडा’ लगाए जाने की तस्वीरें सामने आने के बाद यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इस घटना के बाद पूरे प्रकरण को संवेदनशील मानते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जांच तेज कर दी है.
इस विवाद ने खेल के मैदान से निकलकर कानून-व्यवस्था और नियमों के दायरे में दस्तक दे दी है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या मैच के दौरान इस तरह का प्रतीक इस्तेमाल करना तय दिशानिर्देशों का उल्लंघन था और इसके पीछे किसी तरह की पूर्व अनुमति ली गई थी या नहीं.
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक जम्मू में आयोजित जम्मू कश्मीर चैंपियंस लीग के एक मैच के दौरान क्रिकेटर फरकान भट के हेलमेट पर ‘फिलिस्तीन का झंडा’ देखा गया. मैच के बाद इस प्रतीक को लेकर सवाल उठने लगे, जिसके बाद यह मामला पुलिस तक पहुंचा. सूत्रों का कहना है कि यह घटना लीग के दौरान सामने आई. इेसके बाद स्थानीय स्तर पर इसकी चर्चा शुरू हुई और देखते ही देखते मामला जांच एजेंसियों के संज्ञान में आ गया.
पुलिस की जांच में क्या-क्या शामिल?
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए क्रिकेटर फरकान भट को पूछताछ के लिए तलब किया है. पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि मैच के दौरान इस तरह का प्रतीक इस्तेमाल करने के पीछे क्या मंशा थी.
इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि:
क्या इसके लिए लीग आयोजकों से अनुमति ली गई थी. क्या यह लीग के नियमों और आचार संहिता के अनुरूप था. क्या इस घटना से किसी तरह की कानून-व्यवस्था से जुड़ी स्थिति बन सकती थी.आयोजकों से भी पूछताछ, नियमों की हो रही समीक्षा
पुलिस ने जम्मू कश्मीर चैंपियंस लीग के आयोजक ज़ाहिद भट से भी पूछताछ शुरू कर दी है. जांच एजेंसियां यह स्पष्ट करना चाहती हैं कि लीग के आयोजन के दौरान सभी नियमों और दिशानिर्देशों का पालन किया गया या नहीं. सूत्रों के अनुसार आयोजकों से यह भी पूछा जा रहा है कि खिलाड़ियों के यूनिफॉर्म, हेलमेट और अन्य उपकरणों को लेकर कोई स्पष्ट गाइडलाइन थी या नहीं.
क्यों माना जा रहा है मामला संवेदनशील?
पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह मामला संवेदनशील प्रकृति का है, इसलिए हर पहलू से जांच की जा रही है. खेल के मंच पर किसी भी तरह के प्रतीक के इस्तेमाल को लेकर नियमों की स्पष्टता और उसके संभावित प्रभावों को ध्यान में रखा जा रहा है. फिलहाल जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी.
पुलिस की जांच में क्या-क्या बिंदु शामिल हैं?
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने क्रिकेटर फरकान भट को पूछताछ के लिए तलब किया है. उनसे यह जानने की कोशिश की जा रही है कि मैच के दौरान इस तरह का प्रतीक इस्तेमाल करने के पीछे उनकी क्या मंशा थी.
पुलिस इन सवालों के जवाब तलाश रही है:
क्या हेलमेट पर प्रतीक लगाने के लिए आयोजकों से अनुमति ली गई थी? क्या यह लीग के नियमों और आचार संहिता के अनुरूप था? क्या इस घटना से किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति बन सकती थी?आयोजक भी रडार पर, जाहिद भट से पूछताछ
वहीं जम्मू कश्मीर चैंपियंस लीग के आयोजक जाहिद भट से भी पुलिस पूछताछ कर रही है. जांच एजेंसियां यह स्पष्ट करना चाहती हैं कि लीग के दौरान नियमों और दिशानिर्देशों का पालन किया गया या नहीं, और क्या इस तरह की गतिविधि से किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी. पुलिस सूत्रों का कहना है कि मामला संवेदनशील होने के कारण हर पहलू से जांच की जा रही है. फिलहाल पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी.
