Last Updated:November 30, 2025, 09:44 IST
पश्चिम बंगाल में भाजपा नेताओं को लगता है कि राज्य में बिहार वाला फॉर्मूला नहीं चलेगा. BJP West Bengal Strategy for 2026 Assembly Election: बिहार विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल करने के बाद भाजपा मिशन बंगाल में जुट गई है. खुद पीएम नरेंद्र ने इसका ऐलान किया था कि अब पार्टी का लक्ष्य पश्चिम बंगाल में जीत हासिल करना है. लेकिन क्या भाजपा बिहार के फॉर्मूले पर ही बंगाल में फतह हासिल कर सकती है? यह बड़ा सवाल है क्योंकि सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक हर तरीके से बंगाल, बिहार से अलग है. राज्य में भाजपा और टीएमसी के बीच सीधी टक्कर है. लेकिन, बीते तीन चुनावों यानी 2019 के लोकसभा, 2022 के विधानसभा और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों ने भाजपा को अपनी पुरानी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दी है. भाजपा समझ गई है कि बंगाल में सिर्फ हिंदू राष्ट्रवाद के मुद्दे पर चुनावी फतह करना आसान नहीं है. क्योंकि इस राज्य में बिहार-उत्तर प्रदेश की तरह चुनाव में जाति बहुत अहम नहीं है. साथ ही इस राज्य में करीब 30 फीसदी मुस्लिम आबादी रहती है.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस वक्त पश्चिम बंगाल में एसआईआर चल रहा है. इससे पहले बिहार में भी एसआईआर करवाया गया था. बिहार में एसआईआर के दौरान भाजपा घुसपैठ के बड़ा मुद्दा बनाने में कामयाब रही है. लेकिन, बंगाल में एसआईआर पर भाजपा का रुख थोड़ा अलग है. वहां वह कह रही है कि पार्टी राष्ट्रवादी मुस्लिमों के खिलाफ नहीं है.
पश्चिम बंगाल में 2011 से ममता दीदी सत्ता में हैं. इंडियन एक्सप्रेस ने भाजपा के एक नेता से हवाले से लिखा है कि बंगाल में अलग फॉर्मूले की जरूरत है. क्योंकि जाति उतना अहम मुद्दा नहीं जितना बिहार और अन्य राज्यों में है. ऐसे में यहां भाजपा को क्षेत्रीय और धार्मिक समीकरणों में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी करीब 30 फीसदी है. राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा में केवल 40 से 50 सीटों पर ही मुस्लिम समुदाय बेहद प्रभावी है. इन सीटों को नजरअंदाज भी किया जा सकता है. लेकिन, राज्य में कई ऐसी सीटें हैं जहां मुस्लिम आबाद इतनी मजबूत नहीं है लेकिन जीत-हार तय करने में उनकी अहम भूमिका होती है. 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों में इन सीटों पर भी भाजपा की हार हो गई थी. ऐसे में हम इस बार इन सीटों पर मौका नहीं चूकना चाहते हैं. 2011 की जनगणना के मुताबिक पश्चिम बंगाल में 27 फीसदी आबादी मुस्लिम है जबकि 70.5 फीसदी हिंदू हैं.
क्या है भाजपा की रणनीति
इंडियन एक्सप्रेस से भाजपा नेता ने कहा कि इस बार के चुनाव में पार्टी उन मुस्लिम वोटरों को टार्गेट कर रही है जो किसी भी कारण से ममता दीदी से नाराज चल रहे हैं. टीएमसी से नाराज ये मुस्लिम वोटर्स आमतौर पर कांग्रेस या फिर वाम दलों को वोट करते हैं. भाजपा की रणनीति इन मुस्लिम वोटर्स को अपने पाले में लाने की है. पार्टी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के बयान को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है. उन्होंने कहा कि बीते तीन साल में बंगाल में राजनीतिक हिंसा में सबसे अधिक मुस्लिम समुदाय के लोगों की मौत हुई है. वह कहते हैं कि देश के किसी भी राज्य में ऐसे हालात नहीं है. वह मुस्लिमों से कहते हैं कि आप कब तक मंदिर और मस्जिद की कहानी सुनेंगे. ये सब पुरानी चीजें हैं. यहां तक कि बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी मुस्लिमों को लेकर अपना रुख नरम कर लिया है. उनके बयानों का हवाला लेकर टीएमसी भाजपा पर एंटी मुस्लिम होने का आरोप लगाती है. अधिकारी लगातार टीएमसी पर एंटी हिंदू होने का आरोल लगाते रहे हैं.
लेकिन, बिहार चुनाव में मिली जीत के हफ्ते दिन के भीतर ही अधिकारी ने कहा कि टीएमसी गलत धारणा बनाती है कि भाजपा मुस्लिम विरोधी है. हम सभी के विकास की बात करते हैं. हमने मुस्लिम समुदाय को केवल एक वोट बैंक के तौर पर नहीं देखा है. उन्होंने कहा कि भारतीय मुस्लिम एसआईआर का समर्थन कर रहे हैं. इस एसआईआर का मकसद बांग्लादेशी घुसपैठिये और रोहिंग्या शरणार्थियों वोटर लिस्ट से निकालना है. भाजपा के अन्य नेता ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि हम राष्ट्रवादी इंडियन मु्स्लिमों के खिलाफ नहीं हैं. हम केवल घुसपैठ, जिहार और रोहिंग्या के खिलाफ हैं.
हालांकि भाजपा के इस दावे पर टीएमसी और वाम दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने पूछा है कि यह कौन तय करेगा कि कौन राष्ट्रवादी है और राष्ट्रवादी नहीं है.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें
First Published :
November 30, 2025, 09:44 IST

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