Last Updated:November 30, 2025, 13:44 IST
Mohan Bhagwat News: नागपुर में 'श्री ज्ञानेश्वरी' के अंग्रेज़ी संस्करण के विमोचन कार्यक्रम में रविवार को उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि 'कुछ भारतीय लोग अब अपनी ही भाषाएं ठीक से नहीं जानते.'
मोहन भागवत ने भारतीय भाषाओं और मातृभाषाओं के लगातार घटते उपयोग पर गहरी चिंता जताई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने भारतीय भाषाओं और मातृभाषाओं के लगातार घटते उपयोग पर गहरी चिंता जताई. नागपुर में ‘श्री ज्ञानेश्वरी’ के अंग्रेज़ी संस्करण के विमोचन कार्यक्रम में रविवार को उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि ‘कुछ भारतीय लोग अब अपनी ही भाषाएं ठीक से नहीं जानते.’
भागवत ने कहा कि कभी संस्कृत ज्ञान, संवाद और दैनिक कार्यों की प्रमुख भाषा थी, लेकिन आज हालात उलट गए हैं…’ उन्होंने कहा, अब कोई अमेरिकी प्रोफेसर हमें संस्कृत सिखाता है, जबकि हमें दुनिया को संस्कृत सिखानी चाहिए थी.’ उन्होंने बताया कि आज बहुत से बच्चों को अपनी मातृभाषा के सरल शब्द भी नहीं आते और घरों में ‘मातृभाषा+अंग्रेज़ी’ का मिश्रण आम हो गया है.
भारतीय घरों की क्या है समस्या?
उन्होंने साफ किया कि अंग्रेज़ी माध्यम शिक्षा समस्या नहीं है, बल्कि घरों में भारतीय भाषाएं न बोलने की प्रवृत्ति देश की भाषाई विरासत के क्षरण को बढ़ा रही है. उन्होंने कहा कि अगर परिवार में अपनी भाषा ठीक से बोली जाए, तो स्थिति बहुत बेहतर हो सकती है.
भागवत ने उदाहरण देते हुए बताया कि संत ज्ञानेश्वर ने समाज की समझ बढ़ाने के लिए भगवद्गीता का सार मराठी भाषा में दिया. लेकिन कई भारतीय शब्द और अवधारणाएं इतनी गहन हैं कि उनका अंग्रेज़ी में सटीक अनुवाद ही नहीं हो पाता. उन्होंने पूछा, ‘कल्पवृक्ष का अनुवाद अंग्रेज़ी में कैसे करोगे?’ उनका कहना था कि कई भारतीय सांस्कृतिक शब्दों के लिए अंग्रेज़ी में कई शब्द लगाने पड़ते हैं, फिर भी उसका भाव पूरा नहीं आता.
भारत की क्या है ताकत?
भागवत ने कहा कि भारतीय विचार परंपरा हमेशा भौतिक भिन्नताओं के बावजूद एकत्व पर जोर देती है, ‘जहां श्रद्धा है, हम सभी उसी एक सत्य की अभिव्यक्ति हैं.’ उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा व्यक्ति से आगे सोचने, परिवार और समाज को साथ लेकर चलने की सीख देती है. उन्होंने यह भी कहा कि भगवद्गीता ज्ञान और कर्म को दो पंख की तरह मानती है, ‘पक्षी एक पंख से उड़ नहीं सकता. ज्ञान और कर्म दोनों जरूरी हैं, और पक्षी है आपकी श्रद्धा.’ उन्होंने कहा कि ज्ञान बिना श्रद्धा रावण जैसा है, यानी विनाशकारी हो सकता है. गीता में अतीत, वर्तमान और भविष्य का सार निहित है.
भागवत ने प्राचीन ग्रंथों के अंग्रेज़ी अनुवाद की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि दुनिया तक इनका संदेश पहुंचे, और पढ़ते-पढ़ते लोग मूल भाषा सीखने को प्रेरित हों. अंत में उन्होंने कहा कि विज्ञान की नई समझ भी भारतीय आध्यात्मिक विचारों से मेल खाती है- ‘भाषा, भोजन, देवी–देवता, रीति-रिवाज को लेकर हमारी विविधताओं के बावजूद हम एक ही सूत्र में बंधे हैं. यही भारत की ‘एकता में विविधता’ है, जो पूरे विश्व को जोड़ती है.’
About the Author
An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T...और पढ़ें
Location :
Nagpur,Maharashtra
First Published :
November 30, 2025, 13:44 IST

1 hour ago
