Last Updated:November 30, 2025, 13:59 IST
बाबरी विध्वंस की बरसी पर 6 दिसंबर को पहली बार शौर्य दिवस के रूप में मनाने का आदेश जारी किया गया था. इसमें भगवान राम के भजन-आरती के साथ विशेष प्रार्थना सभा, शौर्य यात्रा, राम मंदिर आंदोलन पर प्रतियोगिताएं, चित्रकला, सांस्कृतिक कार्यक्रम, योग-सूर्य नमस्कार और शौर्य गाथाओं के वाचन जैसे कार्यक्रम कराने को कहा गया था.
6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया था. (फाइल फोटो)राजस्थान में शिक्षा विभाग की तरफ से 6 दिसंबर को बाबरी विध्वंस की बरसी पर पहली बार शौर्य दिवस के रूप में मनाने का आदेश जारी किया गया था. हालांकि महज़ 12 घंटे के भीतर सरकार बैकफुट पर आ गई और यह आदेश वापस ले लिया गया.
6 दिसंबर का क्या था कार्यक्रम?
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के निर्देश पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट की ओर से शनिवार रात यह आदेश सभी जिलों और स्कूलों को भेजा गया था. इसमें भगवान राम के भजन-आरती के साथ विशेष प्रार्थना सभा, शौर्य यात्रा, राम मंदिर आंदोलन पर प्रतियोगिताएं, चित्रकला, सांस्कृतिक कार्यक्रम, योग-सूर्य नमस्कार और शौर्य गाथाओं के वाचन जैसे कार्यक्रम कराने को कहा गया था. स्कूलों में विशेष अतिथियों को बुलाने के निर्देश भी शामिल थे.
क्यों वापस लेना आदेश?
यह आदेश शिक्षा मंत्री के मीडिया व्हाट्सऐप ग्रुप में रात करीब नौ बजे प्रसारित हुआ, लेकिन रविवार सुबह नौ बजे शिक्षा मंत्री की ओर से संदेश आया कि ‘अपरिहार्य कारणों’ से कार्यक्रम स्थगित किया जा रहा है. इसके तुरंत बाद मंत्रालय के स्टाफ ने ग्रुप में सफाई दी कि 5-6 दिसंबर को स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं, ऐसे में किसी अन्य गतिविधि का आयोजन संभव नहीं है.
सरकार की सफाई पर क्यों उठ रहे सवाल?
इस घटनाक्रम के कुछ ही समय बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से शिक्षा निदेशक का खंडन पत्र जारी हुआ, जिसमें दावा किया गया कि ऐसा कोई आदेश विभाग की ओर से जारी ही नहीं हुआ था और सोशल मीडिया पर वायरल पत्र फर्जी है. इससे पूरे मामले पर और सवाल खड़े हो गए कि अगर आदेश फर्जी था तो शिक्षा मंत्री के मीडिया ग्रुप में वह कैसे प्रसारित हुआ और फिर उसे वापस लेने की घोषणा क्यों करनी पड़ी. इससे मंत्रालय के भीतर तालमेल के अभाव पर भी उंगलियां उठने लगीं.
इधर, कांग्रेस ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि यह सरकार नहीं, बल्कि ‘सर्कस’ चल रहा है. कांग्रेस प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वैदी ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए सांप्रदायिकता का सहारा ले रही है और ऐसे आदेश इसी सियासत का हिस्सा हैं.
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An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T...और पढ़ें
Location :
Jaipur,Rajasthan
First Published :
November 30, 2025, 13:53 IST

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