डोमाना थाने में पूछताछ, जांच का दायरा बढ़ा
सूत्रों के अनुसार, ‘फिलिस्तीन झंडा’ विवाद को लेकर फरकान भट से डोमाना पुलिस स्टेशन में पूछताछ जारी है. पुलिस यह भी देख रही है कि यह घटना किसी व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का मामला है या इसके व्यापक प्रभाव हो सकते हैं.
JKCA ने झाड़ा पल्ला
इस पूरे विवाद पर जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) ने भी अपना पक्ष रखा है. JKCA ने News18 को बताया कि इस टूर्नामेंट से उनका कोई लेना-देना नहीं है.
JKCA के मुताबिक:
जम्मू कश्मीर चैंपियंस लीग, JKCA से संबद्ध नहीं है. फरकान भट JKCA से जुड़े खिलाड़ी नहीं हैं. ऐसे में JKCA द्वारा किसी तरह की कार्रवाई का सवाल ही नहीं उठता. राजनीतिक बयान से बढ़ी सियासी गर्मी.इस विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं. व्यापारी नेता प्रवीण खंडेलवाल ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है.
प्रवीण खंडेलवाल ने कहा,
भारत में रहना है तो भारत का झंडा ही लगाना होगा. जिस किसी ने भी फिलिस्तीन का झंडा लगाया है, तो माना जाएगा उनका भारत से प्रेम नहीं है. जिनको भारत से प्रेम नहीं है, भारत से चला जाए.
इस बयान के बाद मामला और चर्चा में आ गया है, हालांकि पुलिस जांच पर इसका कोई सीधा असर नहीं बताया गया है.
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले?
कानूनी जानकारों के मुताबिक, खेल आयोजनों के दौरान प्रतीकों, झंडों या संदेशों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं. कई मौकों पर खेल संस्थाओं ने खिलाड़ियों को गैर-खेल या राजनीतिक प्रतीकों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है. हालांकि हर मामला उसकी परिस्थितियों और मंशा के आधार पर देखा जाता है. इसी वजह से पुलिस इस केस में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की जांच कर रही है.
कानूनी पहलू क्या कहते हैं?
कानून विशेषज्ञों के अनुसार अगर किसी गतिविधि से सार्वजनिक शांति, कानून-व्यवस्था या सामाजिक सौहार्द पर असर पड़ने की आशंका हो, तो पुलिस को जांच और कार्रवाई का अधिकार होता है. हालांकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले यह साबित करना ज़रूरी होता है कि उस कृत्य के पीछे क्या मंशा थी और उसका वास्तविक प्रभाव क्या पड़ा. यही वजह है कि पुलिस फिलहाल किसी जल्दबाजी में कदम उठाने के बजाय तथ्यों के आधार पर जांच पूरी कर रही है.
क्या हो सकता है आगे एक्शन?
फिलहाल जांच जारी है और पुलिस सभी संबंधित पक्षों से पूछताछ कर रही है. जांच पूरी होने के बाद:
पुलिस अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी. नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आगे की कार्रवाई तय होगी. अगर कोई अपराध नहीं पाया गया, तो मामला बंद भी किया जा सकता है. अधिकारियों का कहना है कि अंतिम फैसला जांच रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाएगा.खेल, नियम और जिम्मेदारी
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि खेल के मैदान पर खिलाड़ियों की जिम्मेदारी कहां तक है. खेल को राजनीति या किसी अन्य संवेदनशील मुद्दे से जोड़ने पर क्या प्रभाव पड़ सकता है, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं. फिलहाल सभी की नजरें जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह मामला नियमों का उल्लंघन था या सिर्फ एक विवादित लेकिन गैर-कानूनी घटना.

1 hour ago
