Last Updated:January 18, 2026, 11:50 IST
पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा की मौत ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है. 5 जनवरी की रात क्या हुआ था? पुलिस की तीन थ्योरी और घटनास्थल यानी PO की तलाश अब खत्म होने वाली है. क्या यह सिर्फ सुसाइड था या रची गई थी कोई बड़ी साजिश? फॉरेंसिक सबूत और मोबाइल डेटा से आज उठ सकता है हर राज से पर्दा और बेनकाब होंगे गुनहगार.
पटना पुलिस का एक्शन.पटना. बिहार की राजधानी पटना में 5 जनवरी की उस रात नीट (NEET) छात्रा के साथ क्या-क्या हुआ, इस पर जल्द ही पर्दा उठने वाला है. बिहार पुलिस की सूत्रों की मानें तो रविवार शाम पटना पुलिस इस केस से जुड़े कुछ अहम जानकारी साझा कर सकती है. 5 जनवरी की रात पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही एक मेधावी छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत अब एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई है, जहां से आज कोई बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हो सकता है. यह मामला अब केवल एक छात्रा की मौत का नहीं रह गया है, बल्कि यह पटना पुलिस की साख और मेडिकल सिस्टम की ईमानदारी के बीच छिड़ी जंग बन चुका है. जिस तरह से आक्रोश पनप रहा है, उसको शांत करने के लिए पटना पुलिस रोज इस मसले पर मीडिया से बातकर जानकारी साझा करेगी. एसआईटी की जांच अब उस एक बिंदु पर आकर टिक गई है जिसे, फॉरेंसिक की भाषा में PO (Place of Occurrence) यानी घटनास्थल कहा जाता है.
पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा से भले ही शुरुआत में मीडिया में बयान देने में जल्दबाजी हुई हो, लेकिन वर्तमान में उनकी लाइन ऑफ इंवेस्टीगेशन बेहद सटीक मानी जा रही है. पटना जोन के आईजी जीतेंद्र राणा के नेतृत्व में एसआईटी भी जांच कर रही है. पटना पुलिस की जांच की सुई अब तीन प्रमुख थ्योरी के इर्द-गिर्द घूम रही है, जो इस केस का रुख तय करेंगी.
पहली थ्योरी
पुलिस इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि जिस दिन छात्रा जहानाबाद से पटना पहुंची, उस वक्त उसकी मानसिक स्थिति कैसी थी? क्या सफर के दौरान उसके साथ कुछ ऐसा हुआ जिसने उसे भीतर तक तोड़ दिया?
दूसरी थ्योरी
पटना पहुंचने के बाद और हॉस्टल जाने से पहले वह छात्रा किन-किन इलाकों में गई? वह किससे मिली और क्या हॉस्टल लौटते समय वह सामान्य दिख रही थी? पुलिस उन रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, जहां-जहां उस छात्रा के मोबाइल की लोकेशन मिली है.
तीसरी थ्योरी
यह सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील थ्योरी है. अगर छात्रा हॉस्टल लौटते समय पूरी तरह सामान्य थी, तो क्या उसके साथ जो कुछ भी हुआ, वह हॉस्टल परिसर के भीतर हुआ? क्या शंभू गर्ल्स हॉस्टल का वह कमरा ही वह ‘PO’ है जहां उस मासूम की चीखें दीवारों में ही दफन होकर रह गईं?
सीडीआर कॉल डाटा का राज
पुलिस सूत्रों का कहना है कि मोबाइल टावर लोकेशन, डिलीटेड कॉल डेटा (CDR) और हॉस्टल के आसपास के मूवमेंट पैटर्न से कई ऐसे सुराग मिले हैं जो पहले छिपे हुए थे. यूरिन रिपोर्ट में नींद की दवा के अंश तो मिले हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या वह दवा छात्रा ने खुद ली थी या उसे किसी बड़ी साजिश के तहत दी गई थी? सबसे बड़ा सवाल ‘यौन हिंसा’ की टाइमिंग को लेकर है. क्या गूगल पर सुसाइड सर्च करने से पहले ही वह किसी दरिंदगी का शिकार हो चुकी थी? या किसी और ने सुसाइड वाला सर्च किया?
मोबाइल की सर्च हिस्ट्री
शुरुआती दौर में जिस तरह पुलिस ने मोबाइल की सर्च हिस्ट्री का हवाला देकर इसे सुसाइड करार दिया, उसने परिजनों के शक को यकीन में बदल दिया था. परिजनों का आरोप है कि छात्रा के शरीर पर चोट के निशान थे, जो किसी भी हाल में आत्महत्या की ओर इशारा नहीं करते. अब जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर खुलासे हुए हैं, तो पुलिस बैकफुट पर है और आनन-फानन में हॉस्टल मालिक की गिरफ्तारी इस बात का सबूत है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है.
रविवार का दिन इस केस के लिए अहम
आज का दिन इस केस के लिए निर्णायक है. पुलिस का दावा है कि कई तरह के साक्ष् मिले हैं और कई साक्ष्य और आने हैं. तकनीकी साक्ष्य और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की राय अब उस अंतिम नतीजे पर पहुंच गई है जहां यह साफ हो जाएगा कि उस रात शंभू गर्ल्स हॉस्टल में असली गुनाहगार कौन था. क्या पटना पुलिस अपनी पिछली गलतियों को सुधारते हुए उस मां को इंसाफ दिला पाएगी, या फिर रसूखदार लोग इस मामले को एक बार फिर ठंडे बस्ते में डालने में कामयाब होंगे?
बिहार के डीजीपी विनय कुमार पर भी भारी दबाव है कि वह इस केस में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें. यह केस अब केवल एक हत्या या रेप का नहीं है, बल्कि यह पटना में रह रही हजारों बेटियों की सुरक्षा और उनके माता-पिता के भरोसे का इम्तिहान है. जैसे-जैसे आज की जांच आगे बढ़ रही है, पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल की दीवारों के पीछे छिपे राज फाश होने की उम्मीद बढ़ गई है.
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रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर
भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा...और पढ़ें
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Patna,Patna,Bihar
First Published :
January 18, 2026, 11:50 IST

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