Last Updated:November 30, 2025, 10:34 IST
Rabri Devi Bungalow Controversy : बिहार की राजनीति में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा किसी बयान, चुनावी रणनीति या गठबंधन की नहीं, बल्कि एक सरकारी बंगले की हो रही है. 10 सर्कुलर रोड वाला वह बंगला, जहां वर्षों से लालू परिवार सियासत, रणनीति और सत्ता की धड़कनों का केंद्र रहा है, वह अब खाली करना होगा. नीतीश सरकार का कहना है कि पूर्व मुख्यमंतरी की तुलना में नेता प्रतिपक्ष के बड़े कद के अनुरूप उनको बंगला दिया जा रहा है, लेकिन राजद का दावा है कि यह सम्मान नहीं यह सियासी इशारा है!
नीतीश सरकार के नोटिस और राबड़ी देवी का नया बंगला पर बिहार की राजनीति में विवाद क्यों?पटना. बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का पता बदल गया है. साथ ही, तेजस्वी यादव और लालू यादव का भी आवासीय पता बदल गया है. ये सब राबड़ी देवी के लिए नए आवास के आवंटन के कारण हुआ है.अगले 6 महीने के भीतर उन्हें 10 सर्कुलर रोड वाला बंगला खाली करना पड़ेगा. इसका मतलब यह कि बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का पता बदलने वाला है और इसके साथ ही लालू यादव और तेजस्वी यादव का भी आवास बदल जाएगा. नीतीश सरकार ने राबड़ी देवी को विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष के लिए निर्धारित नया आवास-39 हार्डिंग रोड आवंटित कर तो दिया है, लेकिन विवाद थम नहीं रहा है. आरजेडी ने कहा है कि सरकार चाहे कुछ भी कर ले राबड़ी देवी बंगला खाली नहीं करेंगी.
बंगला बड़ा, पर RJD को आपत्ति
वहीं, बंगला विवाद पर विभाग के मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि बिहार में पांच सांविधानिक पद होते हैं, जिनमें चार पहले से ही कर्णकिंत (तय) हैं. पांचवें के लिए सूचना निकाली गई है जो विवाद हो रहा है इसका कोई मतलब नहीं है. अब सवाल उठता है कि आखिर 1 एकड़ वाले बंगले से 3 एकड़ वाले बंगले में राबड़ी देवी क्यों नहीं जाना चाह रही हैं. सीधे तौर पर देखें तो नेता प्रतिपक्ष का स्टेटस और उसी क अनुरूप उनका बंगला भी बड़ा है. सीधे तौर पर आप कह सकते हैं कि नीतीश सरकार राबड़ी देवी के कद के अनुसार बंगला देना चाह रही है, लेकिन राजद इसे कद छोटा करना क्यों मान रहा है?
नया बंगला बड़ा या विवाद बड़ा?
सरकार के बयान और विपक्ष के आरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर 1 एकड़ वाले बंगले से 3 एकड़ वाले बंगले में शिफ्ट करने का विरोध क्यों? कागजों पर देखें तो नया आवास बड़ा, नया और अधिक आधुनिक है. इसमें 6 बड़े बेडरूम, दो मंजिला मुख्य भवन, बड़ा हॉल, कॉन्फ्रेंस रूम, ऑफिस स्पेस, स्टाफ एरिया, सुरक्षा चौकी, CCTV सिस्टम, ड्राइवर क्वार्टर और एक सुव्यवस्थित VVIP परिसर जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं. बंगले का इंटीरियर पूरी तरह रेनोवेटेड है और परिसर में नीम, पीपल, गुलमोहर, अमलतास और मोगरा जैसे पेड़-पौधों के साथ बड़ा गार्डन और किचन प्लॉट तक मौजूद है.
राबड़ी देवी और लालू यादव का नया पता 39 हार्डिंग रोड विवादों में. बंगला आवंटन पर RJD और नीतीश सरकार की तकरार.
बंगला अपग्रेड या इमेज डाउनग्रेड?
39 हार्डिंग रोड का यह सरकारी आवास पहले कई मंत्रियों-रामसूरत राय, समीम अख्तर, विनोद नारायण झा और चंद्रमोहन राय को आवंटित रह चुका है. राजनीतिक दृष्टि से देखें तो इसका लोकेशन भी अहम है. यह बिहार विधानसभा के ठीक सामने है और मुख्यमंत्री आवास 1 अणे मार्ग से करीब 800 मीटर की दूरी पर है. पहले लालू परिवार मुख्यमंत्री आवास से लगभग 300 मीटर दूर था, यानी आप कह सकते हैं कि पहले की तुलना में महज 500 मीटर यानी आधा किलोमीटर की ही दूरी बढ़ी है. लेकिन, सवाल यह है कि सरकार के बस इतना भर करने से कि -‘घर बदल लें’…बिहार की राजनीति क्यों हिल गई?
आखिर RJD नाराज क्यों है?
सरकार के मंत्री विजय चौधरी का कहना है-यह पूरा मामला सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है. बिहार में पांच संवैधानिक पद हैं. उनमें से चार पहले से निर्धारित हैं. पांचवें के लिए नियम के अनुसार आवास दिया जा रहा है, विवाद बेकार है. लेकिन राजद का कथन इसके उलट है. पार्टी के बिहार अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल का दावा है कि यह सिर्फ आवास नहीं, राजनीतिक संदेश है. सवाल यह नहीं कि बंगला बड़ा है या छोटा, बल्कि यह कि क्या सत्ता परिवर्तन के बाद लालू परिवार की राजनीतिक दूरी भी बढ़ाई जा रही है? आरजेडी इसे राजनीतिक ‘डिमोशन’ की तरह पेश कर रही है.
राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड का बंगला छोड़ना होगा, तेजस्वी यादव की याचिका पर पटना हाईकोर्ट के फैसले से सरकारी आवास नियम बदल गए हैं.
कहानी में ट्विस्ट-न्यायालय और तेजस्वी यादव
दिलचस्प तथ्य यह है कि यह पूरा आवास नियम तेजस्वी यादव के उपमुख्यमंत्री रहने के दौरान ही उनके शासन काल में बनाया गया था, जब वह सरकार में डिप्टी सीएम थे. बाद में हाई कोर्ट ने नियम रद्द कर दिया और नया आवंटन शुरू हुआ. अब उसी न्यायिक आदेश ने लालू परिवार को बंगला छोड़ने की स्थिति में ला दिया है. इस विडंबना को जहां विपक्षी दल राजद और कांग्रेस अपने लिए तो वर्तमान सत्तापक्ष अपने लिए फिलहाल राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है.
क्या यह सिर्फ बंगला विवाद है या राजनीतिक संकेत?
अगर सियासी इतिहास देखा जाए तो बंगला और सत्ता का रिश्ता बिहार में हमेशा संवेदनशील रहा है. यही वजह है कि यह विवाद सिर्फ बंगला बदलने का नहीं, राजनीतिक भावनाओं और प्रतिष्ठा का मुद्दा बन चुका है. सरकार कह रही है-नियम का पालन करें और शिफ्ट हो जाएं, लेकिन राजद कह रहा है-यह राजनीतिक मंशा है. वहीं, बिहार की जनता के मन में यही सवाल है कि- क्या यह घर बदलने का सरकारी आदेश है या 2025 के आगे की राजनीति का पहला संकेत?
About the Author
पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट...और पढ़ें
First Published :
November 30, 2025, 10:34 IST

1 hour ago
