हमास को काबू करेगा या दे देगा खुली छूट? गाजा मिशन में PAK की 'एंट्री' से चिंता में क्यों इजरायल!

1 hour ago

Why Israel worried about Pakistan entry into Gaza: इजरायल के मिलिट्री ऑपरेशन के बाद अब मलबे का ढेर बन चुके गाजा में इंटरनेशनल स्टेबिलिटी फोर्स (ISF) की तैनाती की योजना बन रही है. इस योजना को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तैयार किया है. इस फोर्स का मकसद हमास को निहत्था कर गाजा का पुनर्निर्माण करना है. ट्रंप प्रशासन ने इस फोर्स में शामिल होने के लिए पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से अनुरोध किया था. जिसके बाद पाकिस्तान ने हामी भर दी थी. अब इजरायल के डिफेंस एक्सपर्टों ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताई है.

'पाकिस्तान हमास का खुला समर्थक'

न्यूयॉर्क के थिंक टैंक गेटस्टोन इंस्टीट्यूट ने इजरायली एक्सपर्टों के हवाले से गुरुवार को एक रिपोर्ट जारी की. इसमें युद्ध के बाद गाजा में पाकिस्तान की संभावित भूमिका पर गंभीर चिंता जताई गई है. रिपोर्ट के अनुसार, 'पाकिस्तान हमास का खुला समर्थक है. इसकी वजह से ISF में पाकिस्तान की भागीदारी से गाजा की स्थिरता और हमास को खत्म करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.' 

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रिपोर्ट में कहा गया है, 'इजरायली अधिकारियों ने बताया है कि तीन देश युद्ध के बाद गाजा इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स में हिस्सा लेने के लिए वॉशिंगटन के आग्रह पर राजी हो गए हैं. तीनों की पहचान नहीं बताई गई है, हालांकि इंडोनेशिया उनमें से एक हो सकता है. पिछली रिपोर्ट्स में भी पाकिस्तान को आईएसएफ के वैकल्पिक सहयोगकर्ता के तौर पर पहचाना गया था.'

इजरायल को मान्यता नहीं देता है पाकिस्तान

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर पाकिस्तान को सुरक्षा जिम्मेदारियां सौंपी गईं, तो यह मिशन की सफलता को खतरे में डाल सकता है. इसकी वजह ये है कि पाकिस्तान आधिकारिक रूप से इजरायल को मान्यता नहीं देता है, और उसने कभी भी हमास को आतंकवादी संगठन नहीं बताया है. रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि पाकिस्तान को शायद यह पक्का करने में दिलचस्पी हो कि हमास अपना 'प्रतिरोध' जारी रख सके. मतलब कि आतंकवाद पर लगाम ही न लगाए.

हालांकि पाकिस्तान ने अभी तक आईएसएफ में शामिल होने पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है. उसने कहा है कि उसे इस संबंध में कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है.

इस्लामिक आतंकी संगठनों के साथ रिश्ते!

रिपोर्ट में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI को आतंकी संगठनों का शुभचिंतक बता गया है. दावा है कि पाकिस्तान की सेना और उसकी मुख्य खुफिया एजेंसी ISI पर लंबे समय से इस्लामिक आतंकी संगठनों के साथ रिश्ते बनाने का आरोप लगते रहे हैं.

इजरायली डिफेंस एक्सपर्टों के मुताबिक, दशकों तक ISI ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तानी आतंकी समूहों को बढ़ावा दिया. जिनकी सोच हमास से काफी मिलती-जुलती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे संबंध, पोस्ट-वार गाजा में हमास का मुकाबला करने की पाकिस्तान की काबिलियत पर शक पैदा करते हैं.

'मेजर नॉन-नाटो सहयोगी' मानना कितना सही?

रिपोर्ट में डिटेल में बताया गया है, '7 अक्टूबर, 2023 के नरसंहार के बाद से, हमास के प्रति पाकिस्तान का रवैया और भी अच्छा होता गया है. हमास के प्रतिनिधि को पाकिस्तानी जमीन पर आजादी से काम करने, सार्वजनिक समारोहों में हिस्सा लेने और पाकिस्तान-स्थित आतंकी संगठनों के साथ गठजोड़ बनाने की इजाजत दी गई. इस तरह का बर्ताव सीधे तौर पर हमास को अलग-थलग करने की पश्चिम की कोशिशों को कमजोर करता है और यह सवाल उठाता है कि क्या यूएस को पाकिस्तान को 'मेजर नॉन-नाटो सहयोगी' के तौर पर मानना ​​जारी रखना चाहिए.'

पाकिस्तान से जुड़े एक और बड़े जोखिम का इशारा करते हुए रिपोर्ट में कहा गया, अगर पाकिस्तानी यूनिट्स को गाजा में तैनात किया गया तो सहयोग की आड़ में चुपचाप हमास या उसके क्षेत्रीय समर्थकों को संवेदनशील जानकारी दे सकती हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आईएसआई पूरे दक्षिण एशिया में हमास की पहुंच को आसान बनाने में शामिल है. जिसमें जिहादी नेटवर्क को बढ़ावा देने के लिए बांग्लादेश और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर का दौरा करना भी शामिल है.

(एजेंसी आईएएनएस)

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