'हां, हजारों लोगों की मौत हुई लेकिन कारण हम नहीं US है', खामेनेई बोले- सुरक्षा बल अपना काम कर रहे थे

1 hour ago

Khamenei on protests: ईरान में हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हजारों लोगों की मौत के बात को आयतुल्ला अली खामेनेई ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है. टीवी संबोधन में खामेनेई ने कहा कि यह अशांति दिसंबर के अंत में शुरू हुई थी, जिसकी वजह आर्थिक मुश्किलें और राजनीतिक असंतोष था. उन्होंने बताया कि इस दौरान हजारों लोग मारे गए. खामेनेई ने कुछ मौतों को अमानवीय और क्रूर परिस्थितियों का नतीजा बताया है, लेकिन अधिकांश जिम्मेदारी अमेरिका और अन्य विदेशी ताकतों पर डाली है, और कहा ईरानी सुरक्षा बल सिर्फ अपना काम कर रहे थे.

अपराधी हैं ट्रंप
खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने इन प्रदर्शनों को बढ़ावा देने का काम किया है. उन्होंने ट्रंप को अपराधी कहा और कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने विरोध प्रदर्शनकारियों को कंट्रोल किया है. उनका कहना था कि देश के अधिकारी उन अपराधियों को बक्शेंगे नहीं. इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय लेवल पर खामेनेई के रवैये को लेकर बहस को फिर से तेज कर दिया है.

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि विरोध और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों में 3,000 से अधिक लोगों की मौत हुई है. हालांकि इंटरनेट कट और बाकी समस्याओं के कारण सही आंकड़े निकालना मुश्किल है. ट्रंप ने खामेनेई के इस बयान के बाद कड़ा रुख अपनाया और कहा कि अब ईरान में नए नेतृत्व की तलाश करनी चाहिए. उन्होंने खामेनेई की हिंसा के लिए आलोचना की और कहा कि वे देश को सही तरीके से नहीं चला रहे हैं.

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ईरान को बर्बाद करने में खामेनेई का हाथ 
ट्रम्प ने कहा कि खामेनेई ने अपने नेतृत्व में देश को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया और जनता पर पहले कभी न देखी गई हिंसा लागू की. उनका कहना था कि नेतृत्व का मतलब डर और मौत नहीं, बल्कि सम्मान और सही तरीके से शासन करना होता है. ट्रंप ने इसे ईरान में राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय दबाव के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है.

इसी बीच खामेनेई ने अमेरिका पर लगातार आरोप लगाए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि हाल में हुई अशांति की प्लानिंग अमेरिका द्वारा किया गया था और इसका उद्देश्य ईरान को बर्बाद करना है. हालांकि, राजधानी तेहरान और अन्य बड़े शहरों में हालात अब सामान्य होने लगे हैं, और कई क्षेत्रों में जीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है. यह संघर्ष ईरान की आंतरिक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर वैश्विक नजर बनाए रखे हुए है.
